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  • Whether To Do A Job Or Not Is A Woman's Personal Decision, But If You Have To Intervene And Understand, Then Also Know The Reason.

आधी दुनिया के पूरे सवाल:नौकरी करना या ना करना महिला का निजी फैसला है, लेकिन अगर दखल देकर समझना ही है तो कारण भी जान लें

सरस्वती रमेश8 दिन पहले
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  • आधी दुनिया पर बाकी दुनिया की पैनी नज़र हमेशा बनी रहती है। आधी दुनिया यानी महिलाएं।
  • इनका हर कदम सवालों के घेरे पहले लांघता है, फिर किसी ओर बढ़ पाता है। पिछले सप्ताह दो सवालों पर ग़ौर किया था हमने।
  • इस हफ्ते सोच के घेरे में एक सवाल हैं। हालांकि, रोज़गार और पेशेवर पढ़ाई से जुड़े और भी सवाल लड़कियों के जीवन को घेरे रहते हैं।

नौकरी करने पर जिस तरह सवाल उठते हैं, जब कोई महिला जॉब छोड़ दे, तो भी वैसे ही पैने प्रश्नों का उसे सामना करना पड़ता है।

शालिनी ने एक बड़ी आईटी कंपनी से इस्तीफा किया तो लोगों को इसका कारण बताते-बताते थक गई। ऐसा लगा मानो नौकरी की ज़रूरत को लेकर उससे ज़्यादा दूसरे ही चिंतित हैं। मिडिल क्लास की कोई अच्छी पढ़ी-लिखी महिला जॉब छोड़ दे तो उसे अक्सर ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ता है। सिर्फ रिश्तेदार ही नहीं, आस-पड़ोस और मामूली पहचान वाले तक जरूर टोक देते हैं- ‘जॉब क्यों छोड़ी? अच्छी खासी सैलेरी तो मिल रही थी। पति सपोर्ट नहीं करते क्या?’ अटकलों का कोई अंत ही नहीं होता। ये सारे सवाल उन वजहों को जाने-समझे बग़ैर दाग दिए जाते हैं जो जॉब छोड़ने की हो सकती हैं। यूं तो यह किसी भी महिला का निजी फैसला होता है, लेकिन फिर भी अगर दख़ल देकर समझना ही है, तो चंद कारण यहां प्रस्तुत हैं —

बच्चों की बेहतर परवरिश

जॉब छोड़ने की सबसे बड़ी वजह बच्चों की परवरिश हो सकती है। अगर पति-पत्नी में से एक की नौकरी से ही ठीक-ठाक काम चल रहा हो तो जॉब छोड़ बच्चों और घर को व्यवस्थित करना महिलाएं ज़्यादा जरूरी मानती हैं। आपको अपने आसपास ऐसी अनगिनत महिलाएं मिल जाएंगी, जिन्होंने बच्चों के बेहतर भविष्य और अच्छी परवरिश के लिए अच्छी-ख़ासी नौकरी कुर्बान कर दी। दरअसल, पति-पत्नी दोनों के वर्किंग होने की स्थिति में बच्चों के उपेक्षित होने की संभावना बढ़ जाती है। एकल परिवारों के चलते घर पर अकेले रह गए बच्चे कई बार ग़लत सोहबत में भी पड़ जाते हैं। इतना ही नहीं अकेलेपन के कारण उनके अवसादग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। जिस बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए मां-बाप पैसे कमा रहे होते हैं, उसका वर्तमान प्रभावित होकर भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगाने लगता है। ऐसे में सजग मांएं अपने बच्चों की देखरेख के लिए नौकरी छोड़ घर संभालती हैं।

मानसिक शांति

आज की व्यस्त दिनचर्या में किसी के पास अपने लिए भी अवकाश नहीं बचा। नतीजा रिश्ते- नाते दूर हो गए। छोटी- छोटी ख़ुशियां हमारी व्यस्तता की भेंट चढ़ गईं। ऐसे में जॉब छोड़ने वाली महिलाएं ज़िंदगी में पैसे से अधिक अपनी शारीरिक-मानसिक सुख और शांति को अहमियत देना चाहती हैं।

विकल्प की उपलब्धता

आज के दौर में पैसा कमाने के लिए सूचना तकनीक के विस्तार ने कई विकल्प उपलब्ध करा दिए है। शिक्षित महिलाओं के पास अब पैसा कमाने के कई रास्ते हैं। वे घर बैठे फ्रीलांसिंग कर सकती हैं। कंसल्टेंसी चला सकती है। बच्चों के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन कोचिंग क्लास चला सकती हैं।

निजी फैसला

जॉब करना या छोड़ना व्यक्ति का निजी मामला है। वैसे पढ़ाई- लिखाई का मकसद केवल जॉब करना भर नहीं हो सकता। पैसे से सामान ख़रीदा जा सकता है सुख और शांति नहीं। तो अगर कोई अपने लिए कुछ समय को या हमेशा के लिए जॉब छोड़ना चाहे तो यह उसकी इच्छा है। इसे लेकर दूसरों को टोका-टोकी नहीं होनी चाहिए।

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