• Hindi News
  • Women
  • World Heart Day 500 Years Ago, Not A Scientist, A Painter Made A Painting Of A Woman's Heart And Told That The Heart Beats In Our Body, Today Women Are More Prone To Heart Attack

वर्ल्ड हार्ट डे:500 साल पहले किसी साइंटिस्ट ने नहीं, एक पेंटर ने महिला के हार्ट की पेंटिंग बनाकर बताया था कि हमारे शरीर में धड़कता है दिल, आज महिलाओं में हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: दिनेश मिश्र
  • कॉपी लिंक
स्रोत: द इंटरहार्ट स्टडी - Dainik Bhaskar
स्रोत: द इंटरहार्ट स्टडी
  • डायबिटीज बढ़ने के साथ महिलाओं में हार्ट की बीमारी करती है साइलेंट किलर का काम
  • महिलाओं में हार्ट की नसें संकरी, ऐसे में रेग्युलर एक्सरसाइज से टाला जा सकता है खतरा
  • कोई समस्या है तो फौरन घरवालों को बताएं और साल में दो बार कराएं चेकअप

यही कोई 500 साल पहले की बात होगी, जब यूरोप मध्ययुगीन दौर में करवट ले रहा था, एक इतालवी चित्रकार ने कुछ आड़ी तिरछी रेखाएं खींची और बताया कि इंसान के भीतर धड़कने वाला दिल ऐसा होता है। इस तस्वीर में हार्ट की बनावट ऐसी थी कि साइंटिस्ट भी हैरत में पड़ गए, क्योंकि तस्वीर में हार्ट में खून लेकर आने-जाने वाली नसों यानी आर्टरीज और वेंस और हार्ट के चार चैंबरों को दर्शाया गया था, जो आज भी तकरीबन सही हैं। इस तस्वीर के सामने आते ही दुनिया में तहलका मच गया, क्योंकि अभी तक इंसान के जिस्म की अंदरूनी बनावट को कोई सामने नहीं ला पाया था। मेडिकल साइंस को यह अभूतपूर्व योगदान देने वाले और कोई नहीं, मशहूर पेंटर, मूर्तिकार, वैज्ञानिक और दार्शनिक लियोनार्दो द विंची थे। उन्होंने अपने प्रयोगों के लिए एक मृत महिला के शरीर की चीरफाड़ की और हार्ट, वस्कुलर सिस्टम और यहां तक कि आर्टरीज की बीमारियों के अलावा गर्भ में भ्रूण कैसे पलता है, इसकी भी तस्वीरें बनाईं और दुनिया को इसके बारे में जानकारी दी। आज महिलाएं ही दिल की बीमारियों की चपेट में ज्यादा हैं। लियोनार्दो का दौर वह था, जब यूरोप में पुनर्जागरण की शुरुआत हो रही थी। क्रिस्टोफर कोलंबस अमेरिका की खोज करने के बाद वहां पर लोगों को बसा रहे थे, वहीं कारोबार करने निकले वॉस्को डिगामा समंदर में भटकते-भटकते भारत की सरजमीं पर पहुंच गए थे। उन्होंने कालीकट के तट पर पुर्तगालियों की बस्तियां बसानी शुरू कर दी थीं। लियोनार्दो की इस खोज ने मेडिकल साइंस में एक तरह से क्रांति ला दी, क्योंकि 500 साल बाद आज दुनिया में हार्ट के मरीज जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे साइंटिस्ट भी चिंतित हैं। हैरत वाली बात यह है कि यह जोखिम अब महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल बर्डन ऑफ कॉर्डियो वैस्कुलर डिजीज के एक अध्ययन के मुताबिक, 2019 तक इस बीमारी के पूरी दुनिया में 5.23 करोड़ मामले सामने आए थे, जो 1990 के 2.71 करोड़ के मुकाबले करीब दोगुना है। वहीं, इससे होने वाली मौतों की बात करें तो यह और भी चिंता बढ़ाने वाली है। 2019 तक कार्डियाे वस्कुलर डिजीज की वजह से दुनियाभर में करीब 1.8 करोड़ लोगों ने जान गंवाई, जबकि 1990 में मौतों का यह आंकड़ा 1.2 करोड़ ही था।

मेनोपॉज के बाद महिलाओं में 3 गुना ज्यादा है जोखिम
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के मुताबिक, मौतें भले ही अभी महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा हो रहीं हों, मगर हार्ट की बीमारियां सबसे ज्यादा महिलाओं में ही बढ़ रही हैं। मेनोपॉज के बाद पुरुषों के मुकाबले 2 से 3 गुना हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। इसके अलावा, उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे महिलाओं में जोखिम भी ज्यादा बढ़ जाता है। 80 साल की उम्र के आसपास हार्ट की बीमारियों के हर 15 मामलों में मौत होने की आशंका रहती है, जबकि पुरुषों में यही आशंका हर 19 मामलों में होती है।

बैड फूड हैबिट्स, हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसे 5 बड़े रिस्क फैक्टर
2018 में हेल्थ जर्नल लैंसेट में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, 5 बेहद जोखिम वाले रिस्क फैक्टर हैं-बैड फूड हैबिट्स, एयर पॉल्यूशन, हाई कॉलेस्ट्राॅल, टाेबैको और हाइपरटेंशन। इसके अलावा, डायबिटीज और मोटापे की वजह से हार्ट रिलेटेड बीमारियां बढ़ रही हैं।

राजस्थान, एमपी, यूपी, दिल्ली में महिलाओं में ज्यादा बढ़ रही समस्या
हार्वर्ड की एक रिसर्च के मुताबिक, कार्डियो वस्कुलर डिजीज पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा हो रही है। खासकर 65 साल की उम्र के पार की महिलाओं पर इसका ज्यादा विपरीत असर पड़ रहा है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के एक अध्ययन के अनुसार, 2017-18 के दाैरान, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्यों में थे, जहां महिलाओं को कार्डियो वस्कुलर डिजीज की समस्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा पाई गई।

मेनोपॉज के बाद बंद हो जाते हैं कई हॉर्मोंस, नहीं मिल पाती है सुरक्षा
कार्डियो वस्कुलर डिजीज में हार्ट फेल, आर्टरी ब्लॉकेज और हार्ट अटैक की समस्याएं शामिल होती हैं।मुंबई में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में एडल्ट कॉर्डिएक सर्जरी के हेड और हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट सर्विस के डायरेक्टर डॉ. नंदकिशोर कपाड़िया कहते हैं कि पहले महिलाएं घरेलू काम करती थीं। उससे उनका मोटापा नियंत्रित होता रहता था। आज महिलाएं जो घर में हैं, वे टीवी देखने में अभ्यस्त हो जाती हैं। उनका एक्सरसाइज बंद रहता है। देश में अनुमानित तौर पर 30 फीसदी महिलाएं ओवरवेट हैं। वे कभी जांच भी नहीं कराती हैं। 45 साल के बाद महिलाओं में मेनोपॉज बंद हो जाता है और इसी के साथ उनमें निकलने वाले जरूरी हॉर्मोंस भी बंद हो जाते हैं। ये हॉर्मोंस महिलाओंं को कई बीमारियों से सुरक्षा देते हैं। इसके अलावा, मेनोपॉज के बाद हार्ट कमजोर हो जाता है। कोरोना महामारी के दौरान और मौजूदा जीवनशैली के चलते महिलाओं में स्ट्रेस लेवल बढ़ा हुआ है। यह हार्ट की बीमारियों के लिए खतरे की घंटी हैं।

महिलाओं में बढ़ रहा है स्ट्रेस लेवल।
महिलाओं में बढ़ रहा है स्ट्रेस लेवल।

महिलाओं में हार्ट की नसें बेहद संकरी, ब्लॉक होने की आशंका ज्यादा
विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाएं अपनी बीमारी के बारे में जल्दी किसी को कुछ बताती नहीं हैं। अगर बीमारी है भी तो उनके रेग्युलर चेकअप पर ध्यान ही नहीं दिया जाता है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़े हुए कॉलेस्ट्रॉल की महिलाएं अनदेखी करती हैं। इन बीमारियों के होने पर उन्हें साल में कम से कम दो बार चेकअप कराना चाहिए। अब 30-35 साल की महिलाओं में भी यह बीमारी बढ़ रही है, जाे बेहद चिंताजनक है। जेनेटिक रूप से महिलाओं में हार्ट की नसें बहुत संकरी होती हैं, करीब सवा मिलीमीटर की। ऐसे में हार्ट और नसों का ब्लॉक होने का जोखिम बढ़ जाता है। गांवों में भी अब यह खतरा बढ़ रहा है, क्योंकि गांवों में भी शहरों जैसी ही सुविधाएं हो गई हैं। लोगों का चलना-फिरना कम हो गया है।

नियमित एक्सरसाइज और योग-प्राणायाम से खतरे काे टाला जा सकता है।
नियमित एक्सरसाइज और योग-प्राणायाम से खतरे काे टाला जा सकता है।

महिला हार्ट पेशेंट के लिए साइलेंट किलर बन जाती है डायबिटीज
डाॅ. कपाड़िया कहते हैं कि महिलाओं में हार्ट की समस्या रिपोर्ट ही कम होती हैं। हर 10 पेशेंट में से 2 महिलाएं हैं। भारत में हार्ट फेल होने या इससे जुड़ी अन्य बीमारियां रिपोर्ट नहीं होती हैं। डायबिटीज की वजह से हार्ट फेल की समस्या बढ़ जाती है। यह साइलेंट किलर का काम करती है। अक्सर सुनने में आता है कि वह तो रात में अच्छी भली सोई थीं, सुबह उठी ही नहीं। यह हार्ट फेल ही है, जो चुपचाप लोगों को मौत की नींद सुला देता है। महिलाओं में इसकी जागरूकता थोड़ी बढ़ रही हैं। घर से बाहर तक काम करने वाली महिलाओं को खानपान से लेकर एक्सरसाइज पर ध्यान देना होगा।