खूबसूरती की ‘नई परिभाषा’:‘न अभागी, न अनलकी और न बेचारी हूं, मैं भारत की पहली हेयरलेस मॉडल हूं’

एक महीने पहलेलेखक: मीना

न मैं अछूत हूं, न अनलकी, न अभागी, न बेचारी और न कैंसर की मरीज...मैं केतकी जानी एलोपेसियन यानी हेयरलेस वुमन हूं और भारत की पहली हेयरलेस मॉडल। भास्कर वुमन से हुई बातचीत में केतकी बताती हैं, अमूमन लोग एक तो मॉडल और ऊपर से हेयरलेस सुनकर हैरान हो जाते हैं, लेकिन मैं ऐसी ही हूं, टोटल बिंदास। ऐसा नहीं कि बचपन से ही मेरी जिंदगी ऐसी थी। मेरा भी हंसता-खेलता बचपन रहा। अच्छी पढ़ाई लिखाई की और अभी पुणे में महाराष्ट्र राज्य पाठ्यक्रम ब्यूरो में गुजराती भाषा विभाग में स्पेशल ऑफिसर हूं। शादी के बाद पति-बच्चों के बीच दुनिया मस्त चल रही थी, कि 40 की उम्र के करीब आते ही मैं एलोपेसिया की मरीज बन गई।

केतकी जानी
केतकी जानी

एक दिन ऑफिस में काम कर रही थी, तब सिर पर हाथ फेरा तो महसूस हुआ कि कान के पीछे बाल नहीं हैं, स्किन थी। मेरी कलिग ने जब मेरे सिर को देखा तो बोली ‘मैम कान के ऊपर के एरिया में आपके बाल नहीं हैं।’ मैं उसी दिन डर्मेटॉलोजिस्ट के पास भागी गई। डर्मेटॉलोजिस्ट ने बताया कि आपको एलोपेसिया है। एक ऐसी बीमारी जिसमें लगातार बाल झड़ते हैं। मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि मेरे लंबे-घने बाल ऐसे सिर से उड़ जाएंगे। मैं रोज ऑफिस जा रही थी, रोज मेरे बाल झड़ रहे थे। उस रूप में मैं खुद खुद को स्वीकार नहीं कर पा रही थी। कभी सोचा ही नहीं था कि जीवन में बालों के बिना भी रहना पड़ेगा। बीमारी ठीक करने के लिए मैंने एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेदिक सभी तरह के इलाज करवाए। 5 साल तक एक से दूसरे डॉक्टर तक दौड़ती रही, लेकिन बाल झड़ना बंद नहीं हो रहे थे। उस समय सिर्फ बाल ही नहीं झड़ रहे थे, बल्कि मेरा आत्मविश्वास भी टूट रहा था। डायबिटीज में शरीर का इंसुलिन कम होता है, थायरॉयड में हार्मोन असंतुलित होते हैं वैसे ही एलोपेसिया में मुझे डिप्रेशन हुआ। एक दिन हिम्मत हार गई और सुसाइड करने की ठान ली।

रात के 3 बजे आत्महत्या की कोशिश की, तभी सामने सोते हुए बच्चों पर नजर गई तो लगा कि सुबह जब ये उठेंगे तो क्या करेंगे? बस फिर रुक गई। उस रात से एलोपेसिया के बारे में पढ़ना शुरू किया। तब मुझे पता चला कि एलोपेसिया कितना उदार डिसऑर्डर है क्योंकि बालों के गिरने के अलावा मेरे शरीर में और कोई दिक्कत नहीं है। मुझे याद है कि जब मुट्ठी भर-भरकर मेरे बाल रोज निकल रहे थे, तब लोग मुझे कहते थे कि कितनी बदनसीब हो, तुम्हारा पति जिंदा है फिर भी तुम्हारे सिर पर बाल नहीं हैं। यही नहीं कुछ तो यह भी मानते थे कि मुझ पर भूत प्रेत का साया है। उस समय में मैं लोगों से डरती थी, लेकिन आज लोग मुझसे डरते हैं। लेकिन अब मैंने लोगों की बातों से डरना बंद कर दिया है। जिन मर्दों के बाल नहीं होते लोग उनसे तो नहीं डरते, फिर एक बिना बालों वाली स्त्री से लोग क्यों डरते हैं? यहां महिला का मतलब लंबे बाल होता है। लेकिन जिनके पास लंबे बाल नहीं होते उनका क्या? तभी से मैंने ठान लिया कि अब भारत में एलोपेसिया को लेकर जागरूकता फैलाउंगी।

इसके बाद मैंने मिशन अनकवर एलोपेसिया, सपोर्ट एंड एक्सेप्ट एलोपेसिया केतकी जानी पेज बनाया और एलोपेसिया पर अवेयरनेस शुरू की। मेरे बच्चों को लोग कहते थे कि तुम्हारी मां के बाल नहीं हैं, वह मर जाएगी। ऐसा नहीं था। मैं एलोपेसिया को लेकर अवेयरनेस कैंपेन तो चला रही थी, लेकिन फिर मुझे लगा कि लोग ब्यूटी मतलब समझते हैं रैंप वॉक और मॉडलिंग। मुझे उस फील्ड की जरूरत थी, तब मैंने ब्यूटी प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। इस दौरान एलोपेसिया की दवाओं में स्टेरॉयड की ज्यादा मात्रा होने की वजह से मेरा वजन बढ़कर 85 हो गया था। इसके बाद मैंने दवाएं खाना बंद कर दिया, क्योंकि दवा खा रही थी, तब भी बाल झड़ रहे थे। डाइट में बदलाव करके वजन 55 हो गया। मैंने मिसिस इंडिया वर्ल्ड वाइड का फॉर्म भरा तब उसमें बाल का एक कॉलम था। जिसमें बालों की लंबाई, टाइप, रंग पूछा था, तो मैंने लिखा ‘नो हेयर।’ तीसरे दिन मेरा फॉर्म एक्सेप्ट हो गया। मुझे 2018 में मिसिस युनिवर्स में मिसिस इंस्पिरिशन का अवॉर्ड मिला। फिर कई इवेंट्स में हिस्सा लिया। अब चाहती हूं कि मेरी जितनी भी जिंदगी बची है उसे मैं एलोपेसिया की जागरूकता में निकाल दूं। मैं नहीं चाहती कि अब कोई और एलोपेसिया का मरीज सुसाइड करे। मुझे लगता है कि एलोपेसिया होने के बाद ही मैं इतना सबकुछ कर पाई हूं, इसलिए फेसबुक पर बिफोर माई रीबर्थ फोटो एलबम भी बनाया है, ताकि लोगों को और जागरूक कर सकूं। अब मैं मिसिस इंस्पीरिशन, मिसिस पॉपुलर, मिसिस पीपल्स च्वाइस हूं। भारत प्रेरणा अवॉर्ड भी सम्मानित हूं।

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