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ढोंगी बाबाओं का महिला 'प्रेम':आसाराम, राम-रहीम हाइपर सेक्शुअलिटी से ग्रस्त, शिष्याओं को बनाया था शिकार

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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आसाराम, राम-रहीम जैसे ढोंगी बाबा महिलाओं को अपना शिकार बनाते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन ढोंगियों को सेक्स एडीक्शन की प्रॉब्लम रही है। साइकोलॉजिस्ट मानते हैं कि हाइपर सेक्सुअलिटी या सेक्स एडीक्शन समस्या के शिकार व्यक्ति का सेक्सुअल बिहेवियर काबू के बाहर हो जाता है। उन्हें मल्टीपल पार्टनर्स की जरूरत होती है।

इस बीमारी को समझने के बाद काउंसलिंग करना जरूरी है।
इस बीमारी को समझने के बाद काउंसलिंग करना जरूरी है।

क्या है हाइपर सेक्सुअलिटी डिसॉर्डर
इस बीमारी के शिकार लोगों को सेक्सुअली स्ट्यूमूलेटिंग सिचुएशन में रहने की आदत होती है। इस आदत की वजह से शादीशुदा लोगों के रिलेशनशिप पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे व्यक्ति के काम करने की शक्ति भी प्रभावित होती है। एम्ब्रेस इम्परफेक्शन की फाउंडर और मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट दिव्या महेंद्रू के अनुसार, सेक्स के लती लोगों में आब्सेसिव सेक्सुअल ‘थॉट्स’ और ‘फैंटसी’ होती है।

अपनी हरकतों पर अपराधबोध और पछतावा भी होता है।
अपनी हरकतों पर अपराधबोध और पछतावा भी होता है।

इसके अनुसार ऐसा व्यक्ति चौबीस घंटे सेक्स के बारे में सोचता और उसकी कल्पनाओं में डूबा रहता है। ऐसे व्यक्ति का अपने पार्टनर के साथ सेक्सुअल संबंधों को लेकर व्यवहार भी असामान्य होता है।सबसे बड़ी बात यह है कि बहुत सारे लोगों के साथ संबंध होने के कारण इनको अपनी हरकतों पर अपराधबोध और पछतावा भी होता है। इन लोगों में तनाव और डिप्रेशन भी देखा गया है। इस तरह के लोग अनजान लोगों के साथ संबंध बनाने में रुचि लेते हैं।

इस डिसॉर्डर मल्टीपार्टनर की आशंका होती है।
इस डिसॉर्डर मल्टीपार्टनर की आशंका होती है।

एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी हो सकता है ट्रांसफर
इस रोग के होने की वजहों में बायोलॉजिकल कारण भी शामिल है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी जा सकता है। बचपन से ही भावनात्मक रूप से कमजोर होने और बिना सोचे-समझे काम करने के कारण आगे चलकर अलग-अलग पार्टनर की तरफ आकर्षण होता है। इस शरीर में अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरॉन और एस्ट्रोजन बनने के कारण भी इस डिसॉर्डर के होने की आशंका होती है।

सेक्सुअल अब्यूज से गुजरे लोग भी इसका शिकार
बचपन में यौन दुर्व्यवहार होने की वजह से बड़े होने पर व्यक्ति इस रोग का शिकार हो जाता है। इसके अलावा सेक्स संबंधी विषयों को जरूरत से ज्यादा पढ़ने, जानने और समझने की वजह से भी यह समस्या होती है। जिन लोगों के शादीशुदा जीवन में सेक्स को लेकर दिक्कतें आ रही हो, वे ही इस समस्या से जूझते हैं। इस पर्सनेलिटी डिसॉर्डर की वजह से भी हाइपर सेक्सुअलटी विकसित हो जाती है।

एंग्जाइटी और तनाव की समस्या भी घेर लेती है।
एंग्जाइटी और तनाव की समस्या भी घेर लेती है।

किताब से हुआ आसाराम के सेक्स की लत का खुलासा
नाबालिग से रेप के मामले में आसाराम को जब गिरफ्तार किया गया, तो अजय पाल लांबा जोधपुर में एसपी के पद पर तैनात थे। आसाराम को जेल पहुंचाने के लिए उन्होंने विशेष टीम बनाई। इस पूरे प्रकरण के दौरान उनको और उनकी टीम को धमकियां दी गई। इन सबको उन्होंने अपनी पुस्तक ‘गनिंग फॉर द गॉड मैन’ में लिखा है। इसमें लिखे अनुसार, पुलिस ने भी अपनी जांच में पाया कि आसाराम को एक तरह का सेक्स एडीक्शन था। अपनी इस लत की वजह से वह हर रात एक नई आकर्षक लड़की की मांग करता था।

सेक्स टॉनिक लेते थे राम रहीम
डेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरमीत राम रहीम जेल में रेस्टलेसनेस की शिकायत की। तब उनका मेडिकल चेकअप करने वाली टीम में शामिल डॉक्टर ने बताया कि वे सेक्स एडीक्ट हैं। उस समय पूर्व डेरा सच्चा सौदा के सदस्य गुरदास सिंह तूर ने यह खुलासा किया था कि बाबा सेक्स टॉनिक और एनर्जी ड्रिंक लेते हैं, जो आस्ट्रेलिया और दूसरे देशों से मंगाई जाती है।

सेक्सुअल फैंटसी पर काबू करना आसान नहीं
जर्नल ऑफ बिहेवियरल एडीक्शन में कंपल्सिव सेक्सुअल बिहेवियर पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार 100 में 42 लोग चाहकर भी अपनी सेक्सुअल फैंटसी को कंट्रोल नहीं कर पाते। वहीं 100 में 67 लोग अपनी सेक्सुअल जरूरतों को काबू करने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसी रिपोर्ट के मुताबिक 70% ने माना कि सेक्सुअल बिहेवियर उनको संतुष्टि देता है जबकि 83% के लिए यह तनाव मुक्त करने का साधन है।

पति-पत्नी एकदूजे का साथ देकर इस प्रॉब्लम का समाना करे।
पति-पत्नी एकदूजे का साथ देकर इस प्रॉब्लम का समाना करे।

थेरेपी देकर ठीक किया सकता है
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट दिव्या महेंद्रू के अनुसार, इस मामले में थेरेपिस्ट आधा घंटा से लेकर एक घंटा तक का सेशन लेते हैं। इसमें कंप्लसिव बिहेवियर को धीरे-धीरे ठीक किया जाता है। इसके साथ ही कॉग्नेटिव बिहेवियर थेरेपी दी जाती है। इस इलाज में रोगी के स्वभाव, उसके सोचने का ढंग और उसकी भावनाओं को फोकस किया जाता है।

यह देखा जाता है कि किन नेगेटिव विचारों की वजह से ऐसा होता है। इसके बाद साइकोडायनेमिक थेरेपी दी जाती है। इसमें बचपन से अवचेतन में कैद उन यादों को निकालने की कोशिश की जाती है, जिसकी वजह से यह डिसॉर्डर पनपा। अगर पार्टनर में से कोई एक इसका शिकार है, तो कपल काउंसलिंग भी की जाती है।

इसके अलावा दवाएं दी जाती है जिससे सेक्स के प्रति रूझान को कम किया जा सके। धीरे-धीरे आदतों पर लगाम लगने लगती है।