सुई से नहीं डरेगा बच्चा:ये ट्रिक अपनाएंगे तो छूमंतर होगा इंजेक्शन का डर

16 दिन पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
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ओमिक्रॉन के आने के बाद देश में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। 15 से 18 साल तक के किशोरों को वैक्सीन लगाने की इजाजत मिलने के बाद पेरेंट्स का सवाल है कि क्या 15 साल से कम उम्र के बच्चों को भी वैक्सीन लगेगी? इन बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हो, उसके पहले हर घर में यह बड़ा सवाल है कि बच्चे को वैक्सीन की डोज के लिए तैयार कैसे करें? सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. अवनि तिवारी बता रही हैं बच्चों को कैसे इंजेक्शन लगवाने के लिए मानसिक तौर पर तैयार किया जाए।

बच्चों के सामने इस बात का जिक्र करना कि तुम्हें आज इंजेक्शन लगना है, उनके अंदर डर भर देता है। पेरेंट्स जब भी बच्चों को किसी बात के लिए कंट्रोल करना चाहते हैं, उन्हें कह देते हैं कि अगर तुमने शरारत की, तो डॉक्टर के पास ले जाकर तुम्हें सूई लगवा देंगे। इस बात से बच्चे उस वक्त तो बदमाशी कम कर देते हैं, लेकिन जब आगे कभी उन्हें इंजेक्शन लगवाना होता है, तब वे हैरान और परेशान रहते हैं। यह न केवल बच्चे, बल्कि डॉक्टर्स और पेरेंट्स के लिए भी टेंशन देने वाली बात होती है।

पेरेंट्स बनते हैं बच्चों के डर का कारण

डॉ. तिवारी कहती हैं बच्चों में इंजेक्शन का डर भरने वाले पेरेंट्स को समझना चाहिए कि उनकी छोटी सी गलती बच्चों के लिए बड़े होने तक डर की वजह बन सकता है। हमारे समाज में कई बार पेरेंट्स ये कहते नजर आते हैं कि ‘शैतानी करने वाले बच्चों के पास बूढ़े बाबा आते हैं और रात के समय इंजेक्शन लगा देते हैं’। यह माता-पिता की बड़ी कमी है। बच्चे को किसी भी बात के लिए लिए प्यार से समझाना चाहिए, जिससे वो बात समझें और किसी तरह का वहम अपने मन में न पालें।

क्या करें, ताकि सूई से न डरें बच्चे

इंजेक्शन लगने वाले दिन ही उन्हें ये बताएं - कई मामलों में बच्चों के लिए उम्र के हिसाब से तय रहता है कि उन्हें कब इंजेक्शन लगना है। इसलिए उन्हें डॉक्टर के पास जाने वाले दिन ही बताएं कि आज उन्हें सूई लगने वाली है। अगर बच्चे को दो-चार दिन पहले ही इस बारे में बता दिया जाएगा, तो हो सकता है टेंशन की वजह से उनका खाना-पीना प्रभावित हो। उन्हें इंजेक्शन के बारे में ज्यादा सोचने का मौका मत दीजिए।

उनके सामने इमोशनल होने से बचें - जब बच्चे को इंजेक्शन लगने की बात आती है, तो कई बार पेरेंट्स, खास तौर पर मां इस बात से परेशान हो जाती है कि बच्चे को दर्द होगा। इसकी वजह से से वो रो भी पड़ती है। बच्चा जब मां को ऐसा करते देखता है, तो समझता है कि कोई ऐसी बात है, जो उसे परेशान कर सकती है। इसलिए पेरेंट्स परेशान हो रहे हैं। यह बात बच्चे को और भी डरा देती है कि उससे मजबूत उसके पेरेंट्स भी सूई लगने को लेकर विचलित हो रहे हैं। इस कारण से बच्चे कई बार सुई देखते ही बदहवास होकर रोने लगते हैं।

बच्चों के लिए ये ट्रिक काम आएगी।
बच्चों के लिए ये ट्रिक काम आएगी।

बच्चे का ध्यान भटकाएं - जब भी बच्चे को इंजेक्शन दिलवाने ले जाएं, उसका ध्यान इधर-उधर भटकाने की कोशिश करें। जब तक डॉक्टर इंजेक्शन तैयार करे, बच्चे को बातों में उलझा कर रखें। जब सूई लगने की बारी आए, तब बच्चे को कुछ ऐसा याद दिलाने की कोशिश करें, जिसे याद करते हुए बच्चा खुश होकर खिलखिला उठे। ऐसा होते हुए अगर बच्चे को इंजेक्शन लग जाए, तो दर्द से उसका ध्यान भटकाना आसान हो जाएगा। सुई लगने के बाद भी बच्चे को समझाएं कि देखो, जितना तुम डर रहे थे, इतना दर्द नहीं होता है।

किसी तरह का वादा न करें - डॉ. अवनि के मुताबिक पेरेंट्स की एक कमी यह भी होती है कि वो बच्चों से झूठे वादे कर देते हैं। जिनमें डॉक्टर के पास जाने पर इंजेक्शन न लगवाने जैसे वादे भी शामिल हैं। जब बच्चे को पता चलता है कि उसे झूठ बोला गया है, तब उसके दिल और दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

बच्चों को बात-बात पर न धमकाएं - ऊपर बताएं तमाम बातों पर ध्यान देने की जरूरत बेहद कम हो जाएगी, अगर आप इस बात पर अपनी नजर रखते हैं। बच्चों को अपनी बात मनवाने के लिए कुछ भी कहकर डराने से बचें। हो सके, तो उन्हें बहादुर बनने के लिए प्रोत्साहित कीजिए और शाबाशी देने से मत चूकिए।