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दामाद बेटे जैसा, पर बेटा नहीं:बहू को बेटी समान दर्जा पर दामाद से सौतेलापन क्यों, केरल हाइकोर्ट के अनुसार दामाद को ससुर की संपत्ति पर कोई हक नहीं

15 दिन पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • बेटी के घर में पेरेंट्स को हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
  • दामाद के परिवार को इज्जत दें। आपसी रिश्ते में मजबूती आएगी।

हिंदू विवाह में मंडप पर दामादों की पैर पूजा की रस्म होती है। ससुराल में यह रस्म देकर उनको नए परिवार में ऊंचे ओहदे पर बिठाया जाता है। फिर भी ससुराल की जायदाद में हिस्सेदारी नहीं दी गई। हमारे कानून में क्लास वन उत्तराधिकार में पति, पत्नी, बेटा, बेटी शामिल है। लेकिन सगे भाई-बहन के साथ-साथ दामाद को इससे बाहर रखा गया है।

दामाद को इग्नोर नहीं करें
दामाद को इग्नोर नहीं करें

दामाद और ससुर की संपत्ति
कानून के हिसाब से दामाद को जायदाद में हिस्सा नहीं मिल सकता। सास-ससुर इच्छा से दामाद को प्रोपर्टी में हक या कोई उपहार दे सकते हैं। इसका जिक्र वसीयतनामे में कर सकते हैं। एक से अधिक दामाद होने की स्थिति में इन-लॉज किसको संपत्ति का कितना हिस्सा देना चाहते हैं, यह पूरी तरह उनका अधिकार है।

दामाद को लेकर कानून में कंजूसी
दामाद को लेकर कानून में कंजूसी

ससुर और दामाद के रिश्ते की पहेली
दामादों पर यूएसए के यूनिवर्सिटी ऑफी मेरीलैंड में हुई स्टडी में शामिल करीब 40% दामादों ने माना कि वे बहुत ही मजबूती के साथ ससुराल से जुड़े हैं। 100 में से 58 दामाद इससे सहमत थे कि वे ससुर की बहुत इज्जत करते हैं। वहीं 100 मे से 56 दामादों ने स्वीकारा कि किसी अहम इश्यू पर ससुर की सलाह लेना नहीं भूलते हैं। अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के दामादों पर हुई इस स्टडी में शामिल 65 % इस बात से एकमत थे कि दामाद और ससुर का रिश्ता बहुत ही नाजुक होता है। स्टडी में शामिल 48 दामादों में से एक ने माना कि चूंकि पत्नी को अपनी पेरेंट्स से बहुत प्यार है इसलिए वह भी उनकी इज्जत करते हैं। यह भी पाया गया कि नाती और नतनियों के साथ समय गुजारने की वजह से भी उनके रिश्ते में मजबूत हुए। कुछ ने अपनी बॉडिंग के लिए दामाद और ससुर दाेनों के एक जेंडर का होना, खेल के बारे में एक जैसी रुचि।

अलग-थलग महसूस नहीं कराएं
अलग-थलग महसूस नहीं कराएं

बहू टाॅप पर दामाद नो रैंक
साइप्रस की यूनिवर्सिटी ऑफ निकोसिआ में हुई स्टडी में पाया गया कि दामाद ढूढ़ते समय पेरेंट्स आर्थिक रूप से मजबूत लड़का चाहते हैं। वहीं बहू के रूप में कुकिंग और घर की देखभाल करने वाली लड़कियों को पसंद करते हैं। दामाद के मामले में सास और ससुर की चॉइस में भी फर्क है। ससुर यह चाहता है कि होनेवाला सन-इनलॉ के परिवार का ख्याल रखने वाला हो। साथ ही कूल, को-ऑपरेटिव और पैसे वाला हो। जबकि सास चाहती हैं कि उसकी बेटी का पति की पर्सनेलिटी बहुत अच्छी होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय के एडवोकेट निपुण सक्सेना बताते हैं कि बहूओं को कानून में कई तरह के अधिकार दिए गए हैं। अनुच्छेद 15 के अनुसार औरतों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए कानून बनाया जा सकता है। सीआरपीसी (125)में भी बहू को गुजारा भत्ता मांगने का हक है। अगर पति नहीं कमाता हो, तो बहू अपने सास-ससुर से भी गुजारा भत्ता ले सकती है। इंडियन पीनल कोड, हिंदू मैरिज एक्ट, डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट हो या फिर डाउरी प्रिवेंशन एक्ट समेत ढेरों कानून बहूओं की स्थिति को मजबूत करते हैं। कुल मिला कर दामाद की स्थिति अभी कमजोर ही है। दामाद को कानूनी तौर पर क्लास वन और क्लास टू उत्तराधिकारियों में भी नहीं रखा गया है।

आपस में तालमेल कायम कर रिश्ते को मजबूती दें
आपस में तालमेल कायम कर रिश्ते को मजबूती दें

बेटियों के भी बड़े मजे
हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली के नियम के अनुसार पहले केवल पुरुषों का ही पैतृक संपत्ति पर अधिकार होता था। लेकिन 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम बनाए जाने के बाद पूर्वजों की संपत्ति पर बेटियों को भी हक दिया गया। इसके साथ ही उनको बेटे की तरह साझेदारी का अधिकार भी दिया गया। हिदू धर्म में स्त्रीधन की बात कही गई है, पुरुष धन जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। शादी के बाद पति के धन में महिला का बराबर का अधिकार माना जाता है। वहीं स्त्रीधन पर पति का कोई अधिकार नहीं होता। ऐसी स्थिति में भी बेटी का पोजिशन दामाद से बेहतर माना जा सकता है। एडवोकेट निणुन सक्सेना के अनुसार बहू के खिलाफ किसी तरह की हिंसा होने पर डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट का सपोर्ट होता है लेकिन दामाद के साथ मारपीट या दूसरी हिंसक घटना के सपोर्ट के लिए ऐसा कोई एक्ट नहीं है। सेक्शन 498 ए के अनुसार घरेलू हिंसा सिर्फ औरत या बहू के प्रति ही मानी जाती है। 304 बी में दहेज अधिनियम का जिक्र है, जिसके अनुसार किसी भी महिला का शादी के 7 साल के अंदर मौत हो जाती है और ऐसा दर्शाया जाता है कि उसके परिवार वाले से दहेज की मांग की गई थी, तो परिवार समेत दामाद जेल जा सकता है। दामाद को कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है। लेकिन शादी के बाद अगर पति की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो जाती है, तो उसे कानून से ऐसा सपोर्ट नहीं मिलता है।

दामाद और ससुर के तालमेल का फॉर्मूला
मनस्थली की फाउंडर डॉ. ज्योति कपूर के अनुसार ससुराल वालों को लड़की की फैमिली की इज्जत करनी चाहिए। मतभेदों से बचने के लिए ससुरालवालों के साथ कम्युनिकेशन को जारी रखना चाहिए। दामाद और बेटी के बीच मतभेद होने की स्थिति में दामाद की बातों को ध्यान से सुनें। न्यूट्रल होकर अपना निर्णय दें। बेटी के परिवार में दखल नहीं दें। अगर दामाद से किसी तरह का सपोर्ट चाहते हैं, तो अपने विचारों को स्पष्ट शब्दों में खुलकर उनके सामने रखें। याद रखें, कम्युनिकेशन और विश्वास हर रिश्ते की मजबूती का आधार होता है।

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