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बच्चे को समय दें, सामान नहीं:एक्सपर्ट बता रही हैं वो 5 जरूरी बातें जो बच्चों को महंगे गिफ्ट की लत से दूर रखती हैं

10 महीने पहले
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माता-पिता बच्चों में अपना भविष्य देखते हैं और चाहते हैं कि उनके बच्चों को वो सारी चीजें मिलें जो उन्हें नहीं मिल पाई। बच्चों को अच्छी लाइफस्टाइल देने के लिए माता-पिता दिनरात मेहनत करते हैं, जिसके चलते कई वर्किंग पेरेंट्स बच्चों के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाते। कई पेरेंट्स ऐसे भी हैं जो बच्चों को समय न दे पाने की भरपाई उनके लिए महंगे गिफ्ट खरीदकर करते हैं और यहीं वे गलती कर जाते हैं। वॉकहार्ट हॉस्पिटल, मुंबई की साइकोथेरेपिस्ट डॉ. सोनल आनंद बता रही हैं वो 5 बातें जो बच्चों को गिफ्ट की लत से दूर रखती हैं।

बच्चे की जिद की वजह समझें

जब बच्चे छोटे होते हैं और अपने माता-पिता के साथ समय बिताना चाहते हैं और वर्किंग पेरेंट्स चाहकर भी अपने बच्चों को समय नहीं दे पाते, तो अपना गिल्ट दूर करने के लिए वे उन्हें खिलौने लाकर देते हैं और कहते हैं कि हम तुमसे बहुत प्यार करते हैं। ऐसे में बच्चे सोचते हैं कि उन्होंने तो माता-पिता का समय मांगा था, लेकिन उन्हें बदले में खिलौने मिले हैं, इसका मतलब है कि खिलौने ही पेरेंट्स का प्यार है। फिर जब भी बच्चों को पेरेंट्स का प्यार और समय चाहिए होता है, वो उनसे खिलौने मांगने लगते हैं और पेरेंट्स को लगता है कि बच्चे जिद्दी होते जा रहे हैं। छोटे बच्चों को खिलौनों से कोई लेना-देना नहीं होता, एक-दो घंटे में वो उनसे बोर हो जाते हैं और कई बार खिलौने तोड़ भी देते हैं, लेकिन बच्चों को महंगे गिफ्ट आदत लगाकर पेरेंट्स की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। जबकि सच्चाई ये है कि छोटे बच्चों के लिए उनके सबसे फेवरेट खिलौने उनके माता-पिता होते हैं, उन्हें खिलौनों की नहीं पेरेंट्स के समय और अटेंशन की जरूरत होती है।

गिफ्ट की अहमियत सिखाएं

बच्चों के मांगते ही यदि आप उन्हें हर चीज तुरंत लाकर दे देते हैं, तो उन्हें इनकी अहमियत पता नहीं चलती। इसके लिए अपने बच्चों को उन बच्चों के बारे में बताएं, जिन्हें खिलौने तो दूर, दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता। हो सके तो बच्चे के जन्मदिन के अवसर पर या किसी त्योहार के समय उसे ऐसे बच्चों को गिफ्ट देने के लिए कहें, जिनके माता-पिता नहीं हैं। ऐसा करके आप अपने बच्चे को समझा सकेंगे कि दुनिया में हर किसी को हर चीज आसानी से नहीं मिलती, उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

क्वालिटी टाइम से बढ़ाएं बॉन्डिंग

आपके पास समय की भले ही कमी हो, लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें आप बच्चे के साथ जितना भी समय बिताएं वो क्वालिटी टाइम हो। उस समय कोई और काम न करें। इस समय बच्चे की हर बात ध्यान से सुनें। यदि बच्चे ने दिनभर में कोई अच्छा काम किया है तो इसके लिए उसकी तारीफ करें। इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा, वो आपके साथ कनेक्टेड महसूस करेगा और आगे भी अच्छा काम करके आपकी तारीफ पाने की कोशिश करेगा।

फैमिली टाइम बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाता है
फैमिली टाइम बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाता है

आंख मिलाकर बात करें

कई पेरेंट्स मोबाइल स्क्रोल करते हुए या कंप्यूटर पर काम करते हुए बच्चे से बातें करते रहते हैं और उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी ड्यूटी पूरी कर ली है, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। जब आप बच्चे के साथ हों तो उस समय कोई और काम न करें। बच्चे से आंखें मिलाकर बात करें, ताकि बच्चा ये महसूस कर सके कि वो पूरी तरह से आपके साथ है। आपका पूरा अटेंशन मिलने पर उसे खुशी महसूस होगी और वह आपसे अपने मन की हर बात शेयर कर सकेगा।

कहानी सुनाकर सिखाएं संस्कार

बच्चों को कहानी के माध्यम से जब कोई बात समझाई जाती है, तो वह उन्हें जल्दी समझ में आती है और लंबे समय तक याद रहती है। यदि आप वर्किंग पेरेंट्स हैं, तो शाम को घर लौटते समय अपने मन में एक ऐसी कहानी बुनें, जिससे आप बच्चे को कोई ऐसी बात सिखा सकें, जो उसके काम आए और उसे अच्छा इंसान बनाए। बड़े होने के बाद भी बच्चों को दादा-दादी, नाना-नानी की सुनाई कहानियां इसलिए याद रह जाती हैं, क्योंकि इनसे उनकी बहुत प्यारी यादें जुड़ी होती हैं और इन कहानियों से मिली सीख को बच्चे अपने जीवन में उतार लेते हैं। यदि आपके बच्चे दादी-दादी, नाना-नानी के पास नहीं रहते, तो उनकी जगह आप कहानियों के माध्यम से उन्हें अच्छी बातें सिखाएं। इससे बच्चों के साथ आपकी बॉन्डिंग बढ़ेगी और आप उन्हें अच्छे संस्कार सिखा सकेंगे।

बच्चों के लिए आपके समय से ज्यादा कीमती कुछ भी नहीं है इसलिए सामान देकर उनकी आदत न बिगाड़ें। इस तरह बच्चों को भी पेरेंट्स से मिलने वाले की वक्त अहमियत पता चलेगी। जो पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, उनके बच्चे जिद कम करते हैं और रिश्तों को ज्यादा महत्व देते हैं।