फिजूल बातों पर तलाक:जज साहब..मेरी बीवी काली-मोटी और झगड़ालू है, प्लीज मुझे डिवोर्स दिला दीजिए

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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जज साहब...मेरी बीवी काली है और मुझसे लड़ती है। जज साहब, मेरा पति मुझे नहीं, अपनी मां को ज्यादा तवज्जो देता है। प्लीज मुझे तलाक दिला दीजिए। फैमिली कोर्ट में इस तरह की वजह देकर तलाक लेने वालों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। क्या पति और पत्नी के तलाक लेने की वजहें एक जैसी होती हैं? ​महिलाएं किन हालातों में पहुंचती हैं अदालत? भास्कर वुमन ने इसकी पड़ताल की।

महानगरों की चकाचौंध भरी जिंदगी में लोग मोटी सैलरी, बड़ी कार और बंगला..जैसी मटिरीअलिस्टिक चीजों में तरक्की कर रहे हैं, लेकिन रिश्ता पीछे टूट रहा है। प्यार का बंधन कमजोर पड़ रहा है। ​रफ्तार भरती गाड़ी के दो पहिये माने जाने वाले पति-पत्नी कोर्ट में एक-दूसरे पर जमकर कीचड़ उछालते हैं। यह कहना है एक फैमिली कोर्ट की ​प्रिंसपल काउंसलर का।

कोर्ट में कपल इन वजहों पर मांगते हैं तलाक

1. मैडम, पत्नी रोज नहाती नहीं है.. मुझे तलाक चाहिए
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तलाक लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी। काउंसलिंग के दौरान पत्नी से तलाक मांगने की वजह पूछी गई तो उसने काउंसलर को जवाब दिया, 'मैडम मेरी पत्नी नहाती नहीं है। उसके शरीर से बदबू आती है और मैं उसके साथ नहीं रह सकता। प्लीज मुझे तलाक दिला दीजिए।'

2. ....पति अपनी मां की सुनता है, मेरी नहीं
देश की राजधानी दिल्ली के लक्ष्मी नगर के शख्स ने तलाक के लिए आवेदन किया। काउंसलर बताती हैं कि दोनों की लव मैरिज हुई थी। तलाक की वजह पूछी गई तो पत्नी ने जवाब दिया कि मेरा पति अपनी मां की सुनता है, मेरी नहीं। हालांकि, काउंसलिंग के बाद दोनों में सुलह हो गई। इस कपल का अब एक प्यारा सा बेटा भी है।

काउंसलिंग के बाद करीब आधे मामलों में हो जाती है सुलह। प्रतीकात्मक तस्वीर
काउंसलिंग के बाद करीब आधे मामलों में हो जाती है सुलह। प्रतीकात्मक तस्वीर

3. तू-तू मैं-मैं की जिंदगी अब और नहीं...फिर खुद कर ली सुलह
एक ​फैमिली कोर्ट की सीनियर काउंसलर ने बताया कि दिल्ली के नांगलोई के एक 70 साल के बुजुर्ग ने तलाक का केस फाइल किया। उनकी शादी को 45 साल हो चुके थे। दोनों के 5 बच्चे थे, जोकि अब अपनी-अपनी फैमिली के साथ सैटल हैं। नाती-पोते हैं। पति ने कहा कि तू-तू मैं-मैं, की जिंदगी अब और नहीं जी सकता। महिला ने कहा कि वह भी सिर्फ मुआवजा चाहती है, पति नहीं। काउंसलिंग चल ही रही थी, तभी एक घटना हुई, जिसके बाद दोनों की खुद ही सुलह हो गई।

दरअसल, पत्नी छोटे बेटे-बहू के पास रहती थी और पति बड़े बेटे-बहू के पास रहता था। पति को करीब 45 हजार रुपये पेंशन के मिलते थे। पति-पत्नी अलग-अलग बच्चों के साथ रहते थे। एक दिन उनकी बहू ने अपनी सास के साथ मारपीट की। ससुर ने पहुंचकर बहू को डांटा। उस उस एक घटना ने दोनों के प्यार पर जमीं धूल झाड़ दी। उसके बाद दोनों जब काउंसलिंग के लिए आए तो बोले- मैडम, हमारा केस बंद करवा दीजिए। हम दोनों साथ ही रहेंगे। हम साथ में ही ठीक हैं।

छोटी-छोटी बात पर कोर्ट पहुंच जाते हैं दंपती। प्रतीकात्मक तस्वीर
छोटी-छोटी बात पर कोर्ट पहुंच जाते हैं दंपती। प्रतीकात्मक तस्वीर

रंग, कद और साइज बन रहा तलाक की वजह
एक फैमिली कोर्ट की प्रिंसपल काउंसलर का कहना है कि पहले तलाक के ज्यादातर मामलों की वजह घरेलू हिंसा या फिर एक्सट्रामैरिटल अफेयर होता था, लेकिन अब रंग और कदकांठी रिश्ते टूटने की वजह बन रही है। ज्यादातर पुरुष पत्नी मोटी है, काली है, नाटी है, सुंदर नहीं दिखती, दिखने में उम्र ज्यादा दिखती है, झगड़ती है, खाना नहीं देती है, सब्जी में नमक ज्यादा डालती है, मेरे घर वालों का ख्याल नहीं रखती है..जैसी वजह बताकर केस फाइल करते हैं। वहीं महिलाएं पति मेरी नहीं, अपनी मां की सुनता है, मुझे समझता नहीं, मारपीट करता है, शॉपिंग नहीं कराता, मुझे निजी खर्च के लिए पैसे नहीं देता।

प्रिंसपल काउंसलर के मुताबिक, इस तरह के मामलों में काउंसलिंग के बाद सुलह हो जाती है, लेकिन जहां पति-पत्नी एक-दूसरे के करेक्टर का 'पोस्टमार्टम' करने लगते हैं। एक-दूसरे के परिवार पर कीचड़ उछालने लगते हैं, उन मामलों में सुलह की गुंजाइश नहीं बचती।

तलाक के 95% केस पुरुष करते हैं फाइल
कड़कड़डूमा कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष भदौरिया के मुताबिक, तलाक के कुल मामलों में से 95% मामले पुरुष फाइल करते हैं। सिर्फ 5% मामले महिलाएं फाइल करती हैं। किसी एक के परिवार का ज्यादा इंटरफेयर होना। एक्सट्रामैरिटल होना। एक-दूसरे को टाइम नहीं देना, केयर नहीं करना। वाइफ वर्किंग नहीं है तो खर्च नहीं देने जैसी वजहों पर तलाक फाइल होता है। कई बार ऐसा भी होता है कि पति-पत्नी तलाक लेना नहीं चाहते, लेकिन परिवार वाले पूरी कोशिश करते हैं कि तलाक हो जाए।

सीनियर एडवोकेट मनीष ने ऐसा ही एक मामला बताया, जिसमें वह लड़की का केस लड़ रहे थे। उन्होंने बताया, 'लड़की जब भी कोर्ट आती हमेशा उसकी मां साथ रहती। लड़के में क्या कमियां हैं, ये मां गिनाती और लड़की शां​त रहती। मैं लड़की से अकेले में बात करना चाहता था, लेकिन परिवार वाले मौका ही नहीं देते। कोर्ट जाते वक्त मुझे लड़की से बात करने के लिए 1 मिनट का वक्त मिला। पूछने पर लड़की ने बताया कि मैं साथ रहना चाहती हूं, लेकिन मेरे घर वाले मेरे पति को पसंद नहीं करते हैं। उसके बाद दोनों की सुलह कराई और लड़की को उसके पति के साथ भेज दिया। एडवोकेट मनीष बताते हैं कि फैमिली कोर्ट में काउंसलिंग के बाद करीब आधे मामलों में सुलह हो जाती है।

ऐसे बचाएं अपना रिश्ता

  • ससुराल की रिपोर्टिंग मायके में ना करें।
  • दोनों एक-दूसरे को वक्त दें।
  • एक-दूसरे को छोटी-छोटी बात पर न दें ताना।
  • गलतफहमी को बात कर दूर कर लें।
  • झगड़े को लंबा ना खींचे।