पिता-भाई को खोया, मां भी दवाओं के सहारे:मैंने जिंदगी से नहीं मानी हार, आज बैंकर होने के साथ मिसेज वर्ल्ड इंटरनेशनल-2022 की फाइनलिस्ट

3 महीने पहलेलेखक: मीना

‘जन्म देने वाले पिता, सर पर पिता समान बड़े भैया का हाथ हमेशा-हमेशा के लिए न रहने का दुख वही समझ सकता है जो किसी अपने के खोने के दुख से गुजरा हो।’

वुमन भास्कर से खास बातचीत में ब्यूटी पेजेंट मिसेज वर्ल्ड इंटरनेशनल-2022 में फाइनलिस्ट और बैंकर संगीता कुमारी कहती हैं कि दो भाइयों की प्यारी, चुलबुली और समझदार बहन थी, लेकिन वक्त ने समय से पहले बड़ा और गंभीर बना दिया।

पढ़ाई के अलावा भी बहुत टैलेंट थे
मुझे बचपन से पढ़ना और कल्चरल एक्टिविटी में हिस्सा लेना अच्छा लगता था। जन्म हरियाणा में हुआ, लेकिन चूंकि पापा फौज में थे तो छठी क्लास तक अलग-अलग राज्यों में रहकर पढ़ाई की।

पापा की लास्ट पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में थी। इसके बाद हमारी फैमिली 17 साल तेलंगाना में रही। फौज से रिटायरमेंट के बाद पापा को कोल माइन्स में ही सरकारी जॉब मिल गई। मैंने तेलुगू सीखी और आगे की सारी पढ़ाई यहीं से की।

कॉलेज टॉपर और अखबारों में नाम
जब कॉलेज के फर्स्ट ईयर में आई तो कॉलेज टॉपर कहलाई। कॉलेज स्टूडेंट्स को लगा कि मैं सिर्फ पढ़ाकू किस्म की लड़की हूं। इसके बाद मैंने फाइनल ईयर में कॉलेज प्रोग्राम में ‘क्रेजी किया रे’ डांस किया और लोकल न्यूजपेपर भी छपी। तब लोगों को लगा कि ‘मैं फायर है।’

संगीता ब्यूटी पेजेंट मिसेज वर्ल्ड इंटरनेशनल-2022 में फाइनलिस्ट हैं।
संगीता ब्यूटी पेजेंट मिसेज वर्ल्ड इंटरनेशनल-2022 में फाइनलिस्ट हैं।

ग्रेजुएशन पूरी होने के बाद तय किया गया कि परिवार हरियाणा शिफ्ट होगा, इसलिए मुझे वहीं से आगे की पढ़ाई करनी चाहिए। मैं आगे की पढ़ाई के लिए हरियाणा में ही कैट की कोचिंग के लिए चली गई।

जब पापा को आया हार्ट अटैक
तभी पता चला कि पापा को माइनर हार्ट अटैक आया है। मैं सब कुछ छोड़कर वापस तेलंगाना पापा-मम्मी के पास आ गई। पापा को इतना दर्द था, लेकिन मुझे यही समझा रहे थे कि बेटा मेरे पास रहकर टाइम वेस्ट मत करो। अपने पैरों पर खड़ी हो और हैदराबाद नौकरी करने चली जाओ।

पापा की बातें सुनकर मैं रो रही थी कि वे मुझे खुद से दूर भेजना चाहते हैं। खैर…अनमने से मन से हैदराबाद निकल गई। एक आईटी कंपनी में नौकरी भी मिल गई। पहली नौकरी मिलने के बाद मैंने एमबीए में दाखिला लिया और छोटे भाई का दाखिला भी ग्रेजुएशन में कराया।

पापा नहीं रहे…
नौकरी करते और पढ़ाई करते चार साल निकल गए। अच्छे दिन आने ही वाले थे कि अचानक एक दिन घर से फोन आया कि बेटा घर आ जाओ। मेरे शरीर पर रोंगटे खड़े हो गए। मुझे लग रहा था कि कुछ तो अनहोनी हो गई है।

घर आई तो पता चला कि पापा नहीं रहे। बड़े भैया इमोशनली बहुत वीक थे और छोटा तो छोटा था। सबको संभालते-संभालते मेरे आंसू किस कोने में जा छुपे थे, मालूम नहीं। पापा का दाह संस्कार होने के बाद जब आर्मी के ऑफिसर्स घर आए तो मैं खुद को रोने से रोक नहीं पाई। मन में ख्याल आ रहा था कि ये मेरे पापा की ड्यूटी से आए हैं।

संगीता कहती हैं कि उन्होंने परिवार में पिता और भाई को खोया, लेकिन जीने का हौंसला नहीं छोड़ा।
संगीता कहती हैं कि उन्होंने परिवार में पिता और भाई को खोया, लेकिन जीने का हौंसला नहीं छोड़ा।

पापा की शान थी मैं
ऑफिसर्स बता रहे थे कि पापा मुझे कितना मानते थे। उनके लिए मैं उनकी शान थी। पापा की ये बातें ऑफिसर्स से सुनकर मैं और फूटकर रोने लगी। बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला। परिवार को संभाला।

बड़े भैया का साया भी सिर से उठ गया
हमारा पूरा परिवार हरियाणा आ गया। मेरी भी शादी हो गई। बड़े भैया को पापा की नौकरी मिल गई थी और उनके लिए भी रिश्ता देखा जा रहा था। इस समय मैं चार महीने की प्रेग्नेंट थी कि तभी एक और बुरी खबर मिली कि बड़े भैया का एक्सीडेंट हो गया है और वे अब दुनिया में नहीं रहे।

पापा को गए डेढ़ साल ही हुआ था कि अब भैया का चला जाना, ऐसा लग रहा था कि जिंदगी और कितना रुलाएगी। मेरा हाल जो था सो था, लेकिन मां का इससे ज्यादा बुरा हाल। भैया जाने के बाद ससुराल और मायका दोनों संभाला।

ब्यूटी पेजेंट की जानकारी
जब मेरी बेटी एक साल की हुई तब मुझे आईसीआईसीआई बैंक में नौकरी मिल गई। दो साल के गैप के बाद फिर से नौकरी शुरू की। तीन साल यहां काम किया। इसी बीच इसी साल एक ब्यूटी पेजेंट के बारे में जानकारी मिली।

तब मां को बता रही थी कि मां देखो आजकल शादीशुदा महिलाओं के लिए भी कितने मौके शुरू हो गए। मां ने कहा कि तुम क्यों नहीं इस ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेती। इतनी टैलेंटेड हो, पढ़ाई से लेकर कल्चरल एक्टिविटी में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है तो तुम भी इस ब्यूटी पेजेंट में पार्टिसिपेट करो।

…और बन गई फाइनलिस्ट
मां से मिले हौसले के बाद मैंने मिसेज वर्ल्ड इंटरनेशनल 2022 में पार्टिसिपेट किया। मुंबई गई और पता चला कि मैं फाइनलिस्ट की लिस्ट में हूं। उस दिन तो मुझे भरोसा ही नहीं हो रहा था कि मैंने सफलता की एक नई सीढ़ी को चढ़ लिया है।

खुशियों ने आंगन में दस्तक दी ही थी कि इसी बीच पता चला कि मां का हार्ट ठीक तरह से काम नहीं काम कर रहा है। डॉक्टर्स ने कह दिया कि आपकी मां छह महीने ही सरवाइव करेंगी।

संगीता ने मुश्किलों को पार पाकर खुद के लिए रास्ते बनाए। अब वे कहती हैं कि बच्चों को माता-पिता का कहा जरूर मानना चाहिए।
संगीता ने मुश्किलों को पार पाकर खुद के लिए रास्ते बनाए। अब वे कहती हैं कि बच्चों को माता-पिता का कहा जरूर मानना चाहिए।

मां की भी हालत बिगड़ी
ये सुनने के बाद लगा कि भगवान मेरे साथ ही इतना क्रूर क्यों हो रहा है। पहले पिता, फिर भाई और अब मां को भी मुझसे छीन लेगा। मैंने किसी का क्या बुरा किया है, जो मुझे किसी का प्यार ठीक से नहीं मिल पा रहा।

अभी मां दवाओं के सहारे हैं। पर डॉक्टर्स का कहना है कि उनकी हालत में पहले से थोड़ा सुधार है। मुझे अभी पिछले साल ही एचडीएफसी बैंक में ऑपरेशनल मैनेजर की नौकरी मिली है। मेरी कोशिश है कि जबतक मां हमारे साथ हैं, मैं उन्हें दुनिया की सारी खुशियां दूं। मेरी छोटी सी बेटी अनाया अपनी नानी के पास रहना ही पसंद करती है। उसकी वजह से मां का भी मन लग जाता है।

मां इनती मुसीबत में हैं लेकिन चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है। उन्हें देखकर लगता है कि मां हो तो ऐसी। मैं मां के सहारे ही यहां तक पहुंची हूं। फैमिली मेरी बैकबोन है।

माता-पिता का कहा मानें
अब मैं हर बच्चे से यही कहना चाहूंगी कि पेरेंट्स बच्चों के लिए बहुत कुछ करते हैं। हमें नहीं मालूम कि माता-पिता ने हमारे लिए कितनी कुर्बानियां दी होंगी, वे कभी हमें बताते भी नहीं, इसलिए कभी माता-पिता का कहा मत डालो। वे सुप्रीम पावर हैं।

मेरे जीवन में इतने उतार-चढ़ाव आए लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। खुद पर भरोसा किया। जो हो गया उसकी तरफ मुड़कर नहीं देखा। वर्तमान पर फोकस किया और भविष्य को बेहतर बनाया।

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