• Hindi News
  • Women
  • This is me
  • Fakkadpan Made Me A Singer, Songs Like 'Kaagaz Ke Do Pankh' Went Viral On Social Media And I Became Everyone's Favorite

ये मैं हूं:फक्कड़पन ने बनाया मुझे सिंगर, 'कागज के दो पंख' जैसे गाने सोशल मीडिया पर हुए वायरल और मैं बन गई सबकी चहेती

14 दिन पहलेलेखक: मीना

‘फक्कड़पन बचपन से मेरी रग-रग में था। जब स्कूल जाती तो रास्ते में पड़ने वाले तालाब और जंगलों के बीच मेरा मन अटक जाता और वहीं कुछ देर बैठकर खुद को समझने की कोशिश करती। इसी वैरागी मिजाज ने मुझे बाउल कम्युनिटी से मिलाया और लोक गायक बनाया। ये शब्द हैं ‘जी टीवी’ के शो सा रे गा मा पा की टॉप 10 फाइन लिस्ट सिंगर अनन्या चक्रवर्ती के।

संगीत के लिए 12वीं क्लास में घर से भागीं थीं अनन्या।
संगीत के लिए 12वीं क्लास में घर से भागीं थीं अनन्या।

भास्कर वुमन से खास बातचीत में 25 साल की अनन्या कहती हैं, मेरा जन्म कोलकाता के बंगाली परिवार में हुआ। पापा बिजनेसमैन थे। हम दो बहनों की जिंदगी मम्मी-पापा के साथ बहुत खुशहाल बीत रही थी कि जब मैं करीब तीसरी क्लास में आई तब फैमिली में एक ऐसी घटना घटी जिसने परिवार का ढांचा ही बदलकर रख दिया।

पापा के बिजनेस पार्टनर ने उन्हें धोखा दिया और वह सारे पैसे लेकर भाग गया। हमारा ईटों का बिजनेस गंगा नदी किनारे था। नदी का बांध टूटा और ईंट भट्ठे का सारा काम बर्बाद हो गया। इसी टेंशन में पापा को ब्रेन स्ट्रोक हो गया और एक तरफ से उनका शरीर पैराइलज्ड हो गए। उस दिन उस पानी ने सिर्फ हमारा बिजनेस ही नहीं हमारी जिंदगियों में भी खारापन भर दिया था।

अनन्या बचपन से वैरागी मन की थीं।
अनन्या बचपन से वैरागी मन की थीं।

अचानक मां के कंधों पर गई जिम्मेदारी

घर की सारी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। हमारी खुशहाल रातें रात के तारे की तरह जागने लगीं। मम्मी ने स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। घर में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और हम दो बहनों पापा व घर सभी को अच्छे संभाला। हम सभी को दुख से उबारने के लिए वो हमें संगीत सिखातीं और हमें गाना गाने को कहतीं। वो म्यूजिक को बतौर थेरेपी सिखातीं। उनकी वजह से हमारा स्ट्रेस दूर हो जाता।

मां को बचपन से गाने का शौक था और वे सिंगर बनना चाहती थीं, लेकिन शादी होने के बाद उनके सपनों की गठरी किचन और हमें संभालने में सिमट गई। मां ने हम दोनों बहनों को संगीत की शिक्षा दिलानी शुरू की।

इंडिपेंडेंट होने के लिए घर से भागी

मैं बचपन से पेंटर बनना चाहती थी क्योंकि घर में सभी पेंटर्स हैं। मां चाहती थीं कि मैं सिंगर बनूं और उसके लिए वो मुझे सुबह चार बजे उठा देतीं और संगीत का रियाज करने को कहतीं। मेरे लिए म्यूजिक टीचर भी लगाया। मां हम सभी की केयर करने में लगी रहतीं लेकिन मैं अपने स्कूल में बच्चों की हैप्पी फैमिली देखती तो मुझे भी मन होता कि हमारी फैमिली भी इतनी हैप्पी ही हो। इसी वक्त मुझमें इंडिपेंडेंट होने का जुनून जागा। 12वीं क्लास के बाद मैं घर से भाग गई। ये भागना भी इसलिए हुआ कि मां पर कब तक निर्भर रहती। खुद को समझने के लिए मैं घर से भागी।

अनन्या की मां ने संभाला पूरा परिवार।
अनन्या की मां ने संभाला पूरा परिवार।

घर से भागकर बाउल कम्युनिटी से मिली

घर से भागकर शांति निकेतन गई। मुझे बाहर की दुनिया देखनी थी। बाहर आकर मैं बाउल कम्युनिटी से मिली। फकीरी यहीं से सीखी। बाउल लोगों के साथ घूमना, फिरना, उनके साथ भिक्षा मंगाना अच्छा लगता। उस समुदाय से मैंने सीखा कि कम संसाधनों में भी जीवन कैसे काटा जाता है। जिंदगी को जीना और समझना उनसे सीखा। साधन दास वैराग्य गुरु जी से मिलने के बाद मैंने बाउल म्यूजिक शुरू किया और साथ ही मेडिटेशन किया। रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी से म्यूजिक में ग्रेजुएशन किया। इस समय तक म्यूजिक मेरे जीवन का अहम हिस्सा बन गया था। मेरे सारे दुख-सुख संगीत से जुड़ गए। मैं जैसा महसूस करती उसे लिरिक्स का रूप देती और फिर गाती।

‘जी’ सा रे गा मा पा से शुरू हुआ म्यूजिक का सफर

विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान ही ‘जी’ बांगला में सा रे गा मा पा के ऑडिशन की जानकारी मिली। मैं वहां गई और टॉप 5 तक पहुंची। वहीं से संगीत की मेरी प्रोफेशनल जर्नी शुरू हुई। अब मुझे वेस्ट बंगाल में लोग जानने लगे। मेरे बहुत सारे दोस्त बन गए। मुझे कई शोज में बुलाया जाने लगा। फाइनेंशियल इंडिपेंडेंट होने लगी। फिर कोविड आ गया और लॉकडाउन लग गया, लेकिन इस बीच भी मैं खाली नहीं बैठी और गाने लिखती रही। यूट्यूब चैनल शुरू किया और गाने डाले। घर में ही म्यूजिक स्टूडियो सेटअप किया। दो साल तक घर में बैठकर काम किया। निर्भया पर बनी फिल्म में भी गाने का मौका मिला।

बाउल कम्युनिटी के साथ मिलकर सीखा बाउल संगीत।
बाउल कम्युनिटी के साथ मिलकर सीखा बाउल संगीत।

‘कागज के दो पंख’ ने किया सोशल मीडिया पर वायरल

म्युजिक प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स मेरी आवाज की खूब तारीफ करते। यहीं से मेरी संगीत की कम्युनिटी और बड़ी होती गई। एक दिन जी टीवी सारे गा मा पा की प्रोडक्शन टीम का फोन आया और अगले सा रे गा मा पा के लिए ऑडिशन दिया। ऑडिशन के दौरान ही मैंने ‘कागज के दो पंख’ गाना गाया। ये गाना इतना वायरल हुआ कि मुझे तमाम मैसेजेस आने लगे। लोगों ने इस गाने पर खूब रिल्स बनाए। मुझे सभी ने टैग किया। डांस के बादशाह टेरेंस लेविस सर ने भी उस गाने पर रील बनाया। बस मुम्बई आने के बाद और सा रे गा मा पा का हिस्सा बनकर लाइफ बदल गई। अब मैं इस शो में टॉप 10 कंटेस्टेंट में से एक हूं।

जो मन में है उसे कर दो, इंतजार मत करो

जिस दिन घर से भागी उस दिन मां को फोन करके बता दिया था कि कुछ दिन मैं बाहर ही रहूंगी। चिंता मत करना। शुरू में मां को मेरी हरकतों से परेशानी होती थी, लेकिन जब उन्होंने देखा कि मैं किसी गलत रास्ते पर नहीं हूं।सही रास्ते पर हूं। अब मैं घर में फाइनेंशियली और इमोशनली दोनों तरह से मदद करती हूं। अब मां को मेरा फक्कड़पन परेशान नहीं करता। मुझे लगता है कि हर लड़की को फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होना चाहिए और जो काम करने का मन है वो तुरंत शुरू करें, इंतजार न करें। जो वक्त अभी है उसी में जीकर आप खुश रह सकते हैं। अगर डरते रहेंगे तो डरते ही रह जाएंगे।