लड़की गाड़ी चला रही है एक्सीडेंट तो होना ही था:सोशल मीडिया पर क्यों महिलाओं को कोसा जा रहा ?

नई दिल्लीएक वर्ष पहलेलेखक: राधा तिवारी
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जब ड्राइविंग की बात आती है तो दुनिया मानती है कि महिलाएं कभी भी अच्छी ड्राइवर नहीं हो सकतीं। अरे, आंटी स्कूटी में ब्रेक भी होता है, पैर से मत रोको। एक्सीडेंट करवाओगी क्या, पार्क में जाकर गाड़ी चलाओ। लड़की चला रही है, सीट बेल्ट बांध लो, नहीं तो हाथ पैर टूट जाएंगे। कहीं जाम लग गया तो पक्का लड़की ही होगी। ये कुछ स्टेटमेंट हैं जो लगभग हर लड़की को सुनने को मिलता है। इन सब ताने को पीछे छोड़ते हुए हीरो प्लेजर ने आलिया भट्ट के साथ अपना नया एड बनाया है, जिसका टैगलाईन है कि ‘लड़की चला रही है’। इसे लेकर लोग तरह-तरह के मीम्स बना रहे हैं। बेटी को ब्रेक मारना सिखाओ, मरते-मरते बचा हूं।

बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के साथ बेटी को ब्रेक मारना सिखाओ
इस ऐड के जरिए औरतों की ड्राइविंग को लेकर समाज में जो धारणा प्रचलित है, उसके खिलाफ मैसेज देने की कोशिश की गई है। एक ट्विटर यूजर ने लिखा- ‘ लड़कियां बस कैंची की तरह अपनी जुबान चला सकती हैं और कुछ नहीं’। एक और यूजर ने लिखा- बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ। वो सब तो ठीक है, बेटी को ब्रेक मारना सिखाओ। मरते-मरते बचा हूं। मैन आर ह्युमन टू नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा-मैं अपनी गाड़ी को उन कार से दूर रखता हूं, जिसे महिला चला रही होती हैं। वो खुद को रियर कैमरा में देखने में बिजी रहती हैं या फोन पर लगे रहती हैं या फिर चिट चैट करने में।

लड़कियों का काम घर संभालना है न कि गाड़ी के ब्रेक
श्रम संसाधन विभाग बिहार सरकार में असिस्टेंट डायरेक्टर सुगंधा सिंह कहती हैं कि जब मैंने कार चलाना सीखा, तो मेरे दोस्त मजाक उड़ाते थे। वे कहते थे कि तुम्हारा काम घर संभालना है न कि गाड़ी के ब्रेक संभालना। शुरुआत में काफी डर लगता था, लोगों के ताने और मजाक सुनकर मेरा कॉन्फिडेंस बिल्कुल खत्म हो गया था। मैंने अपनी नयी गाड़ी ठोक दी, उसके कलपुर्जे बिगड़ गए।

जब मैंने कार चलाना सीखा, तो मेरे दोस्त मजाक उड़ाते थे।
जब मैंने कार चलाना सीखा, तो मेरे दोस्त मजाक उड़ाते थे।

लड़की है कहीं गाड़ी ठोक दी होगी
सर्विस सेंटर पर जब गाड़ी बनाने गई तो ये भी सुनने को मिला कि लड़की है कहीं गाड़ी ठोक दी होगी। लेकिन, मैंने लोगों की बातों को ध्यान नहीं दिया। आज भी जब लोग देखते हैं कि लड़की गाड़ी चला रही है तो ओवरटेक करने की कोशिश करते हैं या आगे से जाकर रास्ता रोक लेते हैं। कभी-कभी पार्किंग में कम जगह होने पर मुझे दिक्कत होती है, लेकिन इसके बाद भी मैं सही से पार्किंग कर लेती हूं। मैं 15 साल से ड्राइविंग कर रही हूं इसके बाद भी घर से निकलने पर परिवार के लोग कहते हैं कि गाड़ी अच्छे से चलाना।

नई जगह पर रास्ता भटक जाने की होती है दिक्कत
दिल्ली में असेंचर सॉफ्टवेयर कंपनी की मैनेजर पूजा सिंह कहती हैं, जब मैंने गाड़ी चलानी सीखी तो गाड़ी चलाते हुए हैंडब्रेक हटाना भूल जाती थी। इसके साथ ही मुझे गियर बदलने में भी दिक्कत होती थी। अभी भी, नई जगह जाने पर मैं रास्ता भटक जाती हूं। मैप लगाकर रास्ता ढूंढने में मुझे दिक्कत होती है। मुझे गाड़ी चलाते हुए 10 साल हो गए और मेरा सिर्फ एक बार गाड़ी से एक्सीडेंट हुआ है। उसमें भी सामने वाले की गलती थी। ओवर स्पीड की वजह से किसी ने मेरी गाड़ी पीछे से आकर ठोक दी थी। गलती सामने वाले की थी इसके बाद भी वे मुझ पर चिल्ला रहे थे।

जब मैंने गाड़ी चलानी सीखी तो गाड़ी चलाते हुए हैंडब्रेक हटाना भूल जाती थी।
जब मैंने गाड़ी चलानी सीखी तो गाड़ी चलाते हुए हैंडब्रेक हटाना भूल जाती थी।

अलर्ट माइंड, सावधानी, प्रैक्टिस और सही ट्रेनिंग है जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसों में 5 करोड़ से अधिक लोग सीट बेल्ट न लगाने, ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटकने और हेलमेट न पहनने की वजह से चोट खाते हैं। वहीं, इन वजहों से करीब 10 लाख लोगों की मौत भी हो जाती है। नॉर्वे के इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स के सर्वे में पाया गया कि कार ड्राइव करते हुए पुरुषों का ज्यादा ध्यान भटकता है। महिलाएं कार ड्राइविंग करते हुए सड़क पर ज्यादा ध्यान रखती हैं।

कार खरीदने में महिलाओं की बढ़ी हिस्सेदारी
ड्राइविंग की बात करें तो अब सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी कार ड्राइव करने में पीछे नहीं हैं। वे लंबे ट्रैवल और अपनी पर्सनल जरुरत के लिए ड्राइविंग करने लगी हैं। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी की मानें तो महिला कार खरीदारों की हिस्सेदारी 7% से बढ़कर 12% हो गई है। हुंडई मोटर में यह बढ़ोतरी 2014 के बाद से 3% हुई है। वहीं, मर्सिडीज बेंज और ऑडी जैसी लग्जरी कार खरीदने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी 20% से भी अधिक है।

ड्राइविंग की बात करें तो अब सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी कार ड्राइव करने में पीछे नहीं हैं।
ड्राइविंग की बात करें तो अब सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी कार ड्राइव करने में पीछे नहीं हैं।

कार पार्किंग के मामले में भी महिलाएं बेहतर
बात सिर्फ सेफ ड्राइविंग तक ही सीमित नहीं। एनसीआरबी का डेटा कहता है कि कार पार्किंग में लगाने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से कहीं बेहतर होती हैं। पार्किंग के लिए तलाशने और कम जगह में भी सही तरीके से गाड़ी पार्क करने में पुरुषों की तुलना में ज्यादा समझदारी से काम लेती हैं। हालांकि, कार पार्क करने में वे थोड़ा ज्यादा समय लेती हैं। बैंक बाजार की एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्रिंक एंड ड्राइव केस में भी पुरुष आगे हैं। हाई ब्रेक लगाने में पुरुष औरतों से 11 फीसदी आगे हैं। पुरुषों के मुकाबले औरतें ज्यादा हेलमेट और सीट बेल्ट लगाए हुए मिलती हैं।

पुरुष ड्राइवर होते हैं ज्यादा लापरवाह
गौतम बुद्ध नगर एआरटीओ प्रशासन में अधिकारी ए.के. पांडे बताते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा सेफ ड्राइविंग करती हैं। महिलाओं सड़क पर भी कम रिस्क लेती हैं। यही कारण है कि दुर्घटना न के बराबर होती है। महिलाओं में अब ड्राइविंग को लेकर पहले की अपेक्षा ज्यादा कॉन्फिडेंस देखने को मिल रहा है और अब पहले के मुकाबले में 70% अधिक महिलाएं ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर रही हैं।

पुरुष ड्राइवर होते हैं ज्यादा लापरवाह ।
पुरुष ड्राइवर होते हैं ज्यादा लापरवाह ।

कोरोना के बाद लोगों में ज्यादा दिखा ड्राइविंग का क्रेज
​​​​​​​दिल्ली में एक ड्राइविंग स्कूल के संचालक शिव सिंह कहते हैं कि पहले की अपेक्षा अब महिलाएं ज्यादा ड्राइविंग सीख रही हैं। सुबह की बजाय शाम को सीखने वालों की संख्या ज्यादा है। शाम के समय में तो लंबी वेटिंग चल रही है। इसमें नौकरी पेशा महिलाओं से लेकर हाउसवाइफ भी हैं, जो शाम को प्राथमिकता दे रही हैं, ताकि किसी दूसरे पर निर्भर न रहना पड़े। सबसे ज्यादा महिलाओं को गाड़ी रिवर्स करने और गियर लगाने में दिक्कत आती है।

ड्राइविंग करते समय इन बातों पर गौर करें

  • फोन पर बात न करें।
  • फिजूल की बातें न सोचें।
  • स्टेयरिंग हाथ में हो तो साथ में खाना न खाएं।
  • आपको हमेशा रेड लाइट जंप करने से बचना है।
  • कभी भी शराब पीकर गाड़ी न चलाएं।
  • गाड़ी की स्पीड कांस्टेंट रखें ।
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