स्मार्ट पैरेंट बनें:अपने बच्चे को ऐसे बनाएं प्रकृति का बेस्ट फ्रेंड

7 दिन पहले
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बच्चों के दिमाग में कोई बात बैठ जाए, तो फिर उसे भूलना मुश्किल होता है। इसलिए बच्चों की परवरिश माता-पिता के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनके दिमाग में छुटपन से यह बात डालिए कि प्रकृति हमसे है और हम प्रकृति से। तभी बच्चे सामाजिक जिम्मेदारी समझ सकेंगे, ये कहना है फैमिली एक्सपर्ट और रिलेशनशिप काउंसलर शिवानी मिसरी साधू का

आपके बच्चे ज्यादा समय स्कूल, ट्यूशन और घर में बिताते हैं। यहां वो जो देखते हैं, उसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने लगते हैं। इसलिए माइक्रो लेवल पर ही सही, जरूरी है कि आप बच्चों को वो सिखाएं,जो उन्हें आगे जिंदगी भर अपनाना है। हर दिन के छोटे-छोटे बदलाव बच्चों को जिम्मेदार बनाएंगे। जैसे बच्चों को गुड टच - बैड टच के बारे में बताते हैं, वैसे ही उन्हें हर काम के साथ एक लाइन कहना शुरू करें, गुड फॉर एनवायरनमेंट और बैड फॉर एनवायरनमेंट। इसे लगातार सुनते-सुनते बच्चे इसकी अहमियत समझेंगे और अपनी जिंदगी में उतारने लगेंगे। आगे चलकर यही बच्चे अपने क्लासमेट्स और दोस्तों को पर्यावरण की जरूरत और उसकी रखवाली की बातें समझाते नजर आएंगे।

रियूज और रिसायकल की सीख

बड़े भाई के नए जूते छोटे हो गए। अभी उनकी कंडीशन अच्छी है, लेकिन हाइट बढ़ने की वजह से उसे आपने नए फुटवेयर दिलवाए हैं, तो अब आप उन जूतों का क्या करेंगी? अपने छोटे बेटे को समझाएं कि वो बड़े भाई के जूते इस्तेमाल करे। ऐसा ही पिछली क्लास की बुक्स, कलर्स और स्टेशनरी सामान को लेकर कहें। बड़े बच्चे को छोटे बच्चे के खिलौने शेयर करना और खेलना सिखाएं। किसी चीज का सही इस्तेमाल न होना भी प्रकृति पर बोझ बढ़ाता है, इसलिए बच्चों को सामान की बर्बादी से बचने के गुण सिखाएं।

एनर्जी बचाने की जरूरत

जब कुछ मुफ्त्त में मिलता है, तो उसकी कद्र नहीं की जाती। इलेक्ट्रिसिटी के साथ भी कुछ ऐसा ही था, तब तक जब तक ये बिना पैसे चुकाए मिलती थी। बदलते वक्त के साथ जब रोशनी में रहने के पैसे लगने लगे, तब लोगों को इसकी फिजूलखर्ची न करने का ख्याल आया। अपने बच्चे को ये सीख दें कि फालतू जलती लाइट्स और फैन न सिर्फ खर्च बढ़ाते हैं, बल्कि इलेक्ट्रिसिटी की गैरजरूरी खपत का नुकसान उन लोगों को होता है, जिन तक ठीक से बिजली नहीं पहुंच पाती।

वेस्टेज को कहें बाय-बाय

बर्बादी न फूड प्रोडक्ट्स की अच्छी होती है, न पानी और न किसी सामान की। बच्चों को ये बताएं कि अपनी प्लेट में उतना ही खाना लें जितने की उन्हें जरूरत है। अगर बच्चों में बचपन से ये हैबिट डेवेलप हो गई, तो वो दुनिया के किसी भी कोने में जाएं, खाने की बर्बादी नहीं करेंगे। ऐसा ही पानी के साथ है। उन्हें न सिर्फ वाटर वेस्टेज के नुकसान के बारे में बताएं, बल्कि वाटर प्रिजर्वेशन की जरूरत और उसके फायदे भी समझाएं। पेपर की बर्बादी बचाकर वो प्रकृति को किस तरह बिना कुछ किए सपोर्ट कर सकते हैं, इससे जुड़ी कहानियां और वीडियो दिखाएं। उन्हें बताएं कि अपने जन्मदिन पर पौधे लगाने के साथ ही यदि वो उन्हें सींचना और बड़ा करना सीख जाते हैं, तो प्रकृति के अच्छे दोस्त बन जाएंगे।

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