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खूबसूरती और दर्द को बेचती पॉलिटिक्स:रेप पीड़िता के घरवालों से लेकर बिकनी मॉडल को टिकट क्यों देती हैं पार्टियां?

नई दिल्ली10 महीने पहलेलेखक: सुनाक्षी गुप्ता
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देश के पांच राज्यों में अगले माह से विधानसभा चुनाव शुरू हो रहे हैं। लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने दावेदारों के नाम घोषित कर दिए हैं। चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक पार्टियां साम,दाम, दंड, भेद हर तरीका अपना रही हैं। जहां आंसुओं से जनता का प्यार पा सकती हैं वहां रेप पीड़िता के घरवारों को टिकट थमा दे रही हैं। जहां ग्लैमर का तड़का लग सकता है वहां बिकनी मॉडल और टीवी एक्ट्रेस को टिकट देकर चुनावी दंगल में उतार रही हैं।

इस बार उत्तर प्रदेश में 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' का नारा देकर चुनावी मैदान में उतरी कांग्रेस पार्टी ने एक तरफ उन्नाव रेप पीड़िता की मां आशा सिंह को उन्नाव सदर की सीट के लिए उम्मीदवार घोषित किया है। तो वहीं दूसरी ओर तमिल एक्ट्रेस अर्चना गौतम को मेरठ के हस्तिनापुर की सीट से चुनाव लड़वा रही है। अर्चना फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले मिस बिकनी इंडिया 2018 के साथ ही कई ब्यूटी खिताब जीत चुकी हैं।

अब गौर करने वाली बात यह है कि आखिर यह राजनीतिक दल कैसे दुख और खूबसूरती की मार्केटिंग कर रहे हैं, ताकि उनके पास वोटर्स खिचे चले आएं। क्या यह दांव पहली बार 2022 चुनाव में इस्तेमाल किया जा रहा है या पहले भी आजमाए जा चुके हैं यह फॉर्मूले ?

भास्कर वुमन की रिपोर्ट में पढ़िए किन कौन्ट्रोवरशियल महिलाओं को दी गई टिकट और क्या है इसके पीछे पॉलिटिकल स्टंट। क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ।

चुनावी रैली में सिर्फ यह कहना होगा 'मैं रेप पीड़िता की मां हूं'
2017 में उन्नाव से भाजपा के विधायक रहे कुलदीप सेंगर पर एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर बलात्कार करने का केस दर्ज हुआ था। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि वह विधायक के घर नौकरी मांगने गई थी, तब उसके साथ गैंगरेप हुआ था। इस मामले में सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और विधायकी खत्म कर दी गई थी। इस मामले में पीड़िता और उनके परिवार के कई सदस्य एक्सीडेंट में मारे गए थे। तब से परिवार न्याय की उम्मीद में बैठे है।

'मैं चूल्हा चौका करने वाली औरत हूं। न भाषण देना जानती हूं। प्रियंका दीदी ने कहा आपको बस हाथ जोड़कर कहना मैं रेप पीड़िता की मां हूं' - आशा सिंह
'मैं चूल्हा चौका करने वाली औरत हूं। न भाषण देना जानती हूं। प्रियंका दीदी ने कहा आपको बस हाथ जोड़कर कहना मैं रेप पीड़िता की मां हूं' - आशा सिंह

यह मामला मीडिया में काफी चर्चित रहा था, जिसके बाद यूपी में कांग्रेस पार्टी की कमान संभाल रहीं प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिवार को टिकट की पेशकश करते हुए कहा कि 'आपके साथ किसी विधायक ने अत्याचार किया तो हम आपको टिकट देंगे। आप विधायक बनो। सत्ता हाथ में लो और लड़ो। उन्नाव रेप पीड़िता की मां आशा सिंह कहती है कि शुरू में डर भी लग रहा था, क्योंकि 'मैं चूल्हा चौका करने वाली औरत हूं। न भाषण देना जानती हूं न बोलना जानती हूं। प्रियंका दीदी ने कहा आपको कुछ बोलना ही नहीं है। बस हाथ जोड़ लेना और कहना मैं रेप पीड़िता की मां हूं'। जनता के इमोशनस से जुड़ने का इससे अच्छा कोई तरीका नहीं है।

निर्भया की मां और हाथरस रेप पीड़िता के परिवार ने चुनाव लड़ने से किया इंकार
इसी चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने हाथरस गैंग रेप पीड़िता के परिवार को भी टिकट देने के लिए लिस्ट में शामिल किया था। हालांकि दलित परिवार ने चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया। दरअसल 14 सिंतबर 2020 को हाथरस के गांव में दलित परिवार की लड़की का गैंग रेप हुआ था। इसमें आरोपी ऊंची जाति के ठाकुर समुदाय से थे। मामला देश की नजरों में तब आया जब पीड़िता ने दिल्ली के अस्पताल में दम तोड़ दिया और पुलिस ने दबाव में आकर परिवार को जानकारी दिए बिना लड़की का अंतिम संस्कार कर दिया।

जब राजनीतिक दल से टिकट मिलने की बात सामने आई तो परिवार ने यह इंकार कर दिया कि अगर हम राजनीति में आएंगे तो हमारे लिए अपनी बेटी को इंसाफ दिलाना और भी मुश्किल हो जाएगा। एक बात यह भी है कि वह दलित घर से हैं और हमारी संख्या क्षेत्र में बहुत कम है इसलिए हमें कोई वोट नहीं देगा।

मेरा कोई चुनाव लड़ने का इरादा नहीं। - निर्भया की मां आशा देवी
मेरा कोई चुनाव लड़ने का इरादा नहीं। - निर्भया की मां आशा देवी

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि रेप पीड़िता के परिवार को चुनाव लड़वाने की बात कही गई है। 2012 में देश को हिलाकर रख देने वाले दिल्ली के निर्भया गैंगरेप और हत्या कांड में जान गवाने वाली पीड़िता की मां आशा देवी को भी पिछले साल चुनाव लड़ने का बुलावा आया था। उन्हें कांग्रेस पार्टी की नई दिल्ली सीट के लिए अरविंद केजरीवाल के खिलाफ खड़ा करने की बातें सामने आ रही थी। इस पर निर्भया के परिवार ने साफ इंकार करते हुए कहा कि उनका चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है।

साउथ की हिरोइन और बिकनी मॉडल अर्चना गौतम को पहली बार मिली टिकट
मेरठ के परतापुर निवासी अर्चना गौतम ने 2015 में बॉलीवुड में एंट्री की थी। 2018 में मिस बिकिनी इंडिया खिताब जीता, मिस कॉसमॉस वर्ल्ड 2018 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। नवंबर 2021 में कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की और अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में मेरठ की हस्तिनापुर सीट से चुनाव लड़ेंगी। अर्चना को टिकट मिलने के बाद से ही वह काफी सुर्खियों में है क्योंकि उनकी बिकनी फोटोज लगातार वायरल हो रही हैं।

नवंबर 2021 में कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की और अब मेरठ की हस्तिनापुर सीट से चुनाव लड़ेंगी। - अर्चना गौतम
नवंबर 2021 में कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की और अब मेरठ की हस्तिनापुर सीट से चुनाव लड़ेंगी। - अर्चना गौतम

अर्चना हिंदी फिल्म 'ग्रेट ग्रैंड मस्ती', 'हसीना पार्कर' और 'बरोटा कंपनी' जैसी फिल्मों के साथ ही कुबूल है, बुड्ढा, अकबर-बीरबल और सीआईडी जैसे टीवी सीरियल में काम कर चुकी हैं। अब वह साउथ की फिल्मों में भी नजर आ रही हैं। अर्चना के इंस्टाग्राम पेज पर 7.47 लाख फॉलोअर्स हैं। जो अब सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी से भी जुड़ गए हैं। पार्टी इसका भरपूर फायदा भी उठा रही है।

अर्चना के इंस्टाग्राम पेज पर 7.47 लाखसे ज्यादा फॉलोअर्स।
अर्चना के इंस्टाग्राम पेज पर 7.47 लाखसे ज्यादा फॉलोअर्स।

उर्मिला को 2019 में मिली थी कांग्रेस की टिकट लेकिन नहीं कर पाई थी कमाल
अपनी अदाकारी से कई दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने 2019 में कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की थी। मगर मात्र 5 महीने बाद ही पार्टी का साथ छोड़ दिया था। 2019 में लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद उर्मिला ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया। पार्टी के अंदर के राजनीतिक मामलों में फंसकर उर्मिला परेशान हो गई थी। 2020 में उन्होंने शिव सेना पार्टी का दामन थाम लिया।

2019 में कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की लोकसभा चुनाव में हार के बाद 5 महीने में ही छोड़ दी पार्टी। - उर्मिला मातोंडकर
2019 में कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की लोकसभा चुनाव में हार के बाद 5 महीने में ही छोड़ दी पार्टी। - उर्मिला मातोंडकर

उस वक्त भी राजनीतिक दल ने यह सोचकर ग्लैमरस चेहरा उतारा था कि उन्हें बड़ी अभिनेत्री जोड़ने से उनके फैंस का समर्थन मिलेगा, लेकिन उस वक्त उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी।

दुख के आंसू हो या चमकता चेहरा हर चीज की होती है मार्केटिंग, सबका मिलता है फायदा
राजनीतिक दलों द्वारा नए चेहरों को चुनाव में लाने के फायदे पर भास्कर वुमन की टीम ने मिहिर भोज पीजी कॉलेज दादरी के पॉलिटिकल साइंस विभाग के अध्यक्ष समय सिंह मीना से बात की। वह बताते हैं कि यह पार्टियों का पॉलिटिकल स्टंट होता है जिसमें इन्हें तीन तरह से फायदा होता है।

1 - मिलेगी सहानुभूति - रेप पीड़िता का परिवार या ऐसे सोशल एक्टिविस्ट लाना जो खबरों में रहा हो। जनता को इमोशनली जोड़ता है। अगर यह लोग चुनाव हार भी जाते हैं तो भी पार्टी पर यह एडवांटेज होता है कि हमने उसे टिकट दी जो परेशान है और न्याय के लिए लड़ सकता है। उन्नाव के मामले में देखा जाए तो वह ठाकुर बहुल इलाका है, जिन्हें टिकट मिली है वह छोटी जाति से हैं। ऐसे में जीतने की संभावना क्षेत्र की जाति की पॉलिटिक्स पर डिपेंड करता है। मगर वह वोटर्स को इमोशनल कर वोट जरूर बटोर सकते हैं।

2 - इलीट थ्योरी को चुनौती - पॉलिटिक्स में आमतौर पर वही शामिल हो सकते हैं जोकि इलीट सोसाइटी से हैं। ऐसे में कुछ पार्टियां आम लोगों को टिकट देकर यह साबित करना चाह रही है कि हम आम लोगों को भी मौका देते हैं। ताकि जनता को लगे कि पॉलिटिकल पार्टी हमें बराबरी का समझती है। यह सिर्फ ऊंचे और अमीर परिवारों तक सीमित नहीं है।

3 - सोशल मीडिया पर मिलता है सिलेब्रिटी का साथ - किसी सिलेब्रिटी, मॉडल, एक्ट्रेस या खूबसूरत चेहरा लेने से पार्टी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उन्हें कैंडिडेट की मार्केटिंग नहीं करनी पड़ती, उल्टा वह खुद पार्टी की मार्केटिंग करता है। अब क्योंकि चुनाव आयोग ने रैलियां करने पर रोक लगा दी है। पार्टियां डिजिटल रैली कर रही हैं तो उन्हें सिलेब्रिटी को टिकट देने से उनके भी फॉलोअर्स मिल जाते हैं।