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30 महिलाओं को देख भाग खड़े हुए पुरुष:छेड़ा शराब छुड़ाओ अभियान, 10 हजार का जुर्माना और गांव में घुसने पर मनाही

5 दिन पहले
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ओडिशा के बाडाकुड़ी गांव की 30 महिलाओं ने मिलकर गांव की पांच शराब की दुकानें बंद कराईं। शराब बेचने और पीने वालों पर 10 हजार का जुर्माना लगाया और गांव में घुसने पर मनाही की।जेयपोरे ब्लॉक की इन महिलाओं की हिम्मत देख शराब बेचने वालों ने उनके सामने घुटने टेक दिए और महिलाओं की जीत हुई।

55 साल के डालिम्बा पंगी अब वापस खेतीबाड़ी की ओर लौट आए हैं। इससे पहले वे शराब के ठेके पर लाइन में लगे नजर आते थे। घर का खर्च पत्नी और बच्चों के भरोसे रहता। इसी तरह दयानी पंगी जो पूरे दिन शराब और जुआ खेलने के चक्कर में रहते थे। अब गांव के बाहर ही दुकान लगाने लगे हैं। डालिम्बा और दयानी जैसे कई लोग शराब को ना और जिदंगी को हां कर चुके हैं। ओडिशा की महिलाओं जैसा दमखम अरुणाचल प्रदेश की महिलाओं ने भी दिखाया है। यहां महिलाएं पुरुषों को नशा मुक्ति केंद्र भेज रही हैं। इस तरह के अभियान से जिलों में घरेलू हिंसा, जुआ और आपस में मारपीट कम हुई है।

30 आदिवासी महिलाओं की हिम्मत
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ओडिशा के जेयपोरे ब्लॉक के बाडाकुड़ी गांव की आदिवासी बहुल इलाके की 30 महिलाओं ने अप्रैल में शराब विरोधी आंदोलन शुरू किया। कोरापुट जिले में महिलाओं ने लगातार दो महीने तक जागरुकता अभियान चलाया और पीने वालों को 10,000 रुपए जुर्माने की चेतावनी दी, जिसके बाद गांव में शराबियों ने पीना बंद कर दिया।

ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश की महिलाएं जिला प्रशासन की मदद से शराब बंदी के अभियान में जुटी हैं। उनकी मेहनत रंग भी ला रही है।
ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश की महिलाएं जिला प्रशासन की मदद से शराब बंदी के अभियान में जुटी हैं। उनकी मेहनत रंग भी ला रही है।

3 से 4 पुरुषों की हो जाती थी मौत
ओडिशा के इस गांव की महिलाओं का कहना है कि इस हमारे गांव में शराब की वजह से 3 से 4 मौतें हो जाती हैं। गांव के मुखिया के साथ मिलकर महिलाओं ने तय किया जो भी व्यक्ति शराब पीता हुआ या बिक्री करता पाया गया उस पर 10,000 हजार का जुर्माना लगेगा। महिलाओं ने तय किया कि जो भी व्यक्ति शराब पीकर गांव में आएगा उसे अंदर घुसने नहीं दिया जाएगा। इस अभियान के बारे में जेयपोर के सब-कलेक्टर, एसडीपीओ और आबकारी अधिकारी को भी बताया गया और उनका समर्थन मांगा गया।

महिलाएं बोलीं - जुर्माने की धमकी रंग लाई
जुर्माने की चेतावनी ने रंग दिखाया और पिछले दो महीने से पांच में से किसी भी शराब की दुकान पर बिक्री नहीं हुई है। 30 सदस्यों की इस टीम की सदस्य चंपा का कहना है कि अब हम टेंशन फ्री होकर सोते हैं, क्योंकि अब पति शराब पीकर नहीं आता है और बच्चों व हमें पिटाई नहीं पड़ती। यही नहीं घरेलू हिंसा के मामले भी कम हुए हैं।

शराबियों को भेजा नशा मुक्ति केंद्र
तो वहीं, अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले की महिलाओं ने भी 50 पुरुषों की सूची जिला प्रशासन के चल रहे नशामुक्ति कार्यक्रम के लिए भेजी। इन पुरुषों को चांगलांग जिले से 100 किमी. दूर बारडुम्सा शहर में भेजा गया। महिलाओं ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि किसी पुरुष ने यहां जाने से मना नहीं किया, क्योंकि सभी को एक साथ जाना था। अब हमें उम्मीद है कि एक दिन चांगलांग नशा मुक्त हो जाएगा।

केंद्र सरकार की मुहिम
अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिला प्रशासन ने पिछले साल मार्च में एक समय में एक गांव से नशा खत्म करने का बीड़ा उठाया। महिलाओं ने जिला प्रशासन के सामने उस समय शिकायत दर्ज कराई जब कुछ महीने पहले ही सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से मादक द्रव्यों के सेवन पर एक सर्वेक्षण कराया गया। तब चांगलांग जिले को देश के उन 272 जिलों में शामिल किया गया जहां नशा ज्यादा होता है। केंद्र ने 'नशा मुक्ति अभियान साल 2020 में शुरू किया, जिसके तहत यह सभी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।