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स्मार्ट मोटापा:मोटी, बेबी एलिफेंट या टेडी बियर जैसे शब्दों से फर्क नहीं पड़ता, खूब सज-संवकर हैप्पी लाइफ जीती हूं

4 दिन पहलेलेखक: मीना

क्या आपने कभी किसी मोटे इंसान को मोटापे का उत्सव मनाते देखा है? क्या उसे फैशन को एंजॉय करते देखा है? फैशन मतलब साड़ी या जींस नहीं। मेरे लिए फैशन मतलब लो वेस्ट बिकनी या हाई वेस्ट बिकनी। पेट बाकी बॉडी पार्ट्स के मुकाबले ज्यादा बाहर निकला है। पेट पर स्ट्रेच मार्क्स, पिगमेंटेशन, लिपोमा, सेल्युलाइट हैं, लेकिन फिर भी मस्त, आवारा, अलबेली मतलब ‘टॉप ऑफ द वर्ल्ड’ रहती हूं। मेरे मस्तमौला होने पर बहुत से लोगों को परेशानी भी होती है, वे समझते हैं कि इतना मोटा इंसान इतना खुश कैसे रह सकता है। पर जी मैं रहती हूं। इंस्टाग्राम पर खूब वीडियोज बनाती हूं। नाचती हूं, गाती हूं, रंगों से खुद को सजाती हूं और लोगों को बॉडी शेमिंग से बाहर निकलने के लिए मोटिवेट करती हूं। आत्मविश्वास से लबालब ये शब्द हैं इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर तन्वी गीथा रविशंकर के हैं।

तन्वी गीथा रविशंकर
तन्वी गीथा रविशंकर

भास्कर वुमन से बातचीत में तन्वी कहती हैं, ‘मोटे लोगों का नामकरण दो बार होता है, एक वो जो पैदा होने के बाद ‘पंडित’ करता है। दूसरा सोशलाइजेशन के दौर में सोसाइटी करती है। मैं मुंबई में पली-बढ़ी, जहां ग्लैमर मतलब जीरो साइज फिगर! मेरा शरीर इस डेफिनेशन में फिट नहीं बैठता। लेकिन मैं प्लस साइज डिजिटल कंटेंट क्रियेटर हूं। मोटू, भैंस, गैंडी, हाथी का बच्चा, टेडिबीयर जैसे नामों से मुझे कभी दिक्कत नहीं। अब लोगों को यह भी परेशानी है कि मैं ऐसे नामों को मैं क्यूट क्यों मानती हूं। आप खुश हैं तब भी सोसाइटी को दिक्कत है, आप दुखियारी हैं, तब भी। तो अब तक इतना समझ आ गया है कि करो वही जो आपका मन करे।

‘टैलेंट पर किया फोकस, लोगों की बातों पर नहीं’
मेरे इस तरह के एटिट्यूड की वजह मेरी परवरिश है। जब पैदा हुई तो नॉर्मल बच्चों से ज्यादा वजन था। सब बड़े प्यार से गोदी में लेते। मोटे-मोटे गालों के साथ खेलते। मैं गोलू-मोलू सी दिखती लेकिन आलसी नहीं। बचपन से क्लासिकल डांस का शौक था। क्लासिकल डांस के जितने ‘तोड़े’, ‘चक्कर’, ‘ताल’ होते हैं, सब अच्छे से परफॉर्म करती। यहां तक कि मेरी टीचर मुझे बताती कि मैं बाकी बच्चियों से ज्यादा बेहतर डांस करती हूं। मैं बचपन से काम में रमने वाली और कॉन्फिडेंट बच्ची रही। मुझे मूवीज भी ऐसी पसंद थीं जिनमें स्ट्रांग फीमेल कैरेक्टर हो, जैसे खून भरी मांग और अंजाम। अबला महिला का रोल मुझे हमेशा ऊबाऊ लगा। पेरेंट्स ने सिखाया, ‘अपने टैलेंट पर फोकस करो।’ यही शब्द मेरे कॉन्फिडेंस बूस्टर बने। फैशन ट्रेंड्स को फॉलो करना मुझे 12 साल की उम्र से पसंद था। क्योंकि मैं हमेशा से बिग साइज बॉडी रही, तो अपने पसंद के कपड़े नहीं मिल पाते थे। पर फैशन सिर्फ पतली लड़कियों के लिए थोड़े ही है। थोड़ी जिद्दी भी थी, इसलिए अपने पसंद के कपड़े बाजार से नहीं मिलते तो दर्जी से सिलवा लेती।

खाना है इनके लिए प्रसाद
खाना है इनके लिए प्रसाद

‘खाने की नहीं अपनाई प्रिसक्राइब्ड लिस्ट’
मैंने अपने आसपास मोटे लोगों पर ये हिदायतें सुनी हैं, एक्सरसाइज करो, शादी नहीं होगी, चिप्स मत खाओ, खाना मत खाओ...ऐसी कोई भी प्रिसक्राइब्ड लिस्ट मैंने नहीं अपनाई और न ही किसी को खुद को कंट्रोल करने का मौका दिया। मेरे लिए भोजन प्रसाद जैसा रहा। मेरी मम्मी की साइड में सभी स्लिम हैं, लेकिन पापा की साइड में लोग पेट से ज्यादा मोटे हैं, तो मैं भी उन्हीं पर गई हूं। किसी बीमारी की वजह से मोटी नहीं हुई हूं। मोटे लोगों को देखकर लोग ये माल कर लेते हैं कि ये आलसी होगा, एक्सरसाइज नहीं करता होगा, खाना बहुत खाता होगा, लेकिन ये सच नहीं है। दोस्तों के साथ कभी घूमने जाओ तो ज्यादा खाना ऑर्डर होने पर कहा जाता है, ज्यादा खाना तन्वी के लिए है। ये सारे मिथ हैं। किसी-किसी की बॉडी होती है कि वे कम खाते हैं, फिर भी मोटे होते हैं। मोटापा हमेशा बीमारी नहीं होता। 2014 में एक एक्सीडेंट की वजह से पार्शली पैरालाइज्ड हो गई, लेकिन आज भी पतले लोगों से ज्यादा एक्टिव हूं और हेल्दी लाइफ को जीती हूं।

इंस्टाग्राम पर रील्स बनाकर लोगों को करती हैं मोटिवेट
इंस्टाग्राम पर रील्स बनाकर लोगों को करती हैं मोटिवेट

इंस्टाग्राम पर मचाई धूम
स्कूल लेकर कॉलेज तक कभी खुद के शरीर की वजह से शर्मिंदा नहीं हुई। मोटा होना कोई पाप नहीं है। जब इंस्टाग्राम पर आई तो यहां और धूम मचाई। होम ग्रोन इंडियन ब्रांड्स को प्रमोट करना शुरू किया। जींस, साड़ी, बिकनी, शॉर्ट्स सभी तरह की ड्रेसिज पहनती हूं। मैं और मेरी दुनिया रंगों से भरी है। लिप्सटिक, आई लाइनर, फाउंडेशन, कंसीलर, ड्रेस से मैचिंग जूती और ज्वेलरी पहनकर एकदम ‘छम्मकछल्लो’ दिखती हूं। इंस्टाग्राम पर मेरे काम को लोगों ने बहुत सराहा। ‘इंस्टा’ फैमिली का ही एक किस्सा याद है। जिस दिन मैंने मिड वेस्ट बिकनी पहनी, वो दिन मेरा सबसे अच्छा और एंजॉयेबल डे था। स्वीमिंग करना मुझे बहुत पसंद है, लेकिन मैंने भी मेंटल बाउंड्रीज बना रखी थीं। ट्रोलर्स का डर था कि अगर बिकनी पहनकर पोस्ट डालूंगी तो कहीं उनकी बांछें न खिल जाएं। बड़ा सा पेट देखकर मुंह खुला का खुला न रह जाए? पर बिकनी पहनी और हस्बैंड के साथ पर्सनल रिसॉर्ट पर गई। उसके बाद दोस्तों के साथ पूल में गई। वहां जाकर देखा कि लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने क्या पहना है। ये सब हमारे दिमाग की उपज होती है। बिकनी न पहनने के पीछे ये वजह भी थी कि मेरे साइज की बिकनी नहीं मिल रही थी, फिर 2016 में एक ब्रांड मिला, जिसने प्लस साइज बिकनी बनाई।

बिकनी पहनकर डाली पोस्ट तो महिलाएं हुईं मोटिवेट
मेरे इस पोस्ट के बाद कई लोगों के मेसेज आए। एक महिला बताती हैं ‘मैंने 42 साल की उम्र में पहली बार बिकनी पहन है। इसी तरह 26 साल की लड़की कहती है, अपने मोटापे की वजह से मैं जींस तक नहीं पहन पा रही थी। शर्म लगती थी, लेकिन आपको देख कर क्या कहेंगे। आज जींस पहन पा रही हूं।’ जब लोगों के ऐसे कमेंट्स मिलते हैं, तो अपना काम और जिम्मेदारी भरा लगता है। आजकल पर मैं इंस्टाग्राम पर इंडियन ब्रैंड्स को प्रमोट कर रही हूं।

अब जिंदगी गुलजार है
अब जिंदगी गुलजार है

मोटापे का उत्सव मनाएं
आप मोटे हैं तो उसे शर्मिंदगी न समझें बल्कि ये समझें कि आपके शरीर में कोई कमी नहीं है। आपका शरीर आपको इतनी सारी चीजें करने देता है। आपको किसी काम से रोकता नहीं है। तो ऐसे शरीर को लेकर आप परेशान कैसे हो सकते हैं। आप मोटे हैं, मगर फिट हैं, एक्टिव हैं और हेल्दी हैं तो क्या फर्क पड़ता है? बॉडी शेमिंग से बाहर निकलने में दुनिया को वक्त लगेगा, लेकिन आप खुद को बदल सकते हैं। खुद को रोज कहें आय एम ओके, आय एम वर्थ इट। अपनी पर्सनैलिटी को रंगों से भरें, उनमें जीएं और हर रोज मोटापे का उत्सव मनाएं।

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