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ये मैं हूं:CM योगी को बस में घुमाने वाली गोरखपुर की पहली लेडी ड्राइवर, गाड़ी के साइज के हिसाब से बढ़ जाता है मेरा हौसला

15 दिन पहलेलेखक: मीना

‘मेरे गांव में अगर कोई लड़की सूट छोड़कर जींस पहन ले तो सबकी आंखों की ऐसी किरकिरी बन जाती कि जैसे उसने न जाने कौन से कानून का उल्लंघन कर दिया हो, पर मैं तो बड़े-बड़े ट्रक सड़कों पर दौड़ा रही थी और ऐसे में दुनिया के सात अजूबों के बाद आठवां मैं उनके लिए होती। ये शब्द हैं गोरखपुर की पहली महिला ड्राइवर पूजा प्रजापति के। पूजा चर्चा में तब आईं जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में 15 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई। इन बसों के ट्रायल रन में से एक बस को पूजा ने ही चलाया, जिसमें योगी आदित्यनाथ ने सवारी की। भास्कर वुमन से खास बातचीत में पूजा कहती हैं, ‘ड्राइवरी मैंने किसी मजबूरी के चलते नहीं बल्कि लड़कियों को यह बताने के लिए शुरू की कि वे जो चाहें वह कर सकती हैं। वे लड़कों से किसी भी काम में कम नहीं हैं। ड्राइविंग की शुरुआत कुछ ऐसे हुई कि मुझे स्कूल छोड़ने के लिए पापा ने घर में एक ड्राइवर रखा था, लेकिन वो आये दिन बहाने बनाता और छुट्टी पर चला जाता। मुझे स्कूल लेट होना या न जाना बिल्कुल पसंद नहीं था। फिर पापा ने मुझे ड्राइविंग सिखाई ताकि मैं किसी पर निर्भर न रहूं। सबसे पहली बार 13 साल की उम्र में गाड़ी का स्टीयरिंग संभाला। इसी के साथ छोटी गाड़ियां जैसे महिंद्रा का बोलेरो, स्कॉर्पियो, मारूति जेन, वैगनार सब चलानी शुरू कर दीं।

पूजा ने बस चलाना इसलिए नहीं सीखा कि उन्हें इस फील्ड में करिअर बनाना था बल्कि उन्हें समाज को यह बताना था कि लड़कियां किसी भी फील्ड में जाएं वहां अपनी मेहनत दिखा कर नाम कमा ही लेती हैं।
पूजा ने बस चलाना इसलिए नहीं सीखा कि उन्हें इस फील्ड में करिअर बनाना था बल्कि उन्हें समाज को यह बताना था कि लड़कियां किसी भी फील्ड में जाएं वहां अपनी मेहनत दिखा कर नाम कमा ही लेती हैं।

छोटी गाड़ियों से बड़ी गाड़ियों को चलाना सीखा
पापा का इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप है। घर में पहले ही सब गाड़ियां चलाते हैं तो मुझे पापा ने ही गाड़ियों की टेक्निकल नॉलेज दी। टेक्निकल नॉलेज मिलने के बाद मैंने इंडियन ऑयल के टैंकर, जेसीबी, ट्रैक्टर, फाइटर गाड़ियां, ग्रेडर, बुल्डोजर, मिलिट्री की गाड़ियां सब चलाना शुरू कर दीं। अब ढाई सौ से तीन सौ पहिए तक की गाड़ियों को चला लेती हूं। अब मुझे लगता है कि पृथ्वी पर जितनी भी पहिए की गाड़ियां हैं, पानी का जहाज और रेलगाड़ी को छोड़कर, सभी चला लेती हूं।
देश सेवा के लिए शुरू की ड्राइविंग
मुझे पापा की वो सीख याद है जब उन्होंने कहा था कि बेटा जिंदगी सभी को एक बार मिलती है, इसका सदुपयोग करो और लड़कियों को जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करो। मैंने जबसे होश संभाला तबसे मेरा उद्देश्य यही रहा कि मुझे देश सेवा करनी है और अपना कतरा-कतरा इसी देश को समर्पित करना है। इसी वजह से मैंने हर वो काम सीखा जिससे देश की सेवा कर सकूं।
कॉलेज के दौरान जब मैंने एनसीसी जॉइन की तो फायरिंग, मुश्किल परिस्थितियों में खुद को जिंदा रखने की ट्रेनिंग भी ली। एक सैनिक में देश को बचाने के लिए जो खूबियां होनी चाहिए वो सब मैंने सीख लीं, लेकिन देश सेवा के लिए इतना ही जरूरी नहीं था बल्कि देश सेवा में आर्मी का ट्रक, टैंकर, तोप सब आते हैं फिर मैंने इन भारी वाहनों को चलाना सीखा। अब जब भी देश को मेरी जरूरत पड़ेगी तो मैं हर तरह से उसकी सेवा के लिए तैयार हूं।

पूजा स्कूल के दिनों से ही स्पोर्ट में एक्टिव थीं।
पूजा स्कूल के दिनों से ही स्पोर्ट में एक्टिव थीं।

राजपथ पर कर चुकी हूं परेड़
पिछले नौ सालों से हैवी व्हीकल को ड्राइव कर रही हूं। हैवी लाइसेंस बनवाया और गाड़ियों की रेस में जाने तैयारी करने लगी। मैं पांच भाई बहनों में सबसे छोटी हूं। घर में सबसे छोटी होने के कारण मुझे लगता है कि मुझे हर काम आना चाहिए। मैं किसी पर निर्भर न रहूं। स्वतंत्र होने की सीख पापा से बचपन से मिली। मुझे बचपन से ही कुछ अलग करने का जुनून था। स्कूल के समय से ही स्पोर्ट्स में आगे रही। ग्रेजुएशन के दौरान 26 जनवरी 2020 में राजपथ पर परेड़ करने का भी मौका मिला।
इस परेड़ की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से भी सम्मानित हूं। हॉकी की नेशनल प्लेयर हूं। शूटिंग करती हूंं, गोल्फ खेलती हूं, तैराक हूं और रनिंग में भी दिलचस्पी है। स्पोर्ट्स मेरी रग-रग में बसा है। फिलहाल पॉलिटिकल साइंस में एमए कर रही हूं।
CM योगी आदित्यनाथ को सवारी कराने के बाद आई चर्चा में
मैं चर्चा में तब आई जब इलेक्ट्रिक बस चलाने का मुझे मिला और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरी बस में सवारी की। इसके बाद से ही लोग मुझे गोरखपुर की पहली महिला ड्राइवर कहने लगे। जब मैं गाड़ी चलाती तो लोग मुझे बड़ी हैरानी से देखते। कुछ अच्छे कमेंट्स करते और कुछ नेगेटिव। शुरू में गाड़ी चलाते समय डर लगता था लेकिन अब अपने डर पर लगाम लगी ली है।

इलेक्ट्रिक सब भी चला लेती हैं।
इलेक्ट्रिक सब भी चला लेती हैं।

भविष्य में बिना शुल्क के लड़कियों को सिखाना चाहती हूं ड्राइविंग
गोरखपुर में जब ड्राइवरों की भर्तियां निकलीं तब मैंने भी वहां फॉर्म भरा और अधिकारियों को प्रूव करके दिखाना पड़ा कि एक लड़की भी आत्मविश्वास के साथ बस चला सकती है। इसी के साथ मैं इलेक्ट्रिक बस चलाने वाली पहली महिला ड्राइवर बन गई। जिस दिन मुख्यमंत्री जी ने मेरे साथ मेरी बस में यात्रा की तो पल ही अनोखा था। उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछा और 15 मिनट तक मेरी बस हमारे साथ थे। उन्होंने मेरी तरक्की की कामना की। आगे मेरी यही इच्छा है कि जरूरतमंद लड़कियों को बिना किसी शुल्क के ड्राइविंग सिखाऊं।
लड़कियां किसी से कम नहीं हैं
अब मैं सभी लड़कियों को यही कहूंगी कि जरूरी नहीं है कि आप हमेशा टीचर बनें बल्कि ड्राइविंग भी उनके लिए अच्छा करिअर ऑप्शन है। आप किसी भी काम में कम नहीं हैं। आप जहाज से लेकर आसमान तक भी करिअर के पंख फैला सकती हैं। बस खुद को किसी सांचे में बांधकर न रखें। मुझे जहां मौका मिला मैंने उस काम को सीखा। मैं खेल को भी खेलती गई और जहां भी अपनी सेवा देने का मौका मिला वो भी किया।