पावर लिफ्टिंग पाठशाला में तैयार कर रहीं देश का भविष्य:'अर्जुन अवॉर्ड' की प्रतिज्ञा छोड़ गुरु के कहने पर की शादी, आज दुनिया भर में नाम

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: भाग्य श्री सिंह

मैंने जब पावर रेसलिंग शुरू की तब बिहार में ऐसा माहौल नहीं था कि लड़कियां खेल की दुनिया में कदम रखें। लोग कहते लड़कियों को खिलाड़ी बनाने से अच्छा है, घर-गृहस्थी के काम-काज सिखाओ ताकि आगे जा कर जीवन आसान बने।

मैं दीपाली नंदी पावर रेसलर रही हूं। मेरा जन्म और शुरुआती शिक्षा-दीक्षा जमशेदपुर में हुई। हम 4 बहनें और एक भाई है। ग्रेजुएशन करते ही मेरी शादी हो गई। मेरे पति राजकुमार शर्मा भी पावर लिफ्टर हैं। मेरे बच्चों ने भी गेम्स को ही करियर की तरह चुना है। मैं पोस्टल डिपार्टमेंट में सर्विस करती हूं।

मेरे पेरेंट्स ने देखा कि मेरा मन पढ़ाई से ज्यादा खेल कूद में लगता है तो उन्होंने मुझे खेल में करियर बनाने की प्रेरणा दी और हमेशा मेरा साथ दिया।

खेल के लिए गहरा है मेरा जुनून

खेल के प्रति मेरी दीवानी और जुनून कुछ इस कदर था कि मैंने प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिल जाता मैं शादी बिल्कुल नहीं करूंगी। पिता जी मेरे दृढ़ निश्चय से वाकिफ थे और जानते थे कि मैं अपनी बात पर अडिग रहने वाली लड़की हूं।

मेरा मेरे गुरु यानी कोच पर गहरा विश्वास था। पिता जी ने मेरे गुरु से कहा कि आप ही समझाइए इसे। नहीं तो ये लड़की घर बसाने से रही। मैं चाहता हूं मेरी बेटी के जीवन में ठहराव रहे। मेरे गुरु ने राजकुमार शर्मा जो कि पावर लिफ्टर थे से शादी करने की सलाह मुझे दी।

गुरु ने कहा कि तुम दोनों ही प्लेयर हैं। एक दूसरे को समझोगे और एक दूसरे का संबल बनोगे। गुरु की बात मान कर मैंने शादी कर ली। आज मेरे 4 बच्चे हैं। आज जब पति कई चीजों में मुझे सपोर्ट करते हैं और मैं भी उनका साथ देती हूं तो गुरु की बात का मर्म समझ आता है।

पावर लिफ्टिंग के लिए मन में जुनून होना बेहद जरूरी है।
पावर लिफ्टिंग के लिए मन में जुनून होना बेहद जरूरी है।

पावर लिफ्टिंग के लिए लड़कियों को किया जागरूक

मैंने पहली बार 1981 में पहली बार कलकत्ता स्टेडियम में पावरलिफ्टिंग की। मैं अंतरराष्ट्रीय लेवल की पावर लिफ्टर हूं।मैं पटना GPO में पोस्टेड थीं। जब 2000 में झारखंड बना, तब कई महिला पावर लिफ्टर पटना से चली गईं।

मैं अपने गुरु के कहे के मुताबिक अपनी टीम बनाकर उसे खेल की प्रैक्टिस करना चाहती थी। इसके लिए मैंने कई लड़कियों से संपर्क किया और उन्हें मोटिवेट किया।

मैंने पहले ऐसी लड़कियां तलाशीं जिनकी फिजीक अच्छी थी और जो पॉवर लिफ्टिंग जैसे गेम के लिए फिट थीं। लड़कियों के घर जाकर मैंने उनके माता-पिता को कन्विंस किया कि वो बेटियों को पावर लिफ्टिंग में उतारें। आज मैं कई लड़कियों की रोल मॉडल हूं।

पति भी इंटरनेशनल प्लेयर, जिम में कर रहे बच्चों को ट्रेंड

मेरी पति भी पटना यूनिवर्सिटी के टॉप मोस्ट प्लेयर रहे। मेरे चारों बच्चों ने भी इंडिया के लिए खेला। मेरे गुरु कहा करते थे कि जब तक एक खिलाड़ी खुद के प्रोडक्ट्स नहीं तैयार करता तब तक उसका खेलना व्यर्थ है।

मैं हमेशा इंडिया के लिए जी-जान से खेली अब मैं कई बच्चों की कोच हूं और उन्हें पॉवर लिफ्टिंग की ट्रेनिंग देती हूं। मेरे दो जिम हैं, जहां मैं और मेरे पति बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं और उन्हें गेम्स के लिए तैयार करते हैं।

मेरा शानदार प्रदर्शन, गुरु की आंखों में चमके खुशी के आंसू

ऑस्ट्रेलिया में मेरे शानदार खेल प्रदर्शन के दौरान मेरे गुरु की आंखों में आंसू थे। मेरे लिए वो सबसे भावुक पल था। खेलते-खेलते मेरे पांव इस कदर दुखने लगे थे कि मेरे जानकार लोग मुझे ट्राफी लेने के लिए उठाकर मंच तक ले गए। यही मेरा हासिल था। गुरु बन कर समझ आता है कि कोच होना क्या होता है। आज जब बच्चों के खान-पान, ट्रेनिंग और उनके पसंद की कॉस्ट्यूम चुनने की जिम्मेदारी निभाती हूं तो अपने गुरु सुब्रतो दत्ता को याद करती हूं।

मेहनत करें, कामयाबी कदम चूमेगी

जब आप कामयाब होंगे, तब लोगों को अच्छाइयां ही दिखेंगी। लोग क्या कहेंगे, कभी परवाह नहीं किया। मैं यही कहना चाहती हूं कि अपने आप को कम मत आंको। तुम कमजोर हो, तुमसे नहीं होगा, भाई कर लेगा, इस माइंड सेट से बाहर आना होगा। लड़कियां कमजोर नहीं हैं उस लेवल तक लेकर जाना होगा। अब तो लड़कियां छा रहीं हैं। जिस फील्ड में जाना चाहती हैं वहां गोल सेट कीजिए। पावर लिफ्टिंग करनी है मुझसे संपर्क करिए। मैं अच्छी ट्रेनिंग दूंगी।