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शौक बड़ी चीज है:पैशन को बनाया बिजनेस, 4 कंपनी खोलीं, आज हजारों महिलाओं को सिखा रहीं 15 दिन में बिजनेस करने के गुर

2 महीने पहलेलेखक: मीना

चुप और शांत रहने वाली लड़की जब जवान होगी तो आवाज की बुलंदी ऐसी होगी कि एक नहीं चार-चार कंपनी खोलेगी। लगभग 2 लाख से ज्यादा की आबादी में रचे-बसे मध्यप्रदेश के सतना से निकलकर अमेरिका और सिंगापुर में लाखों लोगों को डांस के मूव्स सिखाएगी और उसी शौक को एक दिन कंपनी में तब्दील कर देगी, ये किसी ने नहीं सोचा था। बचपन की चुप्पी ऐसी टूटी कि आज ग्लोबल एंटरप्रेन्योर, डांसर, लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में 46 साल की निधि बांठिया मेहता की पहचान बन गई है।

कई सम्मानों से नवाजित और अब लाखों को बिजनेसवुमन बनाने का सपना लिए निधि भास्कर वुमन से बातचीत में कहती हैं, ‘मुझे नहीं मालूम था कि एक दिन मैं बिजनेस का इतना बड़ा एंपायर खड़ा कर दूंगी। एमबीए खत्म करने तक मालूम ही नहीं था कि आगे क्या करना है, किस जॉब में जाना है, लेकिन जैसे-जैसे मौके मिलते गए वैसे-वैसे कारवां बनता गया।

निधि बांठिया मेहता
निधि बांठिया मेहता

‘मां से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा’

भारत के एक छोटे से शहर से निकलकर विदेश में हजारों की संख्या में स्टूडियोज में जाकर लोगों को डांस सिखाना और उनके साथ पूरे आत्मविश्वास के साथ बात करना मेरे लिए हमेशा संभव नहीं था, लेकिन मैंने बचपन से अपनी मां को काम करते देखा था। 1982 में मां ने अपना बुटिक खोला, घर संभाला, अपना अकाउंट संभाला... उन्हें सेल्फ इंडिपेंडेंट देखा तो वही सीख मेरे भीतर भी आई। सात साल की उम्र में मैं और मेरी दीदी को पेरेंट्स ने कलकत्ता में बोर्डिंग स्कूल में डाला।

बोर्डिंग स्कूल मेरे लिए लाइफ चेंजिंग साबित हुआ क्योंकि दो बहनों में छोटी और दुलारी बिटिया को हॉस्टल ने अपने बल पर जीना सिखा दिया। यहां जब अंग्रेजी न आने की वजह से मजाक का बना तो दुखड़ा दिखाने के लिए मां नहीं थीं। मैं टैंट्रम नहीं दिखा सकती थी। दोस्तों के साथ अंग्रेजी सीखी। दिल्ली से बीकॉम किया और मंबई से एमबीए।

‘एमबीए के बाद क्या करना है नहीं मालूम था’

ट्रेडिशनल फैमिलीज में पढ़ाई के बाद शादी ही सारी सफलता मानी जाती है। दोस्त भी कहते कि मेरे लिए तो कोई माला पकड़े खड़ा होगा। इस वजह से नौकरी करनी है या नहीं, ये कभी सोचा ही नहीं था। एमबीए में इतने अनुभवी और बड़े-बड़े इंस्टीट्यूट से पढ़कर लोग आए थे कि मुझ पर अकेडमिक प्रेशर बनने लगा और मैं स्ट्रेस में आ गई। उस तनाव से बाहर निकलने के लिए श्यामक डावर की डांसिंग क्लासिस जॉइन कर लीं। हफ्ते में दो बार वहां जाती। उस समय शाहिद कपूर 16 साल के रहे होंगे और वो मेरे इंस्ट्रक्टर थे। दो साल तक वहां डांस सीखा। एमबीए खत्म किया और मैकेंजी में ई-मार्केटिंग का काम करते हुए ट्रेनिंग के लिए दुनिया भर में घूमीं, वो जिंदगी का वंडरफुल एक्सपीरियंस रहा।

डांस मेरे लिए ऑक्सीजन है : निधि मेहता
डांस मेरे लिए ऑक्सीजन है : निधि मेहता

‘शादी के बाद कैलिफोर्निया आना पड़ा’

नौकरी के एक साल बाद मेरी जिस लड़के से शादी फिक्स हुई वो कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली में रहते थे। मेरी बड़ी बहन की शादी भी सिलिकॉन वैली में ही हुई। एक अच्छी लड़की की तरह मैंने पेरेंट्स की बात मानी और अपनी नौकरी छोड़कर पति के साथ विदेश चली आई। अब तक मैं 14-16 घंटे काम कर रही थी अचानक से घर बैठना पड़ा। ये वो वक्त था जब घर की दीवारें मुझे काटने को दौड़तीं। बड़ी-बड़ी बिल्डिंग की चमक उदास लगती। इतना गुस्सा आता कि एक दिन पापा को फोन करके खूब रोई और उनसे कहने लगी कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि क्या करूं? जॉब लूं तो कौन सी? तब पापा ने कहा, ‘निधि एडवर्सिटी ब्रिंग्स ऑपरच्युनिटी।’ ये लाइन मेरे दिमाग में सीमेंट की तरह जम गई।

'पापा की बात ने बदली जिंदगी'

एक दिन अपनी बहन के यहां सिलिकॉन वैली में पार्टी में गई और मुझें डांस करते हुए मेरी बहन की दोस्त ने देखा। उन्होंने मुझसे पूछा कि मेरे बच्चों को स्कूल में डांस कॉम्पीटिशन है, क्या तुम इन्हें डांस सीखा सकती हो। जब मैंने उन तीन लड़कियों को डांस सिखाया। इस वक्त मुझे एहसास हुआ कि डांस को मैं सबसे ज्यादा एन्जॉय करती हूं। थकती नहीं हूं। डांस मूव्स को हर पल जीती। मजे के बात ये रही कि वो बच्चे कॉम्पीटिशन में फर्स्ट आए। मैंने उनकी रेगुलर क्लासिस शुरू कीं और कुछ अर्निंग भी शुरू हुई। मेरे पास इतने बच्चे हो गए कि मैंने ‘स्टेप्ज’ कंपनी शुरू कर दी। हस्बैंड ने भी इस आइडिया का सपोर्ट किया।

घर और काम दोनों साथ-साथ संभाले
घर और काम दोनों साथ-साथ संभाले

‘पहली बार जिंदगी खोने का डर लगा’

कैलिफोर्निया के रास्ते बहुत ज्यादा नहीं जानती थी। जब कंपनी के लिए लाइसेंस लेने गई तो गाड़ी रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई। मेरा रोना छूट गया और लगा कि आज जिंदगी का अंतिम दिन है, क्योंकि सामने से ट्रेन आने वाली थी। तभी अपनी बहन को फोन किया और उन्होंने मुझे गाइड किया तब हाइवे पर आ पाई। वो दिन मेरी आजादी का पहला दिन था। अब एक स्टूडियो किराए पर लिया। पहली क्लास बच्चों से फुल थी।

'कोई भी सीख खराब नहीं जाती'

मैंने डांस को प्रोफेशन के तौर पर नहीं सीखा, लेकिन श्यामक डावर की क्लास में जो भी सीखा वो सब यहां यूज किया, तब लगा कि आप जो भी सीखते हैं वो कभी खराब नहीं जाता। तब से लेकर मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2005 में जब अमेरिका छोड़ पति के काम की वजह से इंडिया आना पड़ा तब कंपनी बेच दी। उस समय 550 स्टूडेंट्स, 14 क्लासिस और 8 इंस्ट्रक्टर्स थे।

डांस और मार्केटिंग साथ-साथ की

भारत आने पर बॉलीबीट्ज कंपनी शुरू की और साथ में मार्केटिंग का काम भी किया। दो साल चेन्नई में रहने के बाद पति को सिंगापुर में काम के लिए आना पड़ा। दो साल और 4 महीने के दो बच्चे मेरे पास थे। नए प्रोजेक्ट, नई क्लासिस खोलना, बड़े कॉरपोरेट वर्कशॉप्स, टीम बिल्डिंग, मैनेजमेंट सब डांस के साथ-साथ सिखाती। जब हम लोग सिंगापुर आए तब बॉलीबीट्ज को मेरे ही सिखाए इंस्ट्रक्टर ने चलाया।

पति का मिला पूरा सपोर्ट
पति का मिला पूरा सपोर्ट

'जयपुर शिफ्ट होना आसान नहीं था'

अब पति को यूएस में शिफ्ट होना था लेकिन उन्होंने तय किया कि वे जयपुर अपने पेरेंट्स के पास आएं। इस वक्त हमारी इतनी बहस हुई, लेकिन हमें आना पड़ा और यहां आने पर लगा जैसे जिंदगी जितना आगे पहुंच गई थी अब उतनी ही सिमट गई है। तीन महीने तक एंग्याटी अटैक्स के साथ उठती। खूब रोती। रोज सोचती की मेरी पिक्चर पर्फेक्ट लाइफ इतनी खराब हो जाएगी। रोज पति से लड़ाई होती। यहां वापस खुद को ड्राइव किया और जुंबा क्लासिस शुरू कीं। मेरी डांसिंग ने ही मुझे उदासी, एंग्जायटी से बचाया।

'बच्चों की एक्सेसरीज के लिए शुरू की कंपनी'

मेरी बेटी छोटी थी, लेकिन उसके के लिए मुझे वैसी एक्सेसरीज नहीं मिलती थीं, जैसे सिंगापुर या अमेरिका में मिलती थी। फिर मैंने बच्चों की एक्सेसरीज के लिए 2011 में नीडीबी कम्पनी शुरू की। चीन को यूएस क्लिप्स का सैंपल भेजा और माल मंगाया। तीन महीने का एंटरप्रेन्योरशिप कोर्स किया। फिर इंडिया में बिजनेस कैसे करना है ये सीखा। अब तक मेरे पास कंपनी शुरू करने का अच्छा-खासा एक्सीपीरियंस हो गया था।

'15 दिन में बनाती हूं बिजनेसवुमन'

अब भारत में मैंने देखा कि यहां महिलाएं सिर्फ किचन की ही बनकर रह जाती हैं, जबकि हर किसी के पास हुनर है, लेकिन बिजनेस करना नहीं जानतीं। फिर 2020 में 'सेल्फ एचीवर' कंपनी शुरू की। अब तक मैंने सारी कंपनीज जीरो इनवेस्टमेंट के साथ शुरू कीं। यहां मैं महिलाओं को बिजनेस करने के ट्रेनिंग कैंप्स कराती हूं और 15 दिन में बिजनेसवुमन बनाती हूं। बिजनेस आइडिया जनरेट करते हैं और उसका पूरा वैंचर बनाते हैं और लांच कराते हैं। अब मैं महिलाओं को एंपावर कर रही हूं। क्योंकि मुझे लगता है कि जब घर में एक महिला सशक्त होती है तब पूरा घर एंपावर होता है।

बिजनेस शुरू करने के गुरु मंत्र

सक्सेसफुल बिजनेसवुमन बनने के लिए आप खुद में झांकें और खंगालें की ऐसा काम है जिसके बिना आप रह नहीं सकतीं या वो काम करने पर आपसे सबसे ज़्यादा खुश होती हैं। बिजनेस आइडिया आने के बाद बिजनेस कोच की जरूरत होती है। इसके बाद कॉस्टिंग, प्राइसिंग, फाइनेंशियल प्लानिंग, मार्केट वैलिडेशन को देखकर बिजनेस प्लान बनाया जाता है। प्रवासी महिलाओं से लेकर जयपुर तक और कई राज्यों की कई महिलाओं को बिजनेस करना सीखा दिया है। मुझे जो भी ऑप्योरचुनिटी मिली उसे लेती गई। मेरी हॉबी को ही मैंने बिजनेस बनाया। चुनौतियां बहुत आईं लेकिन खुद के लिए रास्ते बनाए। कम्पनी शुरू करने का कारवां अकेले का ही था लेकिन औरों को जोड़ा और उन्हें छोड़ने के लिए जोड़ा। रिश्ते ऐसे बने की परिवार बढ़ता गया। अपने साथ-साथ कई लड़कियों को ट्रेंड किया।

विदेश में दिखाई अपनी कला
विदेश में दिखाई अपनी कला

'हुनर दें ग्लोबल पहचान'

ऐसा नहीं है कि यहां तक पहुंचना मेरे लिए आसान था। घर वालों को लगता था कि एमबीए करने के बाद भी मैं क्डांस सिखा रही हूं, लेकिन मेरी सोच हमेशा से बड़ी रही। अपने शौक को ग्लोबल लेवल पर ले गई। जो कंपनी अब तक दूसरों को बेची हैं उनकी फ्रेंचाइजी मेरे पास है और जो डांस मैं यहां सिखाती हूं उसके वीडियोज वहां भी जाते हैं।

आज मेरे दोनों बच्चे बेटा 16 साल और बेटी 14 साल की है, जो एंटरप्रेन्योर है। अपने मी टाइम में रनिंग, मेडिटेशन और योग करती हूं। फिर सेल्फ अचीवर का काम और शाम का वक्त परिवार के लिए। एक सफल मां ही सफल परिवार बना सकती है इसलिए आज के समय में बहुत जरूरी है कि महिलाएं आंत्रप्रेन्योरशिप में आएं।

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