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लर्निंग टाइम:गिरकर संभलना हो या खुलकर हंसना, अपने छुटकू से सीखें जोश भरी जिंदगी जीने का तरीका

2 महीने पहले
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  • पैरेंट्स बनने के बाद अपने बच्चे से भी बहुत कुछ सीख सकते हैं आप

जब आपकी जिंदगी में एक बच्चा आता है तो यह सीखने का वक्त होता है, सिखाने का नहीं। आपकी जिंदगी में उसके आने के बाद अनजाने ही आप हंसते हैं, खेलते हैं, मस्ती करते हैं, नाचते, गाते-बजाते हैं, पलंग के नीचे दुबकते हैं और वह सब करते हैं जो आप बरसों पहले भूल चुके थे। माता-पिता बनने के बाद पैरेंटिंग का एक मजेदार दौर ये भी है।

पहले ये सीखें, सिखाना तो जिंदगी भर है

  • खुलकर हंसना : एक बच्चे की हंसी जितनी उन्मुक्त और निर्मल होती है, वो हंसी बहुत से लोग बरसों पहले खो चुके होते हैं। अपने नन्हे शिशु से खुलकर हंसना सीखें।
  • गिरकर संभलना : बच्चे जब चलना सीखते हैं तो कई बार गिरते हैं। कई बार गिरने-संभलने की प्रक्रिया के बाद वे मदमस्त होकर चलते हैं। ये भी बच्चे ही सिखा सकते हैं।
  • सीखते रहना : बड़े होने के बाद हम लर्निंग लेसन भूल जाते हैं। नई-नई चीजें सीखते रहने का हुनर भी बच्चों से ही सीखा जा सकता है।
  • तकलीफ में रोना : मैच्योर होने के बाद लोग बर्दाश्त करना सीख लेते हैं। या यूं कहें कि परेशानियों को अंदर दबाए रखते हैं। तकलीफ में हैं तो रो लेने की कला भी बच्चों से सीखें। मन हल्का होने के बाद परेशानियों का हल मिलने लगता है।
  • आनंदित रहना : बच्चे छोटी-छोटी चीजों से खुश हो जाते हैं। बंदर, चिड़िया देखकर भी ऐसे उत्साहित होते हैं जैसे खजाना मिल गया हो। हर पल आनंद में रहने का गुण भी उनसे सीखा जा सकता है।
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