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नौकरी करते निकाला UPSC:शादी बाद पति संग सऊदी यूनिवर्सिटी में पढ़ाया, मन उखड़ा तो की तैयारी, SDM बनी-अब हूं IPS

4 महीने पहलेलेखक: मीना

किसी को खाने की,सोने की या घूमने की धुन होती है, लेकिन मुझे पढ़ने की धुन थी। दिन हो या रात अगर पढ़ाई नहीं हुई तो समझिए मेरे भीतर ‘ऑक्सीजन’ की कमी होने लगती। पढ़ाई ही मेरे हर कन्फ्यूजन का सल्यूशन होती।

मिलें फिरोजाबाद में पोस्टेड एसडीएम से
फिरोजाबाद में पोस्टेड एसडीएम और जल्द ही आईपीएस बनने जा रहीं डॉ. बुशरा बानो वुमन भास्कर से खास बातचीत में कहती हैं, ‘पढ़ाई ही नहीं मेरा संवेदनशील हृदय जब भी किसी दीन-दुखियारे, बेचारे को देखता तो रो पड़ता। मन में बार-बार आता एक दिन तो कुछ ऐसा करूंगी जिनसे इनकी परेशानियां दूर कर सकूं।

पढ़ती गई और बढ़ती गई
बचपन से तय कर लिया था कि बड़े होकर यूपीएससी ही निकालना है। कन्नौज के सौरिख नगर पंचायत में पली-पढ़ी। दो बहन और एक भाई में सबसे छोटी मैं। घर में बड़ी थी तो अपनी जिम्मेदारियां भी समझती थी। बीएससी करने के बाद लखनऊ से एमबीए किया। इसी दौरान नेट की परीक्षा पास कर ली। अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी से पीएचडी की। पीएचडी करते-करते आगरा के एक मैनेजमेंट कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर भी रही। यहां दो साल तक बच्चों को पढ़ाया।

शादी और नौकरी साथ-साथ
पीएचडी पूरी होते-होते अलीगढ़ में ही 2014 में शादी हो गई। फिर बच्चे। उस वक्त मैं 25 साल की थी। शादी के 20 दिन बाद हसबैंड और मैं सऊदी अरब में एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाने चले गए, लेकिन वहां मन नहीं लगा। मन में आता कि मुझे यूपीएससी निकालना है तो मैं यहां क्या कर रही हूं? अपने देश जाकर कुछ करती हूं।

कन्नौज में पली-बढ़ी बुशरा कहती हैं कि बचपन से ही पढ़ने लिखने का शौक था और तभी से तय कर लिया था कि यूपीएससी ही निकालना है।
कन्नौज में पली-बढ़ी बुशरा कहती हैं कि बचपन से ही पढ़ने लिखने का शौक था और तभी से तय कर लिया था कि यूपीएससी ही निकालना है।

सऊदी अरब से देश वापसी
बस बोरिया-बिस्तर, उतरा हुआ मन सब समेटा और चल दिए अपने देश। भारत आते ही यूपीएससी की तैयारी में खुद को झोंक दिया। इसी बीच कोल इंडिया में वैकेंसी निकली और मैंने फॉर्म भर दिया। कोल इंडिया का एग्जाम पास करने के बाद असिस्टेंट मैनेजर का काम किया। नौकरी करते-करते यूपीएससी की तैयारी भी करती रही। फिर साल 2018 में यूपीएससी में सिलेक्शन हो गया और 277वीं रैंक आई। मुझे इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस मिला।

पीसीएस भी निकाला
इसी साल पीसीएस की परीक्षा में बैठी और छठी रैंक आई। अब फिरोजाबाद में बतौर एसडीएम पद पर पिछले दो साल से कार्यरत हूं। ऐसा नहीं था कि सरकारी नौकरी मिल गई है तो अब पढ़ना नहीं है। मैंने 2020 में फिर यूपीएससी निकाला और इस बार 234वीं रैंक आई। अब दिसंबर में बतौर आईपीएस जॉइन करना है।

बच्चे, नौकरी और यूपीएससी की तैयारी
अपनी मेहनत और तैयारियों के पन्ने पलटती हूं तो दिखता है कि मैंने नौकरी, बच्चे और परिवार को संभालते-संभालते ये सभी परीक्षाएं निकालीं। अभी मेरे दो बच्चे हैं। एक सात साल का और एक तीन साल का। कई बार तो बच्चे को फीड कराते-कराते पढ़ाई की थी।

कभी घर के काम को बोझ नहीं समझा। चूंकि मैंने पीएचडी मैनेजमेंट में की थी, तो मुझे मेरा समय और पढ़ाई का समय तय करना आता था। मैंने दोनों जिम्मेदारी बराबर निभाईं।

टाइम टेबल सेट करें
आज जब लोग ये पूछते हैं कि आपकी तैयारी का राज क्या है? तब मैं यही कहती हूं कि हम सभी कि जिंदगी अलग है। हमारी व्यवस्तताएं हमें मालूम हैं। ऐसे में कोई दूसरा या तीसरा हमारी पढ़ाई का टाइम-टेबल सेट नहीं कर सकता।

आपके पास जो समय हो, उस समय में पढ़ें। बोझिल होकर नहीं, मन से पढ़ें। मुश्किलें सभी के जीवन में हैं। हिम्मत और हौसले से सब मुमकिन हो जाता है। मेरे तो रिश्तेदार भी इस बात से परेशान रहते हैं कि ‘ये लड़की पढ़ना बंद ही नहीं करती।’ हा हा हा…

मेरी कामयाबी में मेरे पति ने और मेरे पूरे परिवार ने बहुत साथ दिया।
मेरी कामयाबी में मेरे पति ने और मेरे पूरे परिवार ने बहुत साथ दिया।

अच्छी ऑफिसर हूं
जिस भी एरिया में पोस्टिंग होती है, लोग यही कहते हैं- ‘अच्छी ऑफिसर हैं।’ मुझे मेरे काम से बहुत प्यार है। ईमानदारी, डेडिकेशन और कमिटमेंट के साथ काम करती हूं। यहां तक पहुंचने में परिवार का सपोर्ट भी बहुत मिला।

हम दोनों हसबैंड-वाइफ ने शादी के वक्त ही तय किया था कि दोनों साथ रहेंगे। हसबैंड पीएचडी कर रहे हैं और अपना बिजनेस चलाते हैं। मेरी जहां भी पोस्टिंग होती है, वहां वे साथ होते हैं।

मां से सीखी समय की पाबंदी
मैं समय की पाबंद रही हूं। ये पाबंदी मां ने सिखाई। बचपन से ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखा। अपना काम किया और घर आई। हर काम का बैलेंस बनाकर रखा। अब हर रोज लोगों की मदद करके, उनकी परेशानियां सुलझाकर रात को नींद सुकून भरी आती है।

‘सफलता’ आपके लिए खड़ी है
ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ पढ़ती हूं और काम करती हूं। जिंदगी को जीती भी हूं। घूमती भी हूं। शॉपिंग भी करती हूं और बाकी जिम्मेदारियां भी निभाती हूं। तो अगर आपने भी अपना कोई लक्ष्य तय किया और शादी, बच्चे हैं तो परेशान न हों। समय को बांटें और तैयारी में जुट जाएं। सफलता आपके लिए बाहें फैलाए खड़ी है।

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