• Hindi News
  • Women
  • This is me
  • Girls Of Red Light Area Used To Come With Cigarette Burn Marks On Their Bodies, My Mission Made Their Children Successful.

ये मैं हूं:देह पर सिगरेट से जले निशान लिए आती थीं रेड लाइट एरिया की लड़कियां, मेरे मिशन ने इनके बच्चों को कामयाब बनाया

6 महीने पहलेलेखक: मीना

दिल्ली का जीबी रोड जिसे आज श्रद्धानंद मार्ग कहा जाता है वैश्यावृत्ति के लिए जाना जाता है। यहां सोशल वर्क करना आसान नहीं, हर रोज नई चुनौती होती है।

कभी कोई हमारे सेंटर में घुस आता था तो कभी कोई क्लाइंट से मार खाई महिला मदद के लिए भागी आती थी। स्थितियां बदतर थीं जो अब धीरे-धीरे सुधरने लगी हैं।

सोसाइटी फॉर पार्टिसिपेटरी इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट (स्पीड) की वाइस प्रेसिडेंट ललिथा एसए नायक वुमन भास्कर से खास बातचीत में कहती हैं कि आज 34 साल से मैं इस एरिया में काम कर रही हूं। मैं कर्नाटक में पली-बढ़ी और वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन की।

पिछले 34 सालों से ललिथा सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों के लिए काम कर रही हैं।
पिछले 34 सालों से ललिथा सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों के लिए काम कर रही हैं।

देवदासी समुदाय के लिए भी काम किया
कर्नाटक में देवदासी समुदाय के साथ काम करने के बाद 1989 में मैं दिल्ली आई। एक दिन बस यूं ही जीबी रोड गई। यहां रेड लाइट एरिया में काम करने वाली महिलाओं की स्थिति समझने की कोशिश की।

महिलाओं का समूह बनाया
इनके साथ एचआईवी की जागरूकता पर काम शुरू किया। 1991 में ‘मशाल शिक्षा केंद्र’ नाम से महिलाओं का ग्रुप बनाया और पांच बच्चों के साथ एक डे केयर सेंटर भी शुरू किया।

मुद्दा मेरे सामने था
ये महिलाएं इस ‘धंधे’ में आना नहीं चाहती थीं, लेकिन मजबूरी में उन्हें यह काम करना पड़ा। उन्हें अपने बच्चों के रहने के लिए जगह और खुद के लिए सम्मानजक जीवन चाहिए था, मैंने इन्हीं मुद्दों पर काम शुरू किया।

ललिथा कहती हैं कि रेड लाइट एरिया में काम करना आसान नहीं है। यहां हर रोज नई चुनौतियां होती हैं।
ललिथा कहती हैं कि रेड लाइट एरिया में काम करना आसान नहीं है। यहां हर रोज नई चुनौतियां होती हैं।

जब मिलीं मारने की धमकियां
काम करने के दौरान मैंने कई दुश्मन भी बनाए। मुझे मारने तक की धमकियां मिलीं। कभी कोई चाकू लेकर भी मेरे सामने आ खड़ा हुआ। कई बार कोई सेक्स वर्कर ऐसी हालत में होती थी कि हमारी भी रूह कांप जाती। कोई मार खाई, सिगरेट से जली आती और रहने को जगह मांगती तो वह भी व्यवस्था करनी पड़ती।

18 सालों से संस्था से जुड़ी हूं
मैं 2004 से स्पीड संस्था से जुड़ी हूं। आज गर्वनिंग बॉडी का भी हिस्सा हूं। यह संस्था हाशिए पर खड़े समाज के लिए काम करती है। इस संस्था के साथ जुड़कर मैंने जीबी रोड में वेश्यावृत्ति में लगी महिलाओं के बच्चों के लिए डे केयर सेंटर खोला।

आज बड़े पदों पर हैं बच्चे
उस समय पांच बच्चे डे केयर सेंटर में आए थे। आज दो हजार से ऊपर बच्चे यहां से निकल कर बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं। ये बच्चे टीचर, डॉक्टर, वेब डिजाइनर और इंजीनियर हैं। अब ऐसे पांच सेंटर हैं।

ललिथा कहती हैं कि हर इंसान को रेड लाइट एरिया के लोगों का सम्मान करना चाहिए।
ललिथा कहती हैं कि हर इंसान को रेड लाइट एरिया के लोगों का सम्मान करना चाहिए।

सेक्स वर्कर्स को मिलीं सुविधाएं
सेक्स वर्कर्स को पेंशन मिले इसके लिए भी काम हुआ है। कुछ महिलाओं को पेंशन मिलने भी लगी है। उनके आधार, पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक में खाता खोलना जैसे मुद्दों पर भी काम कर रहे हैं।

मजबूरी ही महिला को इस रास्ते पर ले आती है
रेड लाइट एरिया में भी इंसान बसते हैं, हमें उन्हें सम्मान से देखना होगा। कोई भी महिला खुशी से इस रास्ते पर नहीं आती। हमारी लड़ाई सिर्फ मान-सम्मान और इज्जत की है। मैं तो खुलकर कहती हूं कि मेरा ये रास्ता है, इस सड़क से रोज गुजरती हूं, जो चाहे कर लो।