चावल बन सकता है कैंसर की वजह:इस तरह पकाना हो सकता है खतरनाक, पकाने से पहले जरूर करें ये काम, रिसर्च में हुआ खुलासा

17 दिन पहलेलेखक: राधा तिवारी
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  • घर में बनाती हैं गलत तरीके से चावल तो बन जाएगा जहर
  • भारतीय लोगों को क्यों अलर्ट करने की जरूरत
  • परिवार वालों को हो सकता है, इस बीमारी का खतरा

इंग्लैंड की क्वीन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चावल को लेकर काफी चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिसर्चर्स का कहना है कि अगर आप जल्दबाजी में पकाकर चावल खा रहे हैं तो यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी कारण बन सकता है। उनका कहना है कि चावल की फसल की बेहतरी के लिए इ्स्तेमाल हो रहे कीटनाशकों से हमारी हेल्थ को काफी नुकसान हो सकता है। कीटनाशकों का ये असर तभी कम हो सकता है जब चावल तुरंत पकाकर न खाया जाए।

चावल खाना हो सकता है खतरनाक
चावल खाना हो सकता है खतरनाक

क्या कहती है स्टडी

मिट्टी में पेस्टिसाइड्स और इंसेक्टिसाइड्स से निकलने वाला केमिकल चावल को खतरनाक बना रहा है। ये कई मामलों में आर्सेनिक पॉइजनिंग की वजह भी बन सकता है। मिट्टी में कीटनाशकों के उपयोग से चावल तक पहुंचने वाला आर्सेनिक तत्व कैंसर और हार्ट की बीमारी की आशंका बढ़ाता है।

आर्सेनिक पॉइजनिंग की वजह है चावल
आर्सेनिक पॉइजनिंग की वजह है चावल

एक नहीं, कई शोध कहते हैं यही बात

कई और ऐसी स्टडीज हैं जो दावा करती हैं कि चावल एक कार्सिनोजेन है यानी कैंसर की वजह बन सकता है। एक स्टडी में महिलाओं ने कैलिफोर्निया टीचर्स स्टडी में हिस्सा लिया, जहां महिलाओं के ब्रेस्ट और दूसरे कैंसर फैक्टर का टेस्ट किया गया। इसमें पाया गया कि रोज चावल खाने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट और दूसरे कैंसर का प्रतिशत, चावल न खाने वाली महिलाओं से बढ़ा-चढ़ा था।

आर्सेनिक से दुनियाभर में हर साल 50 हजार मौत
आर्सेनिक से दुनियाभर में हर साल 50 हजार मौत

कैसे पहुंचता है चावल तक जहर?

फसल की पैदावार के दौरान ही मिट्‌टी के जरिए आर्सेनिक जैसे कई केमिकल चावल में पहुंचते हैं। आर्सेनिक लगभग हर पेस्टिसाइड और इंसेक्टिसाइड में होता है। खेती में किसानों के बीच इसका बढ़ता इस्तेमाल खतरा बढ़ा रहा है। कई देशों के अंडर ग्राउंड वॉटर में आर्सेनिक काफी मात्रा में मौजूद है। यह धीरे-धीरे शरीर में पानी और भोजन के जरिए पहुंच रहा है। अनाज खाने पर ये लिवर से जुड़ी बीमारियां और कैंसर की वजह बनते हैं। कुछ मामलों में मौत तक हो जाती है। रिसर्चर के मुताबिक, चावल में आर्सेनिक होने के कारण दुनियाभर में 50 हजार मौतें हर साल होती हैं।

अंडर ग्राउंड वॉटर में आर्सेनिक काफी मात्रा में मौजूद
अंडर ग्राउंड वॉटर में आर्सेनिक काफी मात्रा में मौजूद

क्या है आर्सेनिक

आर्सेनिक कई मिनरल्स में मौजूद एक केमिकल है. इसका इस्तेमाल इंडस्ट्रियल इंसेक्टिसाइड और पेस्टीसाइड बनाने में होता है।

कैसे नुकसान पहुंचाता है ?

अगर लंबे समय तक भोजन या पानी के जरिए ये केमिकल हमारे शरीर में जाता है तो इससे आर्सेनिक पॉइजनिंग हो सकती है। उल्टी, पेट दर्द और डायरिया के अलावा गंभीर बीमारी जैसे कैंसर भी हो सकता है।

क्या है चावल पकाने का सही तरीका ?

  • क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के अनुसार, दिन में चावल खाना हो तो उन्हें रातभर पानी में भिगो दें, इससे आर्सेनिक के स्तर में 80% की कमी आ जाती है।
  • पहले तरीके में दो भाग पानी और एक भाग चावल पानी को भाप देकर पका लिया जाता है।
  • दूसरे तरीके में चावल के एक भाग में पांच भाग पानी मिला दिया गया और एक्स्ट्रा पानी खत्म होने दिया जाए। इस तरीके से आर्सेनिक का स्तर आधा रह जाता है।
  • तीसरे तरीके में चावल को रातभर भिगोया गया और ये पाया गया कि आर्सेनिक का लेवल 80 फीसदी कम हो गया। अगर किसी के पास समय नहीं है तो चावल को 3 से 4 घंटे के लिए भिगोकर भी पकाया जा सकता है।

देश में कितने लोग चावल खाते हैं

दुनियाभर में चावल के उत्पादन में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। दुनिया में लगभग 3.5 बिलियन लोग चावल पर निर्भर हैं. नेशनल सैंपल सर्वे के मुताबिक, शहरों के तुलना देश के गांवों में चावल खाना लोग ज्यादा पसंद करते हैं। गांव में एक भारतीय हर महीने में 6 किलो चावल कंज्यूम करता है वहीं, शहरों में यह आंकड़ा लगभग 4.5 किलो है। सर्वे के मुताबिक, देश में दक्षिण, पूर्व और उत्तर-पूर्व के लोगों को चावल काफी पसंद है।

चावल ही नहीं, ये फूड्स भी कैंसर की वजह बन सकते हैं

प्रोसेस्ड मीट-प्रोसेस्ड मीट खाने से कैंसर होता है। मीट को ज्यादा दिन तक रखने के लिए जिस केमिकल का उपयोग होता है, उनमें सोडियम का इस्तेमाल होता है। सोडियम से सोडियम नाइट्रेट बनता है जो कार्सिनोजेनिक है।

प्रोसेस्ड मीट खाने वाले सावधान
प्रोसेस्ड मीट खाने वाले सावधान

आलू चिप्स- इसमें बहुत ज्यादा नमक और सैचुरेटेड वसा होती है जो सेहत के लिए खराब है। इसके अलावा चिप्स में एक्रीलेमाइड नामक तत्व होता है जो कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है।

फास्ट फूड है घातक
फास्ट फूड है घातक

सोडा- इस बारे में लंबे समय से कहा जा रहा है कि सोडा सेहत के लिए कितना खतरनाक है। चीनी, आर्टिफिशियल केमिकल और रंगों की वजह से ये कैंसर का खतरा दे सकता है।

डिब्बाबंद उत्पाद- डिब्बाबंद खाने में नमक या चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इन डिब्बों में खतरनाक केमिकल बीपीए होता है. ये एक तरह का पॉली कार्बोनेट है. इस केमिकल से हार्मोन बुरी तरह से प्रभावित होते हैं और यह कैंसर का कारक बनता है.

शराब और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स- अल्कोहल और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स दोनों में रिफाइंड चीनी और कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है। इससे आपका इम्यून सिस्टम डिस्टर्ब होता है, जो बीमारी की वजह बन सकता है।

नॉन ऑर्गेनिक फल: लंबे समय से कोल्ड स्टोरेज में रखे गए फल के ऊपर केमिकल की परत चढ़ी रहती है. इसकी वजह से कैंसर होता है।

माइक्रोवेव पॉपकॉर्न- माइक्रोवेव में बनाया गया पॉपकॉर्न कैंसर की वजह बनता है। क्योंकि माइक्रोवेव में पॉपकॉर्न डालने से परफ्यूरोक्टानोइक एसिड (perfluorooctanoic acid) बनता है. ये एक तरह का सिंथेटिक रसायन है जिससे पैंक्रियाज, किडनी, ब्लैडर, लिवर और टेस्टिकुलर कैंसर हो सकता है।

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