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लड़की, जिसके 'खौफ' से हिली थी ईरान की सत्ता:तख्तापलट की आशंका में मिली थी जेल, ब्रिटेन ने चुकाया 53 करोड़ डॉलर का कर्ज, लौटी स्वदेश

नई दिल्ली5 महीने पहले
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ईरान-ब्रिटेन की नागरिकता रखने वाली नाजनीन जगारी-रैटक्लिफ को आखिरकार ईरान सरकार ने रिहा कर दिया है। ईरानी जेल में 6 साल गुजारने के बाद उन्हें गुरुवार को ब्रिटेन भेज दिया गया। नाजनीन पर जासूसी और तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे।

नाजनीन के काम से ईरान की सरकार इतना घबरा गई थी कि उनकी जेल की सजा पूरी होने के बाद भी घर में ही नजरबंद रखा। ब्रिटेन में परिवार के पास जाने की इजाजत नहीं दी गई।

अब जाकर एक समझौते के तहत नाजनीन को आजादी मिल पाई है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन सरकार की तरफ से 53 करोड़ डॉलर ईरान को अदा करने के बाद जगारी-रैटक्लिफ को रिहा किया गया है।

एयरपोर्ट जाते समय गिरफ्तार हुई थीं
नाजनीन न्यूज एजेंसी थॉमसन-रॉयटर्स फाउंडेशन में बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर कार्यरत हैं। उन्हें 3 अप्रैल 2016 को तेहरान में ईरानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया था। उस समय वह अपनी 22 महीने की बेटी गैब्रिएला के साथ अपने माता-पिता के पास ईरानी नव वर्ष मनाने गई थीं। वहां से ब्रिटेन लौटते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। ईरानी सरकार को गिराने की साजिश का दोषी मानते हुए एक ईरानी अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई थी। हालांकि नाजनीन की संस्था और परिवार ने आरोपों का खंडन किया था।

यहां तक की जेल से निकलने के बाद भी उन्हें वापस ब्रिटेन जाने की इजाजत नहीं मिली। करीब एक साल तक घर में नजरबंद रखा गया।

नाजनीन के पति रिचर्ड ने पत्नी की वापस पर खुशी जाहिर की है। रिचर्ड ने कहा, 'यह ख्याल कि हम एक आम जिंदगी जी पाएंगे, कि हमें लड़ते नहीं रहना होगा, कि यह लंबी यात्रा लगभग खत्म हो गई है, बहुत राहत की बात है।' अपनी पत्नी की रिहाई के लिए वह कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं।

पत्नी की रिहाई के लिए पति रिचर्ड रैटक्लिफ ने पिछले साल भूख हड़ताल की थी, बेटी के साथ धरना प्रदर्शन किया था।
पत्नी की रिहाई के लिए पति रिचर्ड रैटक्लिफ ने पिछले साल भूख हड़ताल की थी, बेटी के साथ धरना प्रदर्शन किया था।

जानें, ऐसा क्या कर रहीं थी नाजनीन, जिससे डरी ईरान सरकार
दरअसल, नाजनीन थॉमसन-रॉयटर्स फाउंडेशन से पहले बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट में काम करती थीं, जिसे आज बीबीसी मीडिया एक्शन के नाम से जाना जाता है।

इसके तहत इंटरनेशनल चैरिटी के जरिये ईरान के जर्नलिस्ट और ब्लॉगर्स को ट्रेनिंग कोर्स कराया जाता था। ईरान में मीडिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट जिक-जैक मैगजीन चलाने के साथ ही कई रेडियो प्रोग्राम चलाए गए। ईरान सरकार को यह रास नहीं आया। यहां तक कि साल 2014 में इन कोर्स से ग्रेजुएट हुए जर्नलिस्ट को 11 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।ना

नाजनीन ने बीबीसी वर्ल्ड ट्रस्ट में फरवरी 2009 से अक्टूबर 2010 तक बतौर ट्रेनिंग असिस्टेंट काम किया था। इसलिए ईरानी सरकार ने नाजनीन को टारगेट किया और उन्हें ईरानी नागरिकों को बहकाने व सरकार के तख्तापलट की आशंका में गिरफ्तार किया गया।

ब्रिटिश सांसद ट्यूलिप सिद्दीकी ने उठाई थी आजादी की मांग
ब्रिटेन की सांसद ट्यूलिप सिद्दीकी नाजनीन की रिहाई की आवाज उठाती रहीं हैं। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि नाजनीन तेहरान में हवाई अड्डे पर हैं और अपने घर लौट रही हैं। ट्यूलिप सिद्दीकी उस क्षेत्र की सांसद हैं जहां नाजनीन का घर है।

ब्रिटिश पीएम ने ट्वीट कर दी जानकारी
ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने ट्विटर पर लिखा, 'इस बात की पुष्टि करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है कि नाजनीन और अनुशेह अशूरी की ईरान में अन्यायपूर्ण हिरासत खत्म हो गई है और वे यूके लौट रहे हैं।'

ब्रिटेन ने बताया है कि ईरानी मूल के अमेरिकी पर्यावरणविद मुराद ताबाज को फरलो पर रिहा किया गया है, मुराद भी ब्रिटिश नागरिक हैं।

इस समझौते पर ईरान ने वापस किए कैदी
फरवरी में ईरान ने इन दोनों कैदियों की रिहाई का ऐलान तब किया था जब 2015 की परमाणु संधि को फिर से बहाल करने के लिए बातचीत चल रही थी। ईरान ने कहा कि वह ईरान की जब्त संपत्तियों की मुक्ति और पश्चिमी जेलों में बंद उसके नागरिकों के बदले इन दोनों को रिहा करने को तैयार है।

ब्रिटिश विदेश मंत्री लिज ट्रस ने कहा, 'हमें नाजनीन, अनुशेह और मुराद और उनके परिजनों के हौसले पर गर्व है, उन्होंने वो झेला है जो किसी परिवार को कभी ना झेलना पड़े।'
ब्रिटिश विदेश मंत्री लिज ट्रस ने कहा, 'हमें नाजनीन, अनुशेह और मुराद और उनके परिजनों के हौसले पर गर्व है, उन्होंने वो झेला है जो किसी परिवार को कभी ना झेलना पड़े।'

ब्रिटेन ने चुकाया 40 अरब रुपये का कर्ज
ईरान की समाचार एजेंसी के मुताबिक ईरान ने नाजनीन और अशूरी को तब रिहा किया जब ब्रिटेन ने अपना पुराना कर्ज चुका दिया। ब्रिटेन पर ईरान के पुराने सम्राट शाह का 40 करोड़ पाउंड यानी लगभग 40 अरब रुपये का कर्ज था। यह राशि ब्रिटेन ने 1,750 टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों के लिए लिया था। मगर 1979 के बाद इन वाहनों की डिलिवरी नहीं की गई।

ब्रिटिश विदेश मंत्री लिज ट्रस कहती हैं कि यह लम्हा बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने अपना कर्ज भी चुका दिया है। ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के अनुसार ही कर्ज चुकाया गया है और इस धन का इस्तेमाल मानवीय जरूरतों का सामान खरीदने में ही किया जाएगा।

मोसाद से संबंध रखने के लिए अशूरी को सुनाई थी सजा
दोहरी नागरिकता रखने वाले अनुशेह अशूरी को भी तेहरान में 2017 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ संबंध रखने और जासूसी के आरोप में 12 साल की सजा सुनाई गई थी।

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