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महिलाओं के लिए हॉलमार्किंग सेंटर सुविधा बनेगा या दुविधा?:घर पर पड़े पुराने सोने की कीमत फ़िक्स होगी या सुनार बने रहेंगे 'माई-बाप'?

नई दिल्ली12 दिन पहले
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अगर आप अपने घर रखे पुराने सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग करवाना चाहते हैं, तो इसके लिए अब आपको बहुत दूर जाने की तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी। कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री ने देश के सभी 748 जिलों में से प्रत्येक हेडक्वार्टर और ब्लॉक में एक एसेयिंग एंड हॉलमार्किंग (Assaying & Hallmarking) सेंटर खोलना अनिवार्य कर दिया है। इससे ग्राहकों को यह फायदा पहुंचेगा कि अब उन्हें अपने घर रखे सोने के आभूषणों की शुद्धता जांचने के लिए ज्यादा माथा-पच्ची नहीं करनी पड़ेगी। ग्राहक अपने शहर और ब्लॉक में ही सरकार के हॉलमार्किंग सेंटर जाकर करा सकेंगे।

क्या होती है हॉलमार्क ज्वैलरी और क्यों पड़ी जरूरत?
भारत में सोने की शुद्धता जांचने का काम ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) करता है। इसके लिए सरकार ने 14, 18 और 22 कैरेट के मानक तय किए हैं, जिनके लिए अलग - अलग नंबर होते हैं। मतलब कि 14 कैरेट सोने वाले आभूषण के लिए 585, 18 कैरेट सोने के लिए 750 और 22 कैरेट के लिए 916 नंबर अंकित किया जाता है। आप जो भी ज्वैलरी खरीदती हैं उसपर अगर हॉलमार्क यानी BIS का तिकोना मार्क बना है, तो इसका मतलब है कि उस ज्वैलरी की टेस्टिंग लाइसेंस वाली लैब में हुई है। मतलब ज्वैलरी सरकार द्वारा प्रमाणित है। आप उसे बेफिक्र होकर खरीद सकती हैं।

ग्राहकों तक शुद्ध सोना पहुंचाने और उन्हें ज्वैलर की ठगी से बचाने के लिए भारत सरकार ने सभी ज्वैलर्स को सिर्फ हॉलमार्क वाली ज्वैलरी बेचने के आदेश जारी किए हैं। साल 2018 में BIS देश के चुनिंदा जिलों में यह नियम लागू करता था, लेकिन जुलाई 2021 से देशभर के ज्वैलर्स को यह आदेश दिए गए कि वह सिर्फ हॉलमार्क वाली ज्वैलरी ही बेच सकते हैं।

देश के हर जिले में बनाए जा रहे बीआईएस हॉलमार्किंग सेंटर्स, ग्राहक जांच सकेंगे सोना कितना खरा।
देश के हर जिले में बनाए जा रहे बीआईएस हॉलमार्किंग सेंटर्स, ग्राहक जांच सकेंगे सोना कितना खरा।

जानिए हॉलमार्किंग ग्राहकों के लिए कैसे बना घाटे और मुनाफे का सौदा
अब क्योंकि देशभर में हॉलमार्क वाली ज्वैलरी अनिवार्य हो गई है, तो सभी ज्वैलर्स आपको नया सोना हॉलमार्क के निशान के साथ ही देंगे, लेकिन जो सोना आप आज से कई सालों पहले खरीद कर बैठी हैं उसका क्या होगा।

महिलाओं को इस बारे में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जिन लोगों के पास बिना हॉलमार्क वाली ज्वैलरी है वह उसे कभी भी जरूरत पड़ने पर अपनी सहूलियत के अनुसार बेच सकते हैं। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को अपने घर रखी ज्वैलरी पर बीआईएस मार्क लगवाना अनिवार्य नहीं है। हालांकि अगर लोग यह जानना चाहते हैं कि उनके पास रखा सोना कितना खरा है तो वह इसके लिए गवर्नमेंट सर्टिफाइड हॉलमार्किंग सेंटर पर जाकर गहने की टेस्टिंग करा सकते हैं।

हॉलमार्किंग सेंटर पर ऐसे कराएं अपने सोने की जांच, दो तरह से होती है टेस्टिंग
दिल्ली के करोल बाग स्थित बीआईएस सर्टिफाइड सिटी हॉलमार्किंग सेंटर के विनोद सोनी ने भास्कर वुमन से बातचीत में बताया कि आम ग्राहक सेंटर्स पर आकर अपने पुराने सोने की दो तरह से जांच करा सकती हैं और उन्हें उसी के अनुसार सर्टिफिकेट दिया जाता है।

1 - एसेयिंग रिपोर्ट : इस टेस्ट में ग्राहक जो गहना लेकर जाता है, उसकी प्योरिटी जांची जाती है। यह गहने की उपरी सतह पर होती है। प्योरिटी चेक का पहला स्टेप है, दूसरे पड़ाव में ज्वैलरी का छोटा-सा टुकड़ा लिया जाता है और उसकी एसेयिंग टेस्टिंग की जाती है। इसके लिए बीआईएस सेंटर में अलग मशीन लगाई जाती है। इस टेस्ट की मदद से यह पता लगता है कि ज्लैवरी में किस धातु की कितनी मात्रा है। इससे प्रक्रिया में हर गहने की असली शुद्धता का पता लगता है। टेस्ट के बाद बीआईएस सेंटर्स ग्राहक को एक एसेयिंग रिपोर्ट देते हैं। इसका मूल्य हॉलमार्किंग के बराबर होता है। मतलब, अगर ग्राहक कभी भविष्य में अपना सोना बेचने जाए तो उसे गहने की प्योरिटी जांचने के लिए गहने को गलवाने की जरूरत नहीं है। बीआईएस की एसेयिंग रिपोर्ट ही उसकी प्योरिटी का असली प्रमाण है। नई ज्वैलरी की हॉलमार्किंग से पहले भी ठीक यही प्रक्रिया इस्तेमाल होती है।

2 - एक्स-आरएफ रिपोर्ट : जो ग्राहक गहने का टुकड़ा दिए बिना टेस्टिंग कराना चाहते हैं, उनके लिए एक्स आरएफ रिपोर्ट तैयार की जाती है। यानी एक्स-रे फ्लोरेंस रिपोर्ट। इस प्रक्रिया में मशीन के अंदर एक बार में एक गहना डाला जाता है, जो गहने के ऊपरी सतह की जांच कर उसकी प्योरिटी बताता है। उदाहरण के तौर पर सोना कितने कैरेट का है 14, 18, 22 या 24 इसका पता लगता है। रिपोर्ट में यह भी बताया जाता है कि गहने के अंदर कौनसी धातु कितनी मात्रा में है लेकिन यह सिर्फ अंदाजन होता है, इसकी सटीक मात्रा नहीं लिखी होती है। इसलिए अगर ग्राहक अपना पुराना सोना बेचने जाता है तो वह इस रिपोर्ट के अनुसार अपने गहने की शुद्धता पर ज्वैलर से मोलभाव कर सकता है लेकिन सटीक शुद्धता के लिए उन्हें गहना गलवाना होगा।

बिना सोना गलाए भी पता चल सकेगी सोने की असल शुद्धता, सुनार नहीं बना पाएगा बेवकूफ।
बिना सोना गलाए भी पता चल सकेगी सोने की असल शुद्धता, सुनार नहीं बना पाएगा बेवकूफ।

सोने की शुद्धता जांचने के लिए आता है 200 रुपये खर्च
बीआईएस सेंटर से एसेयिंग जांच करवाने के लिए हर गहने पर 200 रुपये का खर्च आता है। अगर आप 10 गहनों की जांच करवाती हैं तो आपको दो हजार रुपये का खर्च आएगा। मगर एक्स-आरएप जांच ग्राहक को सस्ती पड़ती है। उन्हें शुरू के एक से लेकर पांच गहनों की जांच के लिए 200 रुपये चार्ज देना पड़ता है। अगर इसके ऊपर कोई आइटम बढ़ता है तो हर गहने पर 35 रुपये चार्ज देना होता है।

हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से दोगुनी हुई ज्वैलरी की टेस्टिंग
हॉलमार्क सेंटर संचालक विनोद सोनी बताते हैं कि पिछले साल जुलाई से सेंटर में आम लोग टेस्टिंग के लिए ज्यादा आने लगे हैं। हालांकि, पहले भी लोग अपनी ज्लैवरी की जांच करवाने सेंटर पर आते थे, लेकिन पहले दिन में करीब 100 लोग टेस्टिंग के लिए आते थे तो अब उनकी संख्या बढ़कर 200 हो गई है।

बता दें कि देशभर में बीआईएस रजिस्टर्ड 976 एसेयिंग एवं हॉलमार्किंग पहले से मौजूद हैं। अब सरकार इनकी संख्या बढ़ा रही है।