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खुद को लेस्बियन बताने वाली ऑस्ट्रेलिया नेता चलाएंगी सरकार:वोंग बनीं विदेश मंत्री, रायन ने यौन शोषण के मुद्दे पर वित्त मंत्री को हराया

कैनबराएक महीने पहले
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ऑस्ट्रेलिया में 9 साल के इंतजार के बाद लिबरल पार्टी के हाथ में सत्ता आई है। इस बार के चुनावों में निर्दलीय महिला उम्मीदवारों ने सत्ता पक्ष के कई बड़े नेताओं से उनकी सुरक्षित सीटें छीनीं। इन महिलाओं ने जलवायु परिवर्तन और लैंगिक समानता के मुद्दों पर चुनाव लड़ा था।

आइए, जानते हैं नई सरकार की उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने विदेश मंत्री से लेकर कई अहम पदों पर कब्जा जमाया है।

समलैंगिक विवाह की पैरोकार यिंग वोंग

नई सरकार में महिला विदेश मंत्री बनीं पेनेलोपे यिंग येन वोंग साल 2002 से सीनेटर हैं। 54 साल की वोंग दक्षिण ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करती हैं। वोंग साल 2013 से ऑस्ट्रेलियाई लिबरल पार्टी (ALP) की तरफ से सीनेटर के तौर पर सेवा दे रही हैं। वोंग साल 2007 से 2010 तक रड की सरकार में ऑस्ट्रेलिया की पहली जलवायु परिवर्तन मंत्री रही थीं। इसके बाद साल 2010 से 13 तक जूलिया गिलार्ड की सरकार में वित्त मंत्री बनीं।

वोंग ऑस्ट्रेलियाई कैबिनेट में शामिल होने वाली एशियाई मूल की पहली महिला बनी हैं।
वोंग ऑस्ट्रेलियाई कैबिनेट में शामिल होने वाली एशियाई मूल की पहली महिला बनी हैं।

मलेशियाई पिता और ऑस्ट्रेलियाई मां की संतान वोंग का जन्म मलेशिया में हुआ था। अपने माता-पिता के तलाक के बाद, वह 1976 में ऑस्ट्रेलिया चली गईं। जब वह आठ साल की थीं तब एडिलेड में बस गईं। ऑस्ट्रेलिया में BA करने के बाद उन्होंने लॉ की डिग्री हासिल की। राजनीति में पूरी तरह कदम रखने से पहले वोंग एक वकील और राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम कर चुकी थीं।

वोंग अपने आपको खुले तौर पर समलैंगिक (LGBTI) मानती हैं, जो ऑस्ट्रेलिया में ऐसी पहली सांसद हैं। साल 2017 में ऑस्ट्रेलिया में समलैंगिक विवाह को कानूनी जामा पहनाने की पैरवी कर चुकी हैं।

वित्त मंत्री को हराने वाली मोनिक रायन

बाल रोग विशेषज्ञ मोनिक मेरी रायन ने इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और केंद्र में वित्त मंत्री रहे लिबरल पार्टी के बड़े नेता जॉश फ्राइडेनबर्ग को मात दी। मोनिक रायन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। रविवार को अपने विजयी भाषण में रायन ने कहा कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को मिलने वाली कम सैलरी और सेक्शुअल हरासमेंट उनके सबसे बड़े मुद्दे रहे।

मोनिक मेरी रायन कूयोंग की विक्टोरियन सीट से संसद सदस्य के तौर पर पहुंची हैं।
मोनिक मेरी रायन कूयोंग की विक्टोरियन सीट से संसद सदस्य के तौर पर पहुंची हैं।

पार्लियामेंट पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला सांसद लिंडा बर्नी

लिंडा बर्नी ऐसी ऑस्ट्रेलियाई महिला सांसद हैं, जो आदिवासी हैं और संसद पहुंची हैं। ऐसा रिकॉर्ड उन्होंने साल 2003 में बनाया था। उस समय उन्होंने न्यू साउथ वेल्स स्टेट पार्लियामेंट में प्रवेश पाया था। इसके अलावा 63 वर्षीय लिंडा चार्ल्स स्टुअर्ट यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा करने वाली भी पहली ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी थीं।

लिंडा ने देश की संसद में दशकों तक काम किया है। अभी हाल ही में लेबर पार्टी की सरकार की तरफ से लिंडा मूल ऑस्ट्रेलियाई निवासियों की मंत्री बनीं हैं।
लिंडा ने देश की संसद में दशकों तक काम किया है। अभी हाल ही में लेबर पार्टी की सरकार की तरफ से लिंडा मूल ऑस्ट्रेलियाई निवासियों की मंत्री बनीं हैं।

लिंडा ने राष्ट्रीय ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी सुलह परिषद और अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र कार्य समूहों के साथ काम किया है। वे विराडज्यूरी वंश की हैं और लीटन के पास दक्षिण पश्चिम NSW के छोटे से शहर ह्विट्न में पली–बढ़ी हैं।

ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र की मुख्यमंत्री रही कैथरीन रथ गल्लाघेर

लेबर पार्टी की अहम महिला नेता के तौर पर जानी जाने वाल कैथरीन रथ गल्लाघेर ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। साल 2011 से 14 तक वे इस पद पर रही थीं। साल 2019 में लेबर पार्टी की तरफ से वे सीनेटर थीं।

राजधानी कैनबरा में पली-बढ़ी कैथरीन साल 2001 से राजनीति के क्षेत्र में हाथ आजमा रही हैं।
राजधानी कैनबरा में पली-बढ़ी कैथरीन साल 2001 से राजनीति के क्षेत्र में हाथ आजमा रही हैं।

भारतीय मूल के देव शर्मा को हराने वाली ऐलेग्रा स्पेंडर

सिडनी की वेंटवर्थ सीट पर एक उद्योगपति ऐलेग्रा स्पेंडर ने भारतीय मूल के लिबरल उम्मीदवार देव शर्मा को हराया। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतरी स्पेंडर पहले लिबरल पार्टी से ही ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता एक दशक तक लिबरल पार्टी के सांसद रहे और उनके दादा देश के विदेश मंत्री रहे थे।

स्पेंडर की जीत के बाद वेंटवर्थ की सीट एक मिसाल बन गई है कि कैसे पढ़े-लिखे मध्यमार्गी लिबरल वोटर जो जलवायु विज्ञान की समझ रखते हैं और स्वच्छ तकनीक में निवेश करना चाहते हैं, पार्टी को छोड़ रहे हैं।

महिलाओं ने किया कमाल

कुल मिलाकर लिबरल की इस जीत में निर्दलीय महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है, जिन्होंने मुख्यतया जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। यह चुनाव बहुत योजनाबद्ध तरीके से लड़ा गया, जिसमें अलग-अलग सीटों पर समुदायों के समूह बनाकर प्रचार किया गया। आमतौर पर इस चुनाव प्रचार की कमान महिलाओं के हाथों में ही थी।