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दादी-नानी का फॉर्मूला बेस्ट:बच्चों को स्मार्ट बनाने को सुनाएं कहानियां, मुश्किल चीजें सीखने और याद रखने के साथ होंगे 6 फायदे

एक महीने पहले
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देश हो या विदेश बच्चों को कहानी सुनाने का चलन हर जगह है। बढ़ते गैजेट चलन के साथ स्टोरी टेलिंग का ग्राफ नीचे तो आया है, लेकिन बच्चों के शुरूआती जीवन में इसका महत्व आज भी अहम है। इससे न सिर्फ बच्चों की याददाश्त में बढ़ोतरी होती है, बल्कि वे संस्कृति से भी जुड़ते हैं। यानी दादी-नानी जिस तरह से कहानियां सुनाया करती थीं, वह तरीका बच्चों को सिखाने के लिए आज भी बेस्ट है।

बच्चों को किस्से कहानियां सुनाने की जरूरत आज भी उतनी ही है, जितनी कि बीते समय में हुआ करती थी, क्योंकि समय बदलता है, लेकिन बच्चों के विकास का क्रम वैसा ही है। साइकोलॉजिस्ट डॉ. बिंदा सिंह कहती हैं कि बच्चे रिश्ते, संस्कृति और दोस्तों का मतलब तब तक नहीं समझ पाते हैं, जब तक उन्हें उदहारण देकर समझाया न जाए और उन्हें उदाहरण देने का सबसे बेहतर तरीका है बच्चों को किस्से-कहानियों से जोड़ना।

क्या है कहानियों का बचपन से कनेक्शन?

हम बड़े होकर बेहतर इंसान बन पाएं, इसलिए बचपन में हमें नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाता था। पांचवीं-छठी क्लास तक ये सब्जेक्ट हमारे कोर्स में शामिल रहता था। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे किसी भी बात को जल्दी पकड़ते हैं और लंबे समय तक याद रखते हैं। डॉ. सिंह कहती हैं कि हर जानकारी इंटरनेट पर मौजूद होने और ऑनलाइन क्लासेस ने न सिर्फ बच्चों को गैजेट फ्रेंडली बनाया है, बल्कि किताबों और कहानियों से भी दूर किया है। इसका असर बच्चों की आंखों पर तो पड़ ही रहा है, साथ ही उनका झुकाव हल्के- गुदगुदाहट भरे विडियो की ओर बढ़ रहा है, जिससे न तो उन्हें कोई नई जानकारी मिलती है, न ही वे नैतिक शिक्षा को अपने जीवन में उतार पाते हैं।

स्टोरी टेलिंग धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही है। एक्सपर्ट एडवाइस देते हैं कि बच्चों को सिखाने के लिए यह सबसे आसान तरीका है।
स्टोरी टेलिंग धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही है। एक्सपर्ट एडवाइस देते हैं कि बच्चों को सिखाने के लिए यह सबसे आसान तरीका है।

क्यों बच्चों के विकास के लिए जरूरी है कहानियां?

  • अपनी बात रख पाते हैं - जो बच्चे कहानियां सुनते हैं, उनकी कल्पनाएं मजबूत होती हैं। साथ ही ऐसे बच्चे आगे चलकर अपनी बात रखने और तर्क सहित अपनी बातें समझा पाने में सक्षम होते हैं।
  • नए शब्दों से होते हैं रूबरू - बच्चे जब कहानियां सुनते हैं, तो उनकी शब्दावलियों में नए शब्द जुड़ते चले जाते हैं, जिससे उनकी जानकारी बढ़ती है और बोलने का तरीका भी ध्यान खींचता है।
  • संस्कृति से जुड़ते हैं बच्चे - कहानियां बच्चों को अपनी संस्कृति और रीति-रिवाज से जोड़ती है। बीते समय के किस्से उन्हें सबक देते हैं और बतौर इंसान उन्हें कैसे बनना चाहिए ये तय करने की सोच विकसित करते हैं।
  • नई बातें जानने की बढ़ती है चाह - कोई भी किस्सा सुनने के बाद बच्चों के उससे जुड़े कई सवाल होते हैं। इन सवालों के जवाब बच्चों को समझदार बनाते हैं और नया जानने की चाहत लगातार बढ़ाते है।
  • याददाश्त पर पड़ता है असर - बच्चे को कोई कहानी सुनाइए, तो लंबे समय तक उन्हें वो कहानियां याद रहती हैं। खेल-खेल में वो जितना सुनते-सीखते हैं, उनकी याददाश्त उतनी ज्यादा बढ़ती है।
  • नम्र बनते हैं बच्चे - अच्छे बुरे किरदारों से भरे लोगों के किस्से सुनकर बच्चे ये तय कर पाते हैं कि उन्हें किसे अपना आदर्श मानना है और क्यों। कहानियां उन्हें नम्र और मददगार बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।