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कैप्‍टन जोया की रिकॉर्ड तोड़ उड़ान:16 हजार किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी तय की,पहली बार अमेरिकी एविएशन म्यूजियम में मिली जगह

20 दिन पहलेलेखक: मरजिया जाफर

एयर इंडिया की एक महिला पायलट को जेनरेशन इक्वलिटी के तहत यूनाइटेड नेशन में स्पोक्सपर्सन के रूप में चुना गया। जिन्हें दुनिया के सबसे लंबे हवाई रूट पर बिना रुके जहाज उड़ाने वाली पायलट का खिताब भी हासिल है। आज ये मैं हूं में एक ऐसी उड़न परी की कहानी जिसने दिल्‍ली से न्‍यूयॉर्क के लिए निकले हवाई जहाज को बीच रास्ते में ही मोड़ दिया और वापस दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पैर लैंड किया। वजह थी एक बुजुर्ग यात्री की बिगड़ती तबीयत। आइए, आगे की कहानी जोया से ही जानते हैं।

बोइंग 777 एयरक्राफ्ट की कैप्टन

मैं कैप्टन जोया अग्रवाल, सीनियर एयर इंडिया पायलट हूं, बोइंग 777 एयरक्राफ्ट उड़ाती हूं। 2013 में बोइंग एयरक्राफ्ट उड़ाने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला पायलट बनीं। 2015 में एक पैसेंजर की जान बचाने के लिए न्‍यूयॉर्क के रास्ते से हवाई जहाज घुमाकर वापस दिल्ली लौटा आई।

अमेरिकी एविएशन म्यूजियम में मिला सम्मान

कहां से शुरू करूं। क्या कहूं। मैं बिलकुल नि:शब्द हूं। 8 साल की उम्र में मैंने कभी नहीं सोचा था कि आसमान की सैर का सपना एक दिन मेरी पूरी जिंदगी बदल देगा। यूं तो मैं एयर इंडिया की पायलट और कैप्‍टन हूं, लेकिन सैन फ्रांसिस्को में मौजूद एविएशन म्यूजियम ने मुझे अपने यहां जगह दी। म्यूजियम में एविएशन से जुड़ी बहुत सारी ऐतिहासिक चीजें हैं, लेकिन किसी जीते-जागते इंसान को वहां पहली बार जगह मिली है। मुझे यह देखकर बहुत खुशी और अचंभा हुआ कि एविएशन के इतिहास से जुड़ी तमाम यादगार चीजों के बीच जीती जागती चीज मैं ही हूं। मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

मैंने नॉर्थ पोल के ऊपर 16 हजार किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी तय करने का इतिहास रचा है और बोइंग एयरक्राफ्ट उड़ाने वाली सबसे कम उम्र की पायलट भी बनी। मैंने पहली बार एयर इंडिया का विमान लेकर ऑल वुमेन क्रू के साथ दुनिया के सबसे लंबे हवाई रूट सैन फ्रांसिस्को से लेकर बेंगलुरु तक में नॉन स्टॉप उड़ान भरी।

बुजुर्ग यात्री की बचाई जान

दरअसल हुआ यूं कि नई दिल्‍ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एयर इंडिया का एक विमान न्‍यूयॉर्क के लिए उड़ा, लेकिन रास्ते में एक बुजुर्ग यात्री की तबीयत काफी खराब हो गई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। न्‍यूयॉर्क का रास्ता लंबा था। अगले छह घंटों से पहले कहीं विमान लैंड करने की सूरत नहीं थी। ऐसे में मैंने आनन-फानन में एक फैसला करते हुए जहाज को वापस घुमाया और दिल्‍ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर लैंड किया। उन बुजुर्ग व्यक्ति को फौरन अस्पताल ले जाया गया और उनकी जान बच गई।

महामारी में पहली को-पायलट के रूप में चुना गया

जब पूरी दुनिया में कोविड महामारी फैली तो भारत सरकार ने मई, 2020 में वंदे भारत मिशन की शुरुआत की। इस मिशन के तहत दुनिया भर से 14,800 भारतीयों को वापस भारत लाया गया। एयर इंडिया के विमानों ने कुल 64 उड़ानें भरीं। ऐसी पहली उड़ान की को-पायलट के रूप में मुझे चुना गया। 2021 में मैंने नॉर्थ पोल पर 16 हजार किलोमीटर लंबी उड़ान भरी, जिसके बाद यूनाइटेड नेशन मुझे जनरेशन इक्वेलिटी मिशन का स्पोक्सपर्सन बनाया।

जहाज में मनाया पिता का जन्मदिन

10 साल में पहली बार मैंने पापा के बर्थडे के मौके पर उन के साथ उड़ान भरी। मैंने हमेशा इस दिन का सपना देखा था। कैप्‍टन होते हुए अपने पैरेंट्स के साथ हवाई जहाज में जाना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन मेरे लिए यह बहुत ही खास दिन था और इसे मैं जिंदगी की खुबसूरत याद बनाना चाहती थी।

एयर इंडिया की शुक्रगुजार हूं

मैं बहुत ही भाग्यशाली हूं और यह कहना चाहती हूं कि संयुक्त राष्ट्र महिला जैसे मंच पर अपने देश और एयर इंडिया को रिप्रेजेंट करने मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात है। दुनिया भर में अपने देश का मान बढ़ाने के लिए मैं बहुत सम्मानित महसूस करती हूं। मैं अपनी कामयाबी के लिए सरकार और एयर इंडिया की शुक्रगुजार हूं।

आज मैं जो कुछ भी हूं कड़ी मेहनत और मां-पापा की तपस्या से हूं।
आज मैं जो कुछ भी हूं कड़ी मेहनत और मां-पापा की तपस्या से हूं।

मैं जहां से हूं वहां सपने देखने की इजाजत नहीं है

8 साल की उम्र में सितारों को छूने का सपना देखा था। मैं एक ऐसी जगह से आती हूं जहां ऐसे सपने देखने की इजाजत भी नहीं थी और मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा किया जिसने मेरा मार्गदर्शन किया और मुझे प्रेरित किया कि कुछ भी असंभव नहीं है।

हर महिला को सपने देखने का हक

मैं सितारों को छूना चाहती थी। मैं हर लड़की और महिला से कहना चाहती हूं कि अपने आस-पास के माहौल की परवाह किए बिना सपने देखना जारी रखें। हर महिला को सपने देखना चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए खुद पर विश्वास करना चाहिए, चाहे उनकी मुश्किलें कुछ भी हों। कड़ी मेहनत करें, फोकस और डेडीकेशन बरकरार रखें लेकिन कभी हार न मानें।