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ये मैं हूं:काश 20 मिनट वहां रुक जाती तो मां फांसी नहीं लगातीं, अब मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन के लिए लड़ रही लड़ाई

8 महीने पहलेलेखक: मीना

मैं कल्याणी, 31 साल की हूं। चार साल की मेरी एक बेटी है और पति डॉक्टर हैं। बचपन से सिनेमा से जुड़ी रही तो शूटिंग में व्यस्त रही। अब तक करीब 300 विज्ञापन कर चुकी हूं।

चेन्नई में पली-बढ़ी कल्याणी वुमन भास्कर से खास बातचीत में कहती हैं कि प्रभु देवा से लेकर कई अन्य बड़े स्टार के साथ काम किया है। साउथ के सिनेमा में सात साल की उम्र से लेकर 22 साल तक काम किया। फिर शादी हो गई। काम में इतना बिजी रही कि दोस्ती या प्यार करने की फुरसत ही नहीं मिली।

मां ही मेरी दुनिया थीं
मां ही मेरी दुनिया थीं। वो क्लासिकल डांसर थीं। उन्हें एक्टिंग, डांसिंग, म्यूजिक सब पसंद था, लेकिन पापा को नहीं। मां-पापा के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं थे। घर में अक्सर वायलेंस होता।

पापा के वायलेंस से मां परेशान थीं, तो मैंने बचपन से तय कर लिया था कि मां को खुश रखना है, उन्हें सारी खुशियां देनी हैं। इस वजह से मैंने सात साल की उम्र से ही बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट के काम शुरू कर दिया।

कल्याणी की मां एक क्लासिकल डांसर थीं। उन्होंने अपनी डायरी में लिखा कि वे लंबे समय से दुखी थीं।
कल्याणी की मां एक क्लासिकल डांसर थीं। उन्होंने अपनी डायरी में लिखा कि वे लंबे समय से दुखी थीं।

मां से मेरे रिश्ते इतने अच्छे थे कि जिम, योग करने से लेकर मूवी तक सब एक-साथ करते थे। यहां तक कि एक-दूसरे के कपड़े भी पहन लेते थे। शादी के बाद मैं मां को छोड़ना चाहती थी इसलिए हसबैंड से बात की और हम बैंग्लोर शिफ्ट नहीं हुए।

सबकुछ नॉर्मल चल रहा था
चेन्नई में ही मां के घर के आसपास ही रहने लगे। सबकुछ अच्छा चल रहा था। 23 दिसबंर, 2014 को मेरे पापा अपने काम की वजह से बैंग्लोर गए। मेरे पति, मां और मैंने रात को अच्छे से डिनर किया। रात को शाहरुख की एक फिल्म देखी। सबकुछ बहुत नॉर्मल था।

सुबह मैं मां के पास वापस गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें सिर दर्द है क्योंकि उन्हें माइग्रेन की प्रॉब्लम थी। मैंने उन्हें नींबू पानी दिया और कहा कि ‘चलो जिम चलते हैं, सब ठीक हो जाएगा।’

ये बोलकर मैं घर चली गई, क्योंकि मुझे लिए तैयार होना था। करीब 20 मिनट बाद वापस लौटी। दरवाजा खटखटाया किसी ने नहीं खोला। दो कुत्ते जो हमेशा भौंकते थे वो भी नहीं भौकें। मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ हो गई है। मैंने तुरंत अपने पति को फोन किया।

कल्याणी ने बचपन से सिनेमा के लिए काम किया और आज भी उस इंडस्ट्री में काम कर रही हैं।
कल्याणी ने बचपन से सिनेमा के लिए काम किया और आज भी उस इंडस्ट्री में काम कर रही हैं।

मां ने फांसी लगा ली थी
दरवाजा खटखटाती रही किसी ने नहीं खोला। वॉचमैन को बुलाया वो भी नहीं आया। किसी भी तरह मैंने ऊपर के ताले को तोड़ा और कमरे में मां लटकी मिलीं।

मेरी मां की डायरी से पता चला कि वह लंबे समय से दुखी थीं। काश उन्होंने हममें से किसी के साथ अपना दुःख साझा किया होता! इस घटना के बाद मैं इतनी टूट गई कि खुद डिप्रेशन का शिकार हो गई।

मां के बिना मैं दुनिया की कल्पना ही नहीं कर सकती थी। वो कल्याणी जो हंसती-खेलती थी। काम में बिजी रहती थी। अब बिस्तर पर एक कमरे में सिमट गई। डे टू डे की रोजाना की एक्टिविटीज भी मैं नहीं कर रही थी। बस लेटी रहती। किसी से बात नहीं करती। जिंदगी जीने की कोई वजह ही नहीं मिल रही थी।

मैंने दो बार मरने की सोची
मैंने दो बार सुसाइड करने की कोशिश की। इस कोशिश से पहले मेंटल हेल्थ के लिए काम करने वाली स्थानीय हेल्पलाइन को भी कॉल किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। हसबैंड ने मुझे यह कदम उठाने से बचा लिया।

कल्याणी की कोशिश है कि वे मेंटल हेल्थ पर जागरुकता फैलाएं।
कल्याणी की कोशिश है कि वे मेंटल हेल्थ पर जागरुकता फैलाएं।

इसी वक्त तय कर लिया कि मुझे अपनी मां की तरह बहादुर बनना है। मुझे हारी हुई बेटी नहीं बनना। मुझे कुछ ऐसा करना था जिससे लोग कहें कि मैं अपनी बेटी की मां हूं।

मैंने इंस्टाग्राम पर अपने सुसाइड अटेम्ट और अपनी मां की सुसाइड के बारे में बात की। तब कई और लोगों ने अपने अनुभव बताए। उस वक्त लगा कि मैं अकेली नहीं हूं जो मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम से जुझ रही हूं, बल्कि मेरे जैसे कई लोग हैं। फिर मैंने दूसरों की मदद करने की ठानी।

ओटीटी प्लेटफॉर्म दें साथ
अभी मैंने एक पिटीशन डाली है, जहां मैं मांग कर रही हूं कि राष्ट्रीय मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन, ‘किरण’ के बारे में सभी को पता हो। नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, ऐमजान प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म दुनिया भर में लाखों दर्शकों के जीवन का हिस्सा हैं। एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 2023 तक इन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 50 करोड़ सब्स्क्राइबर होंगे, जिसमें मुख्य रूप से 15-35 वर्ष आयु वर्ग के युवा होंगे।

मैं चाहती हूं कि 24x7 निःशुल्क टेली काउंसलिंग मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन सभी भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित हों। ताकि सभी दर्शकों को पता रहे कि जब उन्हें मदद की जरूरत हो तो उन्हें वो मदद कहां मिल सकती है।