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रिसर्च में दावा:कोरोना से ठीक होने के बाद भी महिलाओं को राहत नहीं, पुरुषों के मुकाबले ज्यादा हैं सेहत के खतरे

नई दिल्ली8 दिन पहले
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  • कोरोना से ठीक होने के बाद महिलाओं को ज्यादा थकान
  • थकान, सांस फूलना और मांसपेशियां कमजोर होने के लक्षण

कोविड-19 से रिकवर हो चुकी महिलाओं की परेशानी अभी कम नहीं हुई है। जिन महिलाओं को कोरोना से ठीक हुए एक साल हो गया, वो अब भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही हैं। विज्ञान पत्रिका द लैंसेट की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को सेहत को लेकर ज्यादा समस्याएं हो रही हैं।

रिसर्च में क्या कहा गया है?
द लैंसेट फ्राइडे नामक पत्रिका में छपी इस रिसर्च में दावा किया गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को 1.4 गुना को ज्यादा थकान और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो रही है। चीन के नेशनल सेंटर फॉर रेस्पिरेट्री मेडिसिन की रिसर्च में ये बात सामने आई है। बता दें कि कोरोना का पहला केस चीन के वुहान में ही सामने आया था.

इस तरह की परेशानियां हो रहीं कोरोना मरीजों को

रिसर्च में ये बात आई है कि कोरोना से संक्रमित मरीजों में से लगभग आधे मरीज किसी ना किसी एक लक्षण से पीड़ित हैं। खासतौर पर महिलाओं को ऐसी कमजोरी ज्यादा महसूस होती है। इन मरीजों को जल्दी थकान महसूस होना, सांस लेने में दिक्कत, सीने में भारीपन, मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण हैं। ये सभी लक्षण पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखे जा रहे हैं।

कैसे तैयार किया गया डेटा?
चीन के नेशनल सेंटर फॉर रेस्पिरेट्री मेडिसिन की टीम ने अपने रिसर्च में वैसे मरीजों को शामिल किया, जिनके रिकवरी को 6 से 12 महीने हो चुके हैं। फिर उनकी हेल्थ को लेकर डिटेल जांच की गई। इनमें सावल-जवाब के अलावा 6 मिनट तक मरीजों को पैदल चलाना और अन्य शारीरिक परीक्षण शामिल थे। इस दौरान टीम ने पाया कि थकान या मांसपेशियों में कमजोरी की शिकायत वाले मरीज ज्यादा थे। हर तीसरा व्यक्ति सांस लेने की तकलीफ और कुछ फेफड़ों से जुड़ी समस्या का सामना कर रहा है।

तीसरी लहर होगी चिंता की विषय

साल 2019 के दिसंबर में चीन के वुहान शहर से शुरू हुई कोरोना महामारी दो साल बाद भी वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है। दुनिया के कई देशों में तीसरी लहर का अलर्ट जारी हो चुका है। दूसरी लहर में भारतीय वेरिएंट डेल्टा प्लस ने काफी तबाही मचाई थी। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी, जिसके वजह से मौतों की संख्या में काफी इजाफा हुआ। कहा जा रहा रहा है कि सितंबर में तीसरी लहर की शुरुआत हो जाएगी और अक्टूबर के आखिर या नवंबर की शुरूआत में ये अपने पीक पर होगा। विशेषज्ञों की मानें तो तीसरी लहर का असर बच्चों पर सबसे ज्यादा होगा। अभी बच्चों के लिए कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं आई है, इसलिए इसे ज्यादा बड़ी समस्या माना जा रहा है।

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