कूल कल्चर:वीडियो डेटिंग का कोविड के बाद क्रेज बढ़ा, मन बहलाए और सेफ भी फील कराए

2 महीने पहलेलेखक: मीना
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केरल की कार्तिका पिल्लई पिछले दो साल से वीडियो डेटिंग कर रही हैं। अब जाकर उन्हें राइट पार्टनर मिला है, जिससे वे जल्द शादी करने वाली हैं। वे कहती हैं, ‘वीडियो डेटिंग फिजिकली मिलने से ज्यादा बेहतर है। यहां अगर आपको कोई बंदा पसंद नहीं आ रहा या आप उससे बोर हो रहे हैं तो उसे मना करने में झिझक महसूस नहीं होती।’ कोरोना के बाद वीडियो डेटिंग का कल्चर तेजी से बढ़ा। ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म ‘बंबल’ की नई स्टडी के मुताबिक, 33 फीसद भारतीय फिजिकली मिलने से पहले वीडियो डेट्स करना पसंद करते हैं। 78 फीसद किसी से मिलने से पहले वीडियो डेट्स पर ट्रस्ट बिल्ड करते हैं। इस तरह की डेटिंग को स्लो डेटिंग भी कहा जा रहा है।

कार्तिका और प्रणव
कार्तिका और प्रणव

स्टैटिस्टा के आंकड़ों के मुताबिक, ऑनलाइन डेटिंग सेग्मेंट में 2025 तक 6.2 करोड़ उपभोक्ता बढ़ने की संभावना है। दिल्ली में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा मलिक का कहना है कि कोविड-19 के बाद वीडियो डेटिंग का कल्चर तेजी से बढ़ा। होम आइसोलेशन, सोशल डिस्टेंसिंग, वर्क फ्रॉम में लोगों में अकेलापन बढ़ा, ऐसे में सिंगल्स को अपना राइट पार्टनर ढूंढ़ने का मौका भी मिला। 27 साल की एमबीए की स्टूडेंट कार्तिका का कहना है कि उनका पार्टनर यूएई में है। वह मैकेनिकल इंजीनियर है। जब उनके पार्टनर का बर्थडे था तब उस समय शिपिंग बंद थी तो उन्होंने वीडियो कॉल पर ही अनरैप गिटार का वीडियो बनाया और उसे भेजा। उसकी खुशी देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। कार्तिका को लगता है वीडियो कॉल पर बात करते हुए हम एक दूसरे से डिस्टेंस फील नहीं करते। दूरियां महसूस नहीं होतीं।

...तो इसलिए वीडियो डेटिंग का बढ़ रहा क्रेज?
डॉक्टर प्रज्ञा का कहना है कि आज का यूथ टेक्नोफ्रेंडली है। उनके लिए डेटिंग साइट्स फेसबुक, वॉट्सऐप की तरह हैं, जहां वे आराम से समय बिता सकते हैं। वीडियो डेटिंग में समय की बचत होती है। रिजेक्शन पेनफुल नहीं होता। बहुत से लोग जो दूसरों से मिलने में झिझकते हैं, उनके लिए वीडियो डेटिंग सुविधाजनक है। तो वहीं, ऐसे युवा जो काम में बहुत बिजी रहते हैं, उनके लिए भी वीडियो डेटिंग फायदेमंद है। वे ऑफिस और डेटिंग एक समय में कर सकते हैं।
बहुत से लोग ऐसे हैं जो सामने मिलकर बात करने में बहुत सहज नहीं होते, घर पर बैठते हैं तो कंफर्टेबली बात कर पाते हैं। कई घरों में आज भी पेरेंट्स ही रिश्ते देखते हैं। फैमिली की तरफ से जब रिश्ते देखे जाते हैं, तब किसी को मना करना रिश्तों में दरार तक करने का काम करता है। ऐसे में ऑप्शन कम होने लगते हैं, लेकिन ऑनलाइन डेटिंग साइट्स पर ऐसा नहीं है। यहां अगर एक लड़का या लड़की पसंद नहीं आई, तो दूसरा ऑप्शन रेडी होता है। अपना बेस्ट पार्टनर चुनने का मौका मिलता है।
ऐसे लोग जो इमोशनली लो फील करते हैं, तो उनके लिए वीडियो डेटिंग इमोशनल सपोर्ट का अच्छा प्लेटफॉर्म है।

सिर्फ फायदे ही नहीं कुछ नुकसान भी...
डॉक्टर प्रज्ञा का कहना है कि ऐसा नहीं है कि वीडियो डेटिंग के सिर्फ फायदे ही हैं बल्कि नुकसान भी हैं। मेट्रोमोनियल साइट्स पर लोग कई-कई साल तक डेटिंग कर रहे होते हैं, लेकिन सही पार्टनर नहीं मिलता तो खीझ भी बढ़ने लगती है। वहीं, ऑनलाइन डेटिंग में ऑप्शन ज्यादा होते हैं जिनमें से बेस्ट चुनना मुश्किल होता है। वीडियो डेटिंग में हुकअप्स के मामले भी बढ़ रहे हैं।
वीडियो डेटिंग जितना सुविधाजनक है, उतना ही चुनौतियों से भी भरा है। यहां फेक प्रोफाइल के मामले भी ज्यादा होते हैं। तो वहीं, किसी को अपना राइट पार्टनर मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। कहा जा सकता है कि राइट पार्टनर मिलने की कोई डेफिनेशन नहीं है।

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