ये मैं हूं:शौना चौहान, लाइब्रेरियन-रिसेप्शनिस्ट से पार्ले एग्रो की CEO बनी, कितनी भी जरूरी मीटिंग हो बेटे का फोन कभी मिस नहीं करती

8 महीने पहलेलेखक: कमला बडोनी

वो बेहद खूबसूरत हैं, लेकिन उन्होंने कभी बालों को कलर नहीं किया, वो स्टाइलिश हैं, लेकिन कम्फर्ट को हमेशा प्राथमिकता देती हैं, इसीलिए फॉर्मल पैंट के साथ स्पोर्ट्स शूज पहनती हैं। वो फेलियर को कामयाबी की पहली सीढ़ी मानती हैं और हमेशा आगे बढ़ने में विश्वास रखती हैं। हम बात कर रहे हैं देश की पावरफुल बिजनेस वुमन का खिताब पाने वाली पार्ले एग्रो की सीईओ शौना चौहान की, जो ये मानती हैं कि महिलाओं के लिए कोई भी मुकाम हासिल कर पाना नामुमकिन नहीं है।

देश की यंगेस्ट बिजनेस वुमन में से एक शौना चौहान महिलाओं को ये हौसला देती हैं कि ठान लो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। वुमन भास्कर ने जब शौना चौहान से उनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में जानना चाहा, तो कई ऐसी बातें पता चलीं, जो ये साबित करती हैं कि महिला अगर घर और कंपनी दोनों संभालती है, तो बखूबी बैलेंस बनाकर कामयाबी हासिल करती है।

छोटी-छोटी नौकरियां कीं

एक गलती की वजह से मुझे नौकरी से निकाला

पापा का मानना है कि फैमिली बिजनेस जॉइन करने से पहले हर व्यक्ति को आम लोगों की तरह काम करना चाहिए, ताकि वह प्रोफेशन की जरूरतों को समझ सके, इसीलिए मैंने पढ़ाई के साथ नौकरी भी की। कोडईकनाल इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई करने के बाद मैं आगे पढ़ने स्विट्जरलैंड चली गई। मैं अपना कोर्स जल्दी खत्म करके समर स्कूल जाती थी और पार्ट टाइम जॉब भी करती थी। मैंने वहां लाइब्रेरी में काम किया, रिसेप्शनिस्ट की नौकरी भी की और सही काम न करने पर डांट भी खूब खाई। जब मैं नाइट शिफ्ट में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थी, तब एक गलती की वजह से मुझे नौकरी से निकाल दिया गया था। एक दिन किसी के फैमिली मेंबर आने वाले थे। रिसेप्शन पर मुझसे संपर्क किया। मैंने गलती से उन्हें गलत लोकेशन बता दी, जिसकी वजह से मुझे नौकरी से निकाल दिया गया था।

21 साल की उम्र में मैंने कंपनी जॉइन की

जब मैं पहले दिन ऑफिस आई तो मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मुझे करना क्या है। पापा मुझे पहले ही समझा चुके थे कि तुम्हें यहां लोगों को नहीं बदलना है, उनके हिसाब से खुद को बदलना है इसलिए काफी समय तक मैं काम सीखती रही, लोगों से काम समझती रही। यह वह दौर था जब मैंने ये जाना और समझा कि हम अकेले आगे नहीं बढ़ सकते, कई लोग मिलकर किसी ब्रांड को आगे बढ़ाते हैं इसलिए हर किसी के काम को अहमियत दी जानी चाहिए। बेवरेज इंडस्ट्री में हमारे प्रोडक्ट्स काफी पसंद किए जा रहे हैं और कंपनी की ग्रोथ लगातार बढ़ रही है। हम बच्चों और बड़ों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अपने प्रोडक्ट्स में नए-नए एक्सपेरिमेंट्स करते रहते हैं और हर बार कुछ नया करने की कोशिश करते हैं।

मेरा पहला फेलियर बतौर एचआर था

अपनी कंपनी में सबसे पहले एचआर के तौर पर काम करना शुरू किया और मैं अपने पहले ही अनुभव में फेल हो गई थी। मैंने पहली बार जिस व्यक्ति को अपनी कंपनी के लिए चुना, लेकिन उसने जॉइन करने से इनकार कर दिया। यह जानकर मुझे बहुत दुख हुआ था, लेकिन तब मैंने ये सीखा कि फेल होना भी आगे बढ़ने की प्रक्रिया है और फेलियर से सीखकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं।

टीम की तरह काम करते हैं

मैं अपनी कंपनी में अकेले निर्णय नहीं लेती, हम एक टीम की तरह काम करते हैं और हर फैसला मिलकर करते हैं। मैं यह जानती हूं कि अगर काम का माहौल पॉजिटिव है तो ही रिजल्ट अच्छा मिलता है। इसलिए टीम वर्क की अहमियत को समझना जरूरी है। मेरी कोशिश ये रहती है कि मैं ऐसे लोगों को अपनी टीम में शामिल करूं जिनसे मैं खुद भी सीख सकूं।

बहनें मेरी ताकत हैं

हम तीन बहनें हैं, लेकिन हमारे पेरेंट्स (मीरा और प्रकाश चौहान) ने कभी ये महसूस नहीं होने दिया कि बेटी हैं, इसलिए हम कोई काम नहीं कर सकतीं। पापा ने हमें सिखाया कि शिक्षा, ज्ञान और आत्मनिर्भरता हर इंसान के लिए जरूरी है, ये तीनों आपके पास हैं तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने हमें कार चलाना सिखाया, तो गाड़ी का टायर बदलना भी सिखाया, ताकि हम कहीं पर अटक न जाएं। पापा ने सिखाया कि नजर आसमान पर रखो, लेकिन पैर जमीन पर होने चाहिए। आज हम तीनों बहनें अपने बिजनेस को बखूबी आगे बढ़ा रही हैं। मेरी दोनों बहनें अलिशा और नाडिया हर फैसले में हमेशा मेरे साथ खड़ी रहती हैं, मां हर कदम पर साथ देती हैं। बेटियों को यदि अवसर दिया जाए, तो दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो वो नहीं कर सकती हैं। आगे बढ़ने के लिए परिवार का साथ बहुत जरूरी है।

रिश्ते में अगर रस नहीं तो रिश्ता बेकार है

हमारे यहां मैरिड लाइफ को समझने और उसमें टाइम इन्वेस्ट करने को जरूरी नहीं समझा जाता है, जरूरी होता है सिर्फ रिश्ते को घसीटना। लेकिन रिश्ता रबरबैंड नहीं होता। वो रिश्ता ही क्या रिश्ता है जो आपकी सोच, आपकी ग्रोथ, आपकी हेल्थ पर गलत असर डाले। रिश्ते जीने के लिए जोड़े जाते हैं, घसीटे जाने के लिए नहीं। शादी को घसीटना आने वाली पीढ़ी पर भी नेगेटिव असर डालता है, इसलिए मैंने मैरिड लाइफ में अलग होने का फैसला किया। इस समय मेरा बेटा और बिजनेस दोनों मेरी प्राथमिकताएं हैं।

मैंने बालों को कभी कलर नहीं किया

मैं हमेशा स्टाइल से ज्यादा कम्फर्ट को अहमियत देती हूं इसलिए मैंने कभी अपने बालों की कलर नहीं किया। फॉर्मल ट्राउजर के साथ स्पोर्ट्स शूज पहन लेती हूं, क्योंकि मुझे कम्फर्ट ज्यादा जरूरी लगता है। डाइट का ख्याल रखना, फिट और हेल्दी रहना हर करियर में सफलता के लिए जरूरी है। हमारे यहां वर्किंग वुमन की इसी बात को इग्नोर करती हैं। मैं प्लानिंग में विश्वास करती हूं और लास्ट मिनट की भागदौड़ से बच जाती हूं। अपना हर काम लिखकर नोट करती हूं, ताकि कोई काम छूट न जाए।

शाम का समय बेटे को देती हूं

मेरा बेटा जहान और मैं शाम को सोने से पहले एक दूसरे को अपने दिनभर की दो अच्छी और दो बुरी बातें शेयर करते हैं। ऐसा करने में हमें बहुत मजा आता है। इसकी सबसे बढ़िया बात यह है कि मुझे अपने बेटे की रूटीन पता रहती है। ऑफिस में चाहे कितनी ही जरूरी मीटिंग चल रही हो, यदि मेरा बेटा फोन करता है, तो मैं उसकी बात जरूर सुनती हूं। मैं बात-बात पर बेटे को फोन नहीं करती, लेकिन उसकी हर बात का ख्याल रखती हूं। सुबह जल्दी उठकर उसके स्कूल जाने तक उसके साथ रहती हूं, ताकि उसके साथ वक्त बिता सकूं।

महिलाएं देश को बहुत आगे ले जा सकती हैं

वुमन मल्टी टास्किंग में एक्सपर्ट होती हैं और एक साथ कई काम कर सकती हैं। इसलिए वो अच्छी मैनेजर साबित होती हैं। अगर देश की आधी आबादी की यदि अवसर मिले, तो महिलाएं दुनिया बदल सकती हैं। देश की कई बेटियां कामयाब बिजनेस वुमन हो सकती हैं, बस उन्हें आगे बढ़ने के रास्ते साफ मिलने चाहिए।

बेस्ट बिजनेस वुमन बनने के 5 मंत्र

शौना चौहान ये मानती हैं कि महिलाएं मल्टी टास्किंग होती हैं इसलिए वो सफल बिजनेस वुमन भी होती हैं, उन्हें अपना कारोबार शुरू करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए। सफल बिजनेस के लिए वह इन पांच बातों को जरूरी मानती हैं:

जब आप कोई बिजनेस शुरू करने का फैसला करें, तो सबसे पहले खुद से यह सवाल करें कि आप ये क्यों करना चाहते हैं। अपने सवाल का ईमानदारी से जवाब दें। यदि आप अपने जवाब से संतुष्ट हैं, तो उस काम को करने में जुट जाइए। दिनरात उसके सपने देखिए। अपने सपने को पूरा करने के रास्ते तलाशिए। लोग आपके फैसले पर हंस सकते हैं, आपका हौसला कम करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन लोगों की नहीं अपने दिल की सुनें। लोग क्या कहेंगे इससे ज्यादा जरूरी है कि आप क्या चाहते हैं। आपके लिए क्या सही है ये आप से बेहतर कोई नहीं जान सकता। अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें, लेकिन अनरियलिस्टिक गोल न सेट करें।

जो भी काम शुरू करें उसे पूरा जरूर करें, उसे बीच में न छोड़ें। बिजनेस के लिए भी वो काम चुनें जिससे आपको खुशी और संतुष्टि मिले। ऐसा काम करके आप कभी थकान महसूस नहीं करेंगे और हमेशा आगे बढ़ने के बारे में सोचेंगे। कोई भी काम शुरू करने से पहले उसकी प्लानिंग कर लें, सारी डिटेल्स लिख लें, प्राथमिकताओं की लिस्ट बना लें, ताकि आपको आपका रोड मैप क्लियर नजर आए। आपको पता रहे कि आपको कौन सा काम कब और कैसे करना है।

फेलियर से डरें नहीं, हर सफल व्यक्ति असफलता से सीखकर ही आगे बढ़ता है। फेलियर आपको यह जानने का मौका देता है कि आप असफल क्यों हुए, इससे आपको आगे बढ़ने में मदद मिलती है।

अच्छे श्रोता बनें, लोगों को सुनें-समझें, उसके बाद किसी नतीजे पर पहुंचें। ऐसा करके आप लोगों के साथ जुड़ते हैं, उनका विश्वास जीत पाते हैं और अच्छे रिश्ते बनाते हैं। कस्टमर्स के साथ अच्छे रिश्ते और सही नेटवर्क ही बिजनेस को आगे बढ़ाता है।

आपका अनुभव सीमित हो सकता है। इसलिए दूसरों से सीखें, क्योंकि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। अपने साथ ऐसे लोगों को जोड़ें जिनसे आप कुछ नया सीख सकें। दिल और दिमाग का संतुलन बनाए रखें, तभी आप सही फैसले ले सकते हैं।