'तुम तो मजाक का बुरा मान जाती हो':कितना जंक फूड खाती हो, फिगर बिगड़ रहा है, यह है पार्टनर के कंट्रोलिंग बिहेवियर की निशानी

3 दिन पहलेलेखक: भाग्य श्री सिंह
  • कॉपी लिंक

'इमोशनल एब्यूज इन इंटिमेट रिलेशनशिप: द रोल ऑफ जेंडर एंड एज' के मुताबिक, घरेलू हिंसा में शारीरिक मारपीट के बराबर ही भावनात्मक उत्पीड़न का असर पड़ता है'। हालांकि कानून केवल घरेलू हिंसा को ही अपराध करार देता है, इमोशनल एब्यूज को नहीं। साइकोलॉजिस्ट डॉ रचना सिंह से जानें रिश्ते में भावनात्मक शोषण के लक्षण।

खतरनाक है मानसिक उत्पीड़न
2020 की रिसर्च 'इमोशनल एब्यूज इन इंटिमेट रिलेशनशिप: द रोल ऑफ जेंडर एंड एज' के अनुसार, जिन लोगों के साथ शारीरिक या यौन हिंसा हुई थी उनके मुकाबले जिनका भावनात्मक शोषण हो रहा था, उनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी, स्ट्रेस और विकृत व्यक्तित्व ज्यादा था।

स्टडी में यह बात भी सामने आई कि जो लोग बचपन में भावनात्मक रूप से पीड़ित रहे हों उनमें लंबे समय तक यह लक्षण रहे। युवावस्था में भी कई लोगों के व्यवहार पर बचपन की छाप बनी रही। भावनात्मक शोषण भी यौन और शारीरिक शोषण की तरह नुकसान पहुंचाने वाला है।

अपमान करना
छोटी-छोटी बातों पर पार्टनर को नीचा दिखाना, बहुत प्यार से लेकिन उसके आत्मसम्मान को नीचा दिखाने वाली बातें कहना, ऐसा करने से साथी खुद को छोटा महसूस करने लगता है और उसका आत्मविश्वास टूट जाता है। पार्टनर नीचा दिखाने के लिए आपकी भावनाओं पर चोट करता है।

'यार तुम एकदम बुद्धू हो'
दुनिया के सामने खुद को अच्छा दिखाने और पार्टनर को इमोशनली कंट्रोल करने की कोशिश में कई लोग पार्टनर को इस तरह के अपमानजनक पेट नेम्स से बुलाते हैं- 'अरे मेरी मोटी', 'यार तुम तो एकदम बुद्धू हो', 'तुम्हें चीजों की समझ नहीं है, 'इसकी बातें और गधे की लातें बराबर हैं।'

गलत पार्टनर के साथ रहना किसी कैद से कम नहीं है।
गलत पार्टनर के साथ रहना किसी कैद से कम नहीं है।

काम को लेकर नीचा दिखाना
कंट्रोलिंग पार्टनर साथी को नीचा दिखाने के लिए छोटी छोटी चीजों या काम को टार्गेट करता है। जैसे- कोई तो काम सही से किया करो, तुम हमेशा देर करती हो, तुम सारी चीजें खराब करते हो या तुम्हारे साथ रहने पर ही बुरी चीजें होती हैं। कुल मिलाकर ऐसे लोग साथी को यह जताना चाहते हैं कि वो अच्छा इंसान नहीं है।

साथी पर चीखना-चिल्लाना
छोटी-छोटी बातों पर साथी पर चीखना चिल्लाना, दांत पीसना, झूठी कसमें खाना, चीजें तोड़ना-फोड़ना जैसी चीजें टॉक्सिक रिलेशनशिप की निशानी है।

खुद को महान दिखाते हुए एहसान जताना
पार्टनर अगर आपकी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर भी एहसान जताता है, जैसे- 'मैं तुम्हें नौकरी करने दे रहा हूं', 'मेरी वजह से तुम्हें नौकरी मिली है', 'यह तुम्हारे बस की बात नहीं है।' ऐसी चीजों और लोगों को समझ पाना सचमुच आसान नहीं होता।

सबके सामने शर्मिंदा करना
कई लोग सबके सामने पार्टनर की बेइज्जती करते हैं। इसके लिए वो आपके सीक्रेट्स सबसे शेयर करेंगे, खामियों को उजागर करेंगे या सबके सामने आप पर चिल्लाएंगे या झगड़ा करेंगे।

बॉडी लैंग्वेज से नीचा दिखाना
आपके जीवन, आपके सपने उनके लिए कोई मायने नहीं रखते, ऐसा दिखाने की कोशिश करना। या फिर आपकी छोटी-छोटी खुशियों को लेकर आप पर तंज कसना या कई बार अपनी बॉडी लैंग्वेज से ऐसे जाहिर करना जैसे वह रिश्ते में पार्टनर को नहीं किसी और को तवज्जो दे रहे हैं।

सरकास्टिक जोक्स क्रैक करना
जब आप पार्टनर के कमेंट पर रिएक्शन दें, तब उनका यह कहना, 'अरे मैं तो मजाक कर रहा था, 'तुम तो मजाक भी नहीं समझ पाती' या 'तुम तो हर बात पर ऐसे ही रिएक्ट करती हो'। ऐसे लोग स्मार्टली खुद को बचाते हुए पार्टनर को हर्ट करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

गलत रिलेशन से खुद को आजाद करना ही सही है।
गलत रिलेशन से खुद को आजाद करना ही सही है।

रिश्ता तोड़ने की धमकी देना
पार्टनर आपको कंट्रोल करने के लिए तलाक या रिश्ता तोड़ने की धमकी देता है? ऐसे धमकाता देता है- 'मैं किस हद तक जा सकता हूं यह तो तुम जानती ही हो' या फिर परिवार को आपके बारे में भड़काता है, बच्चों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है या उन्हें लेकर दूर चले जाने की धमकी देता है, ये सभी चीजें मानसिक शोषण की श्रेणी में आती हैं।

एकतरफा फैसले लेना
आपकी जॉब को नुकसान पहुंचाने के लिए आपके बॉस को फोन करके आपकी चुगली करना, एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड जैसी चीजें हथिया लेना या जॉइंट बैंक अकाउंट है तो सारे पैसा निकाल लेना या बिना वजह अकाउंट बंद कर देना।

कंट्रोल करने की कोशिश
साथी आप पर जॉब छोड़ने के लिए प्रेशर बनाता है। जब आप ऐसा करती हैं तो घर के छोटे-छोटे खर्चों के लिए आपको पैसा नहीं देता। खर्च किए गए एक-एक रुपये का हिसाब लेना। वो कोशिश करते हैं कि आप अपनी जरूरतों के लिए उनके सामने हाथ फैलाएं और वो एहसान की तरह आपकी जरूरत पूरी कर अपना ईगो संतुष्ट करें।

खाना ठंडा कैसे हो गया
'मुझे गरम खाना ही खाना है, ठंडा नहीं होना चाहिए', 'खाने में नमक और मसाले एकदम बैलेंस होने चाहिए', 'खाने के साथ पानी जरूर रखा करो', पार्टनर की ऐसी बातें यही दर्शाती हैं कि आप भले ही बिजी हों, लेकिन उनके मन की चीजें हर हाल में पूरी होनी चाहिए।

घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला कहां करें शिकायत:

  • घरेलू हिंसा कानून के दायरे में महिलाओं के खिलाफ हर तरह की हिंसा आती है। इसके तहत महिलाएं हर जिले में तैनात सुरक्षा अधिकारी के पास सीधे शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
  • महिलाएं आईपीसी 498(ए) यानी महिला उत्पीड़न कानून के तहत सीधे थाने में भी एफआईआर दर्ज करा सकती हैं।
  • घरेलू हिंसा से जुड़ी शुरुआती जानकारी डीआईआर (डोमेस्टिक इंसीडेंट रिपोर्ट) में दर्ज होती है, जिसे घरेलू घटना रिपोर्ट भी कहते हैं।
  • महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक और बाल विकास अधिकारी से भी ऐसे मामलों की शिकायत की जा सकती है।
  • कई सरकारी और गैर सरकारी संगठन भी महिलाओं के लिए काम करते हैं, ऐसे संगठनों से घरेलू हिंसा या उत्पीड़न से जुड़े मामलों में मदद ली जा सकती है।