• Hindi News
  • Women
  • This is me
  • Became A Banker From The Village, Won The Title Of Mrs. India World, Now Also Won The Best National Costume Award In Mrs. World.

ये मैं हूं:गांव से निकलकर बैंकर बनी, मिसेज इंडिया वर्ल्ड का खिताब जीता, अब मिसेज वर्ल्ड में बेस्ट नेशनल कॉस्ट्यूम अवॉर्ड भी किया अपने नाम

10 महीने पहलेलेखक: मीना

‘ब्यूटी विद ब्रेन का कॉन्सेप्ट महिलाओं के साथ जोड़कर उनको शुरू से कमतर दिखाने की कोशिश की गई। हर औरत खुद में खूबसूरत होती है। आज मैं विदेश में अगर बेस्ट नेशनल कॉस्ट्यूम अवॉर्ड जीत पाई हूं तो उसके पीछे मेरा आत्मविश्वास से भरा चेहरा और मिसेस वर्ल्ड 2022 के लिए की गई मेरी मेहनत का फल है। मैं इस खिताब को तो अपने नाम नहीं कर पाई लेकिन मैंने टॉप-15 में जगह जरूर बनाई।’ ये शब्द हैं मिसेज इंडिया वर्ल्ड 2021 की विनर नवदीप कौर के।
33 साल की नवदीप वुमन भास्कर से कहती हैं कि मैं ओडिशा में पली-बढ़ी। मैंने पढ़ाई-लिखाई कॉन्वेंट स्कूल से की। इंजीनियरिंग करने के बाद कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनी। एमबीए किया और कोटेक महिंद्रा बैंक में एसिस्टेंट मैनेजर के तौर पर लगभग एक साल काम किया। इसके बाद मेरी शादी करवा दी गई। शादी भी ओडिशा के एक ऐसे पिछड़े गांव में हुई जहां बहुत सुविधाएं नहीं थीं।
बैंकर के बाद प्रोफेसर बनी
वहां पर मैंने एमबीए के एक कॉलेज में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। फिर देखा कि इस गांव के बच्चे पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं। उनके 90 फीसद मार्क्स तक आते लेकिन उनमें कॉन्फिडेंस की कमी थी। तब मैंने पर्सनेलिटी डेवलपमेंट के सेशन लेने शुरू किए। ताकि वे बच्चे जब किसी जॉब इंटरव्यू के लिए जाएं तो असफल होकर न लौटें। इस काम को करने पर सभी से मुझे इतनी सराहना मिली कि अब मैं बच्चों को पर्सनेलिटी डेवलपमेंट के फ्री सेशन देती हूं।

आत्मविश्वास ही जिताता है : नवदीप कौर
आत्मविश्वास ही जिताता है : नवदीप कौर

बैंकर से असिस्टेंट प्रोफेसर फिर पर्सनेलिटी डेवलपमेंट ट्रेनर
2014 में जब मेरी शादी हुई तब वहां से बैंक बहुत दूर पड़ता था। लेकिन मुझे दूसरों के साथ-साथ अपने लिए कुछ करना था। तब मुझे असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी मिली। कहते हैं न जहां चाह वहां राह। मैं एक नौकरी करने निकली थी और फिर मैं पर्सनेलिटी डेवलपमेंट ट्रेनर बन गई। जब कोविड शुरू हुआ तब ऑनलाइन सेशन लेने लगी। घर का काम करने के बाद भी मेरे पास समय बचता और इस वक्त मेरी बेटी 5 साल की हो गई थी, इसी बीच मेरे दोस्तों ने मुझे मिसेज इंडिया 2021 के लिए रजिस्टर करने को कहा और मैंने उनकी बात मान ली।
ब्यूटी पेजेंट के लिए किया रजिस्ट्रेशन
2020 में रजिस्ट्रे्शन करने के बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस कॉम्पिटिशन के लिए मुझे खुद पर जो भी काम करना था वो मैंने किया। पिछले साल जनवरी, 2021 में फाइनल हुआ जहां मैं मिसेज इंडिया के खिताब से नवाजी गई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस प्रतियोगिता के लिए तैयारी करूंगी। पर ये खिताब मेरे नाम हुआ मुझे आज भी भरोसा नहीं होता। हा हा हा…
एक प्रतियोगिता जीतने के बाद आत्मविश्वास आ गया। फिर, मैंने मिसेज वर्ल्ड की तैयारी की।मिसेज इंडिया वर्ल्ड के लिए ऑर्गनाइजेशन ने मेरे ऊपर बहुत मेहनत की। मैं इस फील्ड में नई थी। एक एजुकेटर रही हूं। इसलिए भी मुझे खुद को प्रूव करने करना था। इस वजह से मुझे मिसेज इंडिया वर्ल्ड के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। मुझे जो भी गाइडेंस मिलती मैं उसे बहुत ध्यान से सीखती। ताकि मुझमें कोई कमी न रह जाए। अपनी टीम की वजह से मैं लास वेगास मिसेज वर्ल्ड पेजेंट के लिए पहुंची।

नवदीप ने बैंकिंग छोड़ ग्लैमर की दुनिया को अपनाया।
नवदीप ने बैंकिंग छोड़ ग्लैमर की दुनिया को अपनाया।

कुंडिलिनी चक्र को कॉम्पिटिशन के लिए क्यों चुना?
जब मैं लास वेगास मिसेज वर्ल्ड में इंडिया को रिप्रेजेंट करने पहुंची तो थोड़ा संकोच इसलिए था क्योंकि मैं उस फील्ड से नहीं थी, लेकिन जैसे ही ट्रेनिंग शुरू हुई मुझमें आत्मविश्वास भर गया। इसी आत्मविश्वास ने सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय पोशाक का खिताब मेरे नाम किया। इस प्रतियोगिता में कुंडलिनी चक्र की ड्रेस मैंने पहनी। जिसका मकसद था कि एक महिला अपना घर जितने अच्छे संभाल लेती है उतने ही अच्छे से परिवार की तरफ बुरी नजर देखने वालों के खिलाफ लड़ती है। जब उसके परिवार पर कोई मुसीबत आती है तब वह अपनी शक्ति को जगाती है। इसी शक्ति का प्रदर्शन किया है कुंडिलिनी के जरिए।
ये ड्रेस बिल्कुल नागिन की तरह थी। इस गोल्डन कलर से जजिस बहुत खुश हुए और फाइनली मुझे बेस्ट नेशनल कॉस्ट्यूब अवॉर्ड से नवाजा गया। भारतीय महिलाएं हमेशा पारंपरिक पोशाक में रहती हैं लेकिन मुझे विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करना था तब मैंने महिलाओं की भीतरी शक्ति का प्रतीक कुंडिलिनी को चुना।

नवदीप ने लास वेगास में कुंडलिनी चक्र के जरिए जीता जजिस का दिल।
नवदीप ने लास वेगास में कुंडलिनी चक्र के जरिए जीता जजिस का दिल।

शुरू से जो चाहा वो किया
मैं शुरू से बहुत जिद्दी रही हूं। जो करना चाहा उसे अपने दम पर किया। घर वालों से मुझे हमेशा सपोर्ट मिला। मुझे कभी परिवार की तरफ से कोई रुकावट नहीं आई।
मैंने देखा है जब महिलाएं मां बन जाती हैं उसके बाद उनके शरीर में बहुत सारे बदलाव आते हैं और वजन बढ़ना एक आम परेशानी होती है। मैंने शुरू से अपने ऊपर ध्यान दिया।
महिलाओं का खुद पर ध्यान देना जरूरी
मैं आज भी हर महिला से यही कहती हूं कि फिट रहना बहुत जरूरी है। सिर्फ खूबसूरती की दुनिया में आने के लिए फिट रहना जरूरी नहीं है किसी भी फील्ड में जाने के लिए फिट रहना जरूरी है। खुद को इतना मेंटेन रखें कि भीतर और बाहर दोनों तरह से कॉन्फिडेंस आए। जब आप आत्मविश्वासी हो जाते हैं और मन में ये जज्बा हो कि कुछ करना है तब आप चाहे सिंगल मदर हों या फिर तलाकशुदा आप अपने मन का काम कर ले जाएंगी। आपका जो सपना है उसकी तरफ आज ही कदम बढ़ाएं…