पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सेक्स, सवाल और सोल्युशन:पेरेंट्स बच्चों से सेक्स पर बात क्यों नहीं करते?

11 दिन पहलेलेखक: मीना

बच्चा यदि वक्त से पहले सेक्सुअली एक्टिव हो या गलत रिश्तों में पड़ जाए, तो नौबत अनसेफ अबॉर्शन या सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) तक आ जाती है। पैरेंट्स इस भ्रम में होते हैं कि बच्चा अभी सेक्स शब्द से अनजान है, लेकिन जब सच्चाई सामने आती है, तब उनके पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है। पोर्न वीडियोज, फेसबुक, वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बच्चों को सेक्स के बारे में खुली जानकारी तो मिल जाती है, लेकिन सही जानकारी नहीं मिलती।

विकासशील देशों में 15-19 वर्ष की किशोरियों में हर साल कम से कम 1 करोड़ ‘अनचाही प्रेगनेंसी’ होती हैं। यही नहीं, हर साल 15-19 साल की लड़कियों में 56 लाख अबॉर्शन होते हैं। इसमें से 39 लाख अनसेफ अबॉर्शन होते हैं। यह आंकड़ा हमारा नहीं, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का है। अनसेफ अबॉर्शन की वजह से मातृ मृत्यु दर, मॉर्बिडिटी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ावा मिलता है।

असुरक्षित सेक्स और स्वास्थ्य समस्याएं
किशोरियों में सेक्स की सही जानकारी नहीं होने की वजह से उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अपोलो अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजना शर्मा का कहना है कि पेरेंट्स जितनी जल्दी बच्चे को सेक्स के बारे में जानकारी दें उतना अच्छा है। सेक्स एजुकेशन का मतलब सिर्फ पेनेट्रेशन नहीं होता, उसे ये भी बताएं कि बच्चा कैसे पैदा होता है। सेक्स एजुकेशन का सारा ठीकरा स्कूलों के सिर नहीं फोड़ा जा सकता, क्योंकि हमारे शिक्षक भी सेक्स पर बात करने से कतराते हैं, इसलिए पेरेंट्स को ही शुरुआत करनी चाहिए।
डॉक्टर रंजना का कहना है कि माता-पिता ऐसा सोचते हैं कि अगर बच्चे से सेक्स के बारे में बात करेंगे तो वो जल्दी सेक्सुअली एक्टिव हो जाएगा। ऐसा नहीं है, अगर बच्चे को सही जानकारी दी जाए तो वो अनचाही प्रेगनेंसी से लेकर यौन रोग जैसी कई दिक्कतों से बच जाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 से अधिक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी हैं जो सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) का कारण बनते हैं। यह बीमारी अनसेफ सेक्स से फैलती है, जिसमें वजाइनल, ओरल और एनल सेक्स शामिल है। इन समस्याओं से बचने के लिए बच्चों को गर्भनिरोधकों के बारे में जानकारी दें। कैंसर प्रिवेंशन की वैक्सीन लगवाएं।

बच्चों को सेफ सेक्स के बारे में कैसे बताएं?
भोपाल के मुस्कान एनजीओ की समाज सेविका शिवानी का कहना है कि सेक्स एजुकेशन सिर्फ किसी को सेक्स के लिए तैयार करने के लिए नहीं है, बल्कि यह एब्यूज के बारे में बात करने के लिए भी है। सेक्स दोनों पार्टनर के बीच गरिमा की बात है। अगर आप किसी के साथ फिजिकली एक्टिव हो रहे हैं तो उसके कंसेंट को भी समझें। कंसेंट यानि सेक्सुअल एक्टिविट दोनों पार्टनर की रजामंदी से हो रही है या जबरदस्ती, इसका फर्क बच्चों को समझाएं। अगर अभी से बच्चों को कंसेंट के बारे में समझाएंगे तो भविष्य में रेप जैसी घटनाएं कम हो सकती हैं। दिल्ली में सेक्सुअलिटी कोच पल्लवी बर्नवाल ने बच्चों के साथ सेक्स पर बात करने के निम्न तरीके बताए हैं।

  • बच्चे जब बड़े हो रहे होते हैं तब उनके शरीर में प्राइवेट पार्ट्स का भी डेवलपमेंट हो रहा होता है, लेकिन उस विकास के बारे में उन्हें नहीं बताया जाता। हम बच्चों को पेनिस या वजाइना जैसे सही शब्द नहीं बताते, बल्कि उसके बदले में नुन्नो, नुन्नी, ये चीज, वो चीज, सुस्सु जैसे शब्द बताते हैं, जबकि हम जानते हैं कि ये सही नाम नहीं हैं। तो हमें सबसे पहले अपने बच्चों को जननांगों की सही जानकारी देनी है।
  • टीनेज की ओर बढ़ता बच्चा जब टीवी पर सैनिटरी नैपकिन के ऐड देखकर आपसे पूछने लग जाए कि यह क्या है, तो आप उसे सेक्स के बारे में जानकारी देना शुरू कर दें।
  • बच्चों को आप कहानियों, किताबों, वीडियो, परिवार के साथ चर्चा, फिल्म के जरिए सेक्स पर जानकारी दे सकते हैं। बच्चों के साथ ऐसा रिश्ता बनाएं कि वे आपसे खुलकर बात कर पाएं। जिस तरह गाड़ी का लाइसेंस बनाने के लिए 18 साल की उम्र चाहिए, वैसे ही बच्चों को बताएं कि सेक्स की सही उम्र क्या है।
  • लड़कियों को खासकर सेक्स के बारे में जरूर बताएं। आप अपने अनुभवों के साथ बच्चों से सेक्स पर बात शुरू कर सकते हैं। उन्हें इन मुद्दों पर बात करने के लिए आमंत्रित करें, लेकिन उनके साथ जबर्दस्ती न करें, वरना बच्चे आपसे आपसे कतराने लगेंगे।

सेक्स पर बात करने के फायदे

दिल्ली की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रज्ञा मलिक ने बताया कि सेक्स एजुकेशन के बारे में बात करने से बच्चों में हेल्दी कम्युनिकेशन डेवलप होता है। हमारे समाज में सेक्स पर बात करना टैबू माना जाता है, लेकिन जब हम बच्चों को सेक्स के बारे में जानकारी देंगे तो वे सही से लोगों के बीच में अपनी बात रख पाएंगे। बच्चा अपने दोस्तों से आधी-अधूरी जानकारी हासिल करे, इससे बेहतर है कि माता-पिता दोस्त बनकर हेल्दी कम्युनिकेशन करें। बच्चे में जब हेल्दी कम्युनिकेशन डेवलप होता है तो वह हेल्दी रिलेशनशिप भी बना पाता है और भविष्य में रिलेशनशिप में होने वाली कई परेशानियों से भी बच जाता है।

बच्चों की ओर से सेक्स पर पूछे जाने वाले सवाल
‘मम्मा बेबी कैसे आता है? मम्मा पीरियड क्या होते हैं? क्या डैडी आपको मूवी वाली ‘किस्सी’ देते हैं। बढ़ती उम्र के बच्चों के ऐसे तमाम सवालों के जवाब इंडियन फैमिली के पैरेंट्स के पास बहुत कम होते हैं। सेफ सेक्स तो छोड़िए, हम बच्चों के सामने सेक्स लफ्ज बोलने से भी परहेज करते हैं। सेक्स को लेकर बच्चों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब पैरेंट्स कैसे दें, इसके बारे में सेक्सुअलिटी कोच पल्लवी बर्नवाल ने बताया:

1. स्कूलों में जब सेक्स एजुकेशन दी जाती है, तब लड़कों का अक्सर सवाल होता है कि क्या लड़कियां भी मास्टरबेट करती हैं? अगर हां, तो कैसे?
हां, लड़कियां भी मास्टरबेट करती हैं। लड़कियां भी वैसे ही मास्टरबेट करती हैं, जैसे लड़के करते हैं। अगर आप अपने बच्चे को मास्टरबेट के बारे में बताना चाहते हैं तो आप बता सकती हैं कि कभी-कभी लोग अपने शरीर के कुछ पार्ट्स को छूते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है। यह खराब बात नहीं है। अपने शरीर के बारे में जानना नॉर्मल है। बच्चे को यह भी बताएं कि यह एक प्राइवेट एक्टिविटी है। इसका मतलब है कि हमें हमारे प्राइवेट पार्ट्स को दूसरों के सामने नहीं छूना है। साथ ही हम किसी और की बॉडी को उसकी परमिशन के बिना नहीं छू सकते। अगर बच्चा 12-14 साल का है, तो उसे और डिटेल में बता सकते हैं।

2. बेबी कैसे होते हैं?
अगर आपका बच्चा 10 साल से कम उम्र का है और इस तरह के सवाल पूछता है तो आप उसे बच्चा पैदा होने का पूरा विज्ञान नहीं समझा सकते। ऐसे में आप उसे बता सकते हैं कि जब मम्मा और पापा एक साथ आते हैं और पापा एक बीज देते हैं और मां एक बीज देती हैं, ये बीज मिलकर एक बच्चा बनाते हैं। जब बच्चा बड़ा हो जाए तब आप उसे बच्चे पैदा होने का विज्ञान समझा सकते हैं।

3. मेरे 7 साल के बेटे ने सैनिटरी नैपकिन का ऐड देखकर पूछा कि यह क्या है, तो मैंने बताया जब लड़कियों को बहुत जोर से सुस्सु आता है और जब वे उसे कंट्रोल नहीं कर पाती हैं, तब वे इसका इस्तेमाल करती हैं। तब से वह सैनिटरी नैपकिन्स को मम्मा डायपर कहने लगा है। अपने बच्चे को गलत जानकारी देने पर मुझे गिल्ट फील होता है, मैं क्या कर सकती हूं?
अगर आप भी ऐसी ही किसी परिस्थिति में हैं तो घबराइए मत। हमें मालूम है कि सेक्स पर बात करना बहुत आसान नहीं होता है। आप अपने बच्चे के पास जाइए और उसे सही जानकारी दीजिए। इससे बच्चों को आप यह समझा पाएंगे कि माता-पिता से भी गलतियां होती हैं। इसका जवाब आप कुछ ऐसे दे सकती हैं। जब लड़कियां बड़ी होती हैं मतलब जब वे 12-13 साल की उम्र में पहुंचती हैं, तब उनके शरीर में कई बदलाव होते हैं। यह बदलाव उनके शरीर में कैमिकल्स (हार्मोन) में बदलाव की वजह से होते हैं। जब यह होता है तब एक औरत का शरीर बच्चा पैदा करने के लिए तैयार होता है। जब बच्चा बाहर नहीं आता है तब वजाइना से खून आता है। बच्चे को जब पीरियड्स के बारे में बेसिक समझ बन जाएगी, तब आप उसे सैनिटरी नैपकिन के बारे में बताएं। उसे बताएं कि जब महिलाओं के शरीर से वह ब्लड आता है तब वे सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं। आप चाहें तो नैपकिन और पानी के साथ डैमो भी दे सकती हैं।

4. मेरा 6 साल का बेटा हमारे साथ टीवी पर फिल्म देख रहा था, उसने हमसे पूछा कि हीरो के किस करने के बाद हीरोइन प्रेग्नेंट कैसे हो जाती है? क्या मैं भी किसी को किस करके बच्चा ले सकता हूं?
आपके लिए यह बहुत सही समय है अपने बच्चे को बताने का कि टीवी या ऑनलाइन मीडियम्स पर जो दिखाया जा रहा है वह सबकुछ सच नहीं है। आप बच्चे को बता सकते हैं कि किसी को किस करने से कोई प्रेग्नेंट नहीं हो जाता। प्रेग्नेंसी की एनाटोमी आप बच्चे को समझा सकते हैं।

5. टीवी पर विज्ञापन देखने के बाद मेरी बेटी मुझसे पूछती है कि प्रेग्नेंसी किट क्या है? ऐसे सवाल का मैं उसे क्या जवाब दूं?
प्रेग्नेंसी किट से मालूम होता है कि महिला के गर्भ में बच्चा विकसित हो रहा है या नहीं? इस प्रक्रिया को आप बच्चे के एग्जाम के साथ कंपेयर करके बता सकते हैं। जैसे उनके स्कूल में टेस्ट होते हैं कि वे तीसरी या चौथी क्लास में जा सकते हैं या नहीं। ऐसे ही एक प्रेग्नेंसी टेस्ट इसलिए होता है कि क्या महिला का शरीर उन रसायनों को बना रहा है जो स्वाभाविक रूप से तब बनते हैं जब गर्भ में बच्चा आकार ले रहा होता है।

खबरें और भी हैं...