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वर्ल्ड आर्थराइटिस डे:दिव्यांगता का चौथा सबसे बड़ा कारण बन सकता है गठिया रोग, दूध-दही और पनीर रखेगा महिलाओं की हडि्डयों को मजबूत

नई दिल्ली4 दिन पहले
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अगर आपको रह-रह कर घुटनों, एड़ियों या फिर पैरों की उंगलियों में दर्द रहता है और सूजन आ जाती है। दर्द के कारण चलने-फिरने में दिक्कत होती है तो अलर्ट हो जाइए। यह आर्थराइटिस यानी गठिया रोग भी हो सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल आबादी में से 22% से 39% लोग आर्थराइटिस से पीड़ित हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। एक अनुमान के मुताबिक आगामी एक दशक में आर्थराइटिस ​दिव्यांगता का चौथा सबसे बड़ा कारण हो सकता है। विश्व गठिया दिवस पर जानें कि क्या है आर्थराइटिस और इससे कैसे बचें...

जागरुकता के लिए शुरू हुई पहल
दुनिया भर में हर साल 12 अक्तूबर को वर्ल्ड आर्थराइटिस डे यानी विश्व गठिया दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है कि लोग इस बीमारी के प्रति जागरूक हो सकें। आर्थराइटिस कैसे और क्यों होता है, इससे कैसे बचा जा सकता है, इन बातों के संबंध में जागरुकता फैलाकर ही इसे फैलने से रोका जा सकता है।

आर्थराइटिस को करीब से जानें
आर्थराइटिस जोड़ों में दर्द और जकड़न पैदा करने वाली बीमारी है। उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के आब्सटेट्रिक्स तथा गाइनोकोलॉजी हेड डॉ. एकता बजाज का कहना है कि यह जोड़ों की हड्डियों पर चढ़ी आर्टिकुलर कार्टिलेज की परत को कमजोर करती है। इससे जोड़ों का हिस्सा खुरदरा हो जाता है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न की समस्या हो जाती है। यह गलत पॉश्चर, मोटापा और विटामिन डी व पोषक तत्वों की कमी के चलते होता है। इसके अलावा, ज्यादा या गलत एक्सरसाइज करने से भी यह समस्या हो सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

गठिया की चपेट में महिलाएं अधिक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 60 वर्ष से अधिक आयु के 9.6 फीसदी पुरुष और 18 फीसदी महिलाएं आर्थराइटिस की चपेट में हैं। आर्थराइटिस से पीड़ित 80 फीसदी लोगों के काम करने की गति बेहद धीमी हो गई है, जबकि 25 फीसदी लोग अपने रोज के काम भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। भारत में होने वाला गठिया रोग उम्र से संबंधित होता है, जो घुटने या फिर शरीर के किसी भी जोड़ को प्रभावित करता है। महिलाओं में घुटने में दर्द संबंधी समस्याओं की शुरुआत औसत 50 वर्ष की आयु में होती है, जबकि पुरुषों में यह आयु 60 वर्ष है।

चीन की तुलना में भारत में हैं दोगुने मरीज

  • देश में 15 करोड़ से ज्यादा लोग घुटने की समस्या से पीड़ित हैं।
  • इनमें से 4 करोड़ को टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) की जरूरत।
  • चीन में 6.5 करोड लोग घुटने की समस्या से पीड़ित हैं चीन में।
  • पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में गठिया मरीजों की संख्या 15 गुना ज्यादा। (सोर्स: आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन)

डबल 'एस' हैं हड्डियों के दुश्मन
डॉ. एकता बजाज ने बताया कि शुगर और सॉल्ट को व्हाइट पॉइजन कहते हैं। ये दोनों ही सेहत के लिए सही नहीं हैं। मोटापा को आर्थराइटिस का एक बड़ा कारण माना जाता है। एडेड शुगर और सॉल्ट मोटापा को बढ़ाने का काम करता है। इससे ज्वाइंट पर प्रेशर पड़ता है।

डाइट से आर्थराइटिस को कंट्रोल किया जा सकता है।
डाइट से आर्थराइटिस को कंट्रोल किया जा सकता है।

गठिया से ऐसे बचें
डॉ. एकता बजाज कहती हैं कि वॉकिंग जैसी एक्सरसाइज और योग महिलाओं के लिए हेल्पफुल। महिलाएं अपनी ​डाइट ​में विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन, कैल्श्यिम व अन्य जरूरी पोषक तत्वों को शामिल करें। महिलाएं दूध, दही और पनीर जरूर खाएं। विटामिन डी के लिए सुबह की धूप में बैठें। साथ ही मोटापे को नियंत्रित रखें।

डॉक्टर से परामर्श लें
जालंधर स्थित एनएचएस हॉस्पिटल के रोबोटिक्स ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन और ऑर्थोपेडिक डॉ. शुभांग अग्रवाल बताते हैं कि आमतौर पर ​गठिया रोग 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होता है, लेकिन अब बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जंप करके चलना भी हडि्डयों के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए जोड़ों में दर्द व सूजन होने पर तुंरत डॉक्टर से परामर्श लें।