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व्हिसलब्लोअर के खुलासे से फेसबुक की साख को बट्‌टा:जानिए-कौन हैं जकरबर्ग के माथे पर पसीना लाने वालीं फ्रांसेस हौगन, कंपनी को झेलना पड़ा 52 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

नई दिल्ली20 दिन पहलेलेखक: दिनेश मिश्र
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60 मिनट्स इंटरव्यू वाले एपिसोड में फ्रांसेस हौगन। - Dainik Bhaskar
60 मिनट्स इंटरव्यू वाले एपिसोड में फ्रांसेस हौगन।
  • यूजर्स की सुरक्षा से ज्यादा अपनी कमाई को ज्यादा अहमियत देती है फेसबुक
  • हेट स्पीच के खिलाफ फेसबुक ने बड़े दावे किए, मगर 5 फीसदी ही उठाए कदम
  • म्यांमार में सेना ने जातीय नरसंहार के लिए किया फेसबुक का इस्तेमाल
  • ध्यान नहीं देने से ही हुई कैपिटल हिल में हुई 6 जनवरी वाली हिंसा की घटना

व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हौगन के खुलासे और 6 घंटे तक सर्वर डाउन होने की वजह से फेसबुक के शेयर 5 फीसदी तक गिर गए। सीईओ मार्क जकरबर्ग की इस सोशल मीडिया कंपनी को करीब 52 हजार करोड़ रुपए (7 बिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ। दरअसल, अमेरिकी सीबीएस न्यूज चैनल पर 60 मिनट्स इंटरव्यू वाले एपिसोड में फेसबुक की पूर्व कर्मी फ्रांसेस हौगन के खुलासे ने फेसबुक की साख पर बट्‌टा तो लगाया है। इंटरव्यू में फ्रांसेस हौगन ने दावा किया कि फेसबुक ने हमेशा अपने यूजर्स की सुरक्षा से ज्यादा अपनी कमाई को अहमियत दी। 2021 की दूसरी तिमाही तक फेसबुक के करीब 2.8 बिलियन एक्टिव यूजर्स थे। साथ में सीईओ मार्क जकरबर्ग को भी दुनियाभर में सफाई देनी पड़ रही है। आइए जानते हैं कि कौन है फ्रांसेस हौगन और कैसे उन्होंने यह सनसनीखेज खुलासा किया है।

Google और Pinterest में काम कर चुकीं हौगन एक डेटा साइंटिस्ट
दो साल तक फेसबुक में बतौर प्रोडॅक्ट मैनेजर काम कर चुकीं फ्रांसेस एक डेटा साइंटिस्ट हैं। फ्रांसेस के पास कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री और हार्वर्ड से मैनेजमेंट प्रोग्राम में मास्टर डिग्री हैं। उन्होंने इसी साल मई में फेसबुक छोड़ा है। कई साल तक उन्होंने Google और Pinterest व Yelp जैसी कंपनियों के लिए काम किया है। 2010 में उन्होंने एक डेटिंग प्लेटफॉर्म सीक्रेट एजेंट क्यूपिड की शुरुआत की, जो बाद में बेहद लोकप्रिय एप हिंजे बन गया।

फेसबुक में काम करने के दाैरान पता चला कंपनी की कथनी और करनी में फर्क
फ्रांसेस ने बताया कि फेसबुक में उनका काम था सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाएं व्यापक रूप से न फैलें, ताकि लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल न किया जा सके। हालांकि, फेसबुक में नौकरी करने के कुछ दिन बाद ही उनका भरोसा कंपनी पर से उठ गया, क्योंकि फेसबुक की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क था।

फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग।
फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग।

जानबूझकर नफरत वाले कंटेंट को आगे बढ़ाया, ताकि ज्यादा से ज्यादा हो प्रॉफिट
फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म पर अच्छे खराब कंटेंट को जानने के बावजूद कमाई को तवज्जो दी। यूजर्स के बीच डर और नफरत पैदा करने वाले कंटेंट को जानबूझकर आगे बढ़ाया, ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट हो सके। फेसबुक के भीतर क्या चल रहा है, इसे कोई भी बाहर वाला नहीं जानता। कंपनी ने दावों के उलट हेट स्पीच के खिलाफ केवल 5 फीसदी ही कदम उठाए। वहीं, हिंसा भड़काने वाले कंटेंट को रोकने की खातिर बस 1 फीसदी उपाय किए।

म्यांमार में सेना ने नरसंहार के लिए किया फेसबुक का इस्तेमाल
फ्रांसेस के मुताबिक, फेसबुक पर आज भी ऐसे संस्करण मौजूद हैं जो हमारे समाजों को तोड़ रहे हैं और दुनिया भर में जातीय हिंसा का कारण भी बन रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने 2018 में म्यांमार सहित जातीय हिंसा का जिक्र कर कहा कि सेना ने नरसंहार शुरू करने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल किया।

फेसबुक के आंखें फेर लेने की वजह से हुई कैपिटल हिल हिंसा
फ्रांसेस ने एक और दावे में कहा है कि वर्ष 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद फेसबुक ने यूजर्स के हितों की रक्षा करने वाली अपनी सिविक इंटीग्रिटी टीम खत्म कर दी। इसी से मेरा भरोसा फेसबुक से हट गया। फ्रांसेस ने कहा, फेसबुक के आंखें फेर लेने की वजह से ही इस साल 6 जनवरी को कैपिटल हिल हिंसा हुई।