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ये मैं हूं:राइट हैंड डॉक्टर्स को काटना पड़ा, जिंदगी जीने की जिद ने मुझे आगे बढ़ाया, अब मां-पत्नी सभी रोल अच्छे से निभाती हूं

16 दिन पहलेलेखक: मीना

‘जिस वक्त डॉक्टरों ने मेरा राइट हैंड काटा उस समय लग रहा था जैसे मैं बिना पंख का पक्षी हूं। एक ऐसा पक्षी जो आसमान में लंबी कुलांचे लगाना चाहता है, पर कतरे हुए पंखों के कारण मन मसोसकर रह जाता है। इसी मलाल में दिन काटता है कि इस आसमान को कब मापूंगा। अस्पताल की सफेद दीवारें देख मन में आता कि जिंदगी इसी बिस्तर पर कटेगी क्या? बर्न वॉर्ड में मुझसे जो भी मिलने आता, हाय-तौबा मचाता। अब इसका क्या होगा, लड़की जाति है, अब इससे कोई शादी नहीं करेगा।

सब ऐसे मातम मनाते जैसे मेरी मैयत पर आए हों, लेकिन मेरे पेरेंट्स ने मुझे कभी विक्टिम बनकर नहीं सरवाइवर और सेवियर के रूप में पाला। लगभग 50 सर्जरी के बाद अस्पताल के बिस्तर को ऐसे छोड़ा जैसे सांप अपनी केंचुल छोड़ता है। जिंदगी जीने की जिद ने मुझे अस्पताल से छुट्टी दिलाई और फिर मैंने आसमान को अपनी बाहों में भरने के लिए खुद को तैयार किया। ये शब्द हैं मुंबई की स्टील एंड प्रोजेक्ट्स इंडिया प्रा. लि. की डायरेक्टर पॉलमी पटेल के।

करंट लगने की वजह से पॉलमी का एक हाथ डॉक्टर्स को काटना पड़ा।
करंट लगने की वजह से पॉलमी का एक हाथ डॉक्टर्स को काटना पड़ा।

32 साल की बिजनेस वुमन पॉलमी पटेल भास्कर वुमन से खास बातचीत में कहती हैं, ‘12 साल की थी तब गर्मियों की छुट्टियों में अपने रिश्तेदार के घर मुंबई से हैदराबाद गई थी। वहां दोपहरी में बालकनी में कजिन्स के साथ खेल रही थी। एक रॉड में छोटा खिलोना बांध कर फिशिंग-फिशिंग खेल रही थी। नीचे बहुत सारे तार थे। मेरे हाथ से वो रॉड खिसक गई और रॉड पकड़ने के चक्कर में तार पकड़ लिया। मेरा राइट हैंड उस तार में चिपक गया। जब हाथ उस तार से छूटा तो मैं दूर पीछे जाकर गिरी। बाद में जाकर मालूम पड़ा कि जिस तार को मैंने पकड़ा था वो हाइटेंशन इलेक्ट्रिक वायर थी जो 11000 वॉल्टेज की थी। नीचे गिरने के बाद मैं पूरी तरह बेहोश हो गई।

80 फीसद जल गया था शरीर

अस्पताल के बर्न वॉर्ड में मुझे एडमिट किया गया। पूरा शरीर 80 फीसद जला गया था। डॉक्टर्स ने बताया कि जब भी बॉडी जब भी करंट से टच होती है तो उसका एक फैलने का पैटर्न बन जाता है। करंट राइट हैंड से मेरे शरीर में घुसा और लेफ्ट लैग से बाहर निकला। इस वजह से मेरा लेफ्ट लैग और राइट हैंड सबसे ज्यादा इफैक्टिड हैं। बाकी पूरे शरीर पर जलने के निशान बन गए। मेरे पेरेंट्स मुंबई से सीधे भागे हुए अस्पताल आए।

गैंग्रीन के कारण काटा हाथ

एक हफ्ते बाद डॉक्टर्स को मालूम हुआ कि मेरे दाएं हाथ में गैंग्रीन फैल रहा है। गैंग्रीन के कारण शरीर में ब्लड सप्लाई रुकने लगी, क्योंकि मेरे टिश्युज नष्ट होने लगे थे। गैंग्रान को फैलने से पहले जहां से वह फैल रहा है उस हिस्से को ही काटना जरूरी था और 11 जून 2001 को डॉक्टर्स ने फैसला लिया और मेरा राइट हैंड काट दिया।

एक हाथ खोने की वजह से पॉलमी की जिंदगी रुक गई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ती रहीं।
एक हाथ खोने की वजह से पॉलमी की जिंदगी रुक गई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ती रहीं।

मां के हाथ से खाया खाना फिर जल्द हुई रिकवरी

एक हफ्ते बाद मुझे होश आया तो देखा कि मैं अस्पताल मे हूं और जब बर्न वॉर्ड में शिफ्ट किया गया तो किसी को अंदर नहीं भेजा जा रहा था। वहां सिर्फ डॉक्टर्स और नर्स ही आतीं। खाना भी नर्स ही खिलातीं। जिस दिन मैंने अपना हाथ देखा और बहुत रोना आया। उस वक्त मेरे दिमाग में अस्पताल आने से पहले की जो मेमोरी थी वही चल रही थी। मैं बच्चों के साथ खेल याद कर रही थी। मेरी वाइट टीशर्ट मेरे दिमाग में थी, लेकिन जब मैंने खुद को देखा तो वो कपड़े नहीं थे। पेरेंट्स से मुझे कोई मिलने नहीं दे रहा था। फिर मां ने डॉक्टर्स से बहुत रिक्वेस्ट की और तब उन्हें मेरे वार्ड में मेरे साथ आने दिया। फिर मेरा खाना पीना ठीक हुआ। रिकवरी बेहतर हुई।

50 सर्जरी से गुजरना पड़ा

मुझे मुंबई भेज दिया गया। एक साल तक इलाज चला। राइट हैंड का करंट लैफ्ट हैंड में भी गया और आज भी अगर आप देखेंगे तो मेरी लैफ्ट हैंड की उंगलियां पूरी तरह से मुड़ी हुई हैं। ग्रिप सिर्फ 50 परसेंट है। 20 से 30 परसेंट सेंसेशन बची थी। करीब 50 सर्जरी में से एक सर्जरी मेरे लैफ्ट हैंड में सेंसेशन लाने के लिए की गई जिसमें डॉक्टर्स ने मेरे बाएं हाथ को मेरे पेट से जोड़ा और उसे दो महाने तक वहां रखा। फ्लैप सर्जरी की गई। एक हफ्ते बाद मेरा हाथ पेट से डिटैच किया गया। सेंसेशन के लिए दोनों पैरों से एक चौदह इंच का सेंसरी नर्व मेरे लैफ्ट हैंड में डाली गई। जिस वजह से अब मैं गर्म-ठंडा महसूस कर पाती हूं।

आर्टिफिशियल हाथ से लिखा पेपर और पास की सातवीं की परीक्षा

राइट हैंड न होने की वजह से मैं अपने पेरेंट्स से पूछती कि मुझे मेरा राइट हैंड कब मिलेगा। फिर मेरे लिए आर्टफिशियल हाथ मंगवाया गया जो असली हाथ की तरह ही है। केरल में आयुर्वेदिक सेंटर में पेरेंट्स लेकर गए। वहां मैंने लिखने की प्रैक्टिस की। मुझे लिखने का बहुत शौक था और फिर एक महीने लगातार लिखने की प्रैक्टिस करती रही। पहले तो मैं पैन नहीं पकड़ पा रही थी। एक लाइन से एक पेज तक लिखने में मुझे एक साल लग गया और सातवीं की परीक्षा मैंने खुद लिखी और पास हो गई। इसी तरह से मैंने 12वीं पास की।

पॉलमी आर्टिफिशियल हाथ लगाकर काम करती हैं।
पॉलमी आर्टिफिशियल हाथ लगाकर काम करती हैं।

स्कूल के बच्चों ने नॉर्मल फील कराया

स्कूल के बच्चे और टीचर्स मुझे समझते थे तो वहां ज्यादा दिक्कत नहीं होती थी। मैं खाना नहीं खा पाती थी तो मां रोज स्कूल में आकर मुझे लंच खिलातीं। दिन में जितनी बार मुझे पानी पीना होता था उतनी बार मुझे क्लास के बच्चे मुझे बोतल खोलकर देते। सभी ने ऐसा माहौल बना दिया था कि मुझे ऐसा नहीं लग रहा था कि मेरे साथ कुछ गलत हुआ है।

…जब कॉलेज जाने से मना कर दिया था

समस्या तब आई तब जब मैं कॉलेज आई। क्योंकि यहां नया क्राउड था। लोग मुझे ऐसे देखते थे जैसे मैं कोई चार हाथ-पैर वाला इसान हूं। स्टूडेंट्स बार-बार मुझसे पूछते कि तूने प्लास्टिक का हाथ क्यों पहना है? इन सब बातों के लिए मैं तैयार नहीं थी। एक वक्त ऐसा आया कि मैंने पेरेंट्स को कह दिया मुझे नहीं पढ़ना है। लेकिन घर पर मम्मी-पापा ने ऐसा माहौल बना दिया कि कुछ भी गलत नहीं हुआ है। पेरेंट्स ने मुझे सिखाया कि जो चला गया उसका मत सोचो, जो तुम्हारे पास है उसका एडवांटेज उठाओ।

जोक सुनना पसंद था जिससे जल्द रिकवरी हुई

जब मैं हॉस्पिटल में थी तब जो भी मुझसे मिलने आता वो रोने लगता। मुझे बहुत अजीब लगता। फिर पापा ने सभी रिश्तेदारों और दोस्तों को कह दिया कि अगर पॉलमी के पास जाकर कोई रोया तो उसे मैं अंदर नहीं जाने दूंगा। अगर आपको उससे मिलना है तो उसे जोक सुनाओ। उसे जोक सुनना पसंद है। लोगों ने पापा की इस बात को गंभीर रूप से लिया और फिर सभी ने जोक सुनाना शुरू कर दिया। अब मुझे सभी से मिलने में मजा आता। इस तरह से मेरा आउटलुक बदला।

आज पॉलमी सक्सेसफुल बिजनेस वुमन के साथ-साथ पत्नी और मां भी हैं।
आज पॉलमी सक्सेसफुल बिजनेस वुमन के साथ-साथ पत्नी और मां भी हैं।

अभी भी छोटी चीजों को उठा नहीं पाती

अभी भी मैं बहुत से काम अकेले नहीं कर पाती हूं। बटन नहीं लगा सकती, बाल नहीं बांध सकती हूं। मेरी ग्रिप खराब है तो छोटी चीजें उठा नहीं पाती। छोटी सी भी चीज को उठाने से पहले बहुत गणित लगाना पड़ता है। मैंने खुद को इंडिपेंडेंट बनाने की काफी प्रैक्टिस की क्योंकि मुझे हमेशा किसी के भरोसे नहीं जीना था।

पैरों से चलाया टीवी का रिमोट

शुरुआत में जब मैं टीवी देखती तो इंतजार में रहती कि कोई आएगा और रिमोट चलाएगा, लेकिन जब कोई नहीं आता तो मैंने अपने पैरों से रिमोट चलाना शुरू कर दिया। जींस नहीं पहनी जाती थी तो स्कर्ट पहनना शुरू किया। पहले बाथरूम जाने से लेकर हर काम मां कराती थीं, लेकिन अब मैंने खुद सब सीख लिया है। 80 परसेंट काम मैं खुद से कर लेती हूं।

एक हाथ से भी सफल जिंदगी जी रही हैं पॉलमी।
एक हाथ से भी सफल जिंदगी जी रही हैं पॉलमी।

अब पत्नी और मां के साथ-साथ बिजनेस वुमन हूं

मैं बचपन से बहुत जिद्दी रही हूं। मुझे किसी की हेल्प नहीं चाहिए होती थी। कॉलेज जाने के बाद मैंने देखा कि सभी ड्राइव कर रहे हैं फिर मैंने ऑटोमेटिक कार चलानी शुरू की। 2014 में मैंने लव मैरिज की और अब दो साल की बेटी है। पत्नी, मां की जिम्मेदारियों के साथ-साथ फैमिली बिजनेस भी संभाल रही हूं।

मैं एक हाथ से जिंदगी जी सकती हूं तो आप क्यों नहीं?

सभी को यही कहना चाहूंगी कि जिंदगी में कब क्या अनहोनी हो जाए हमें नहीं मालूम। इसलिए खुद को हमेशा हर परस्थिति के लिए तैयार रखें। पूरी दुनिया आपको नीचा दिखाने के लिए बैठी है लेकिन आपको खुद की विल पावर पर भरोसा करना है। मेरे पेरेंट्स ने मुझे बाहर भेजा और उससे मुझमें कॉन्फिडेंस आया। अब मुझे लगता है कि हर लड़की को एंबिशियस होना चाहिए और इंडिपेंडेंट बनना चाहिए। अगर मैं एक हाथ से अपना फैमिली बिजनेस संभालकर बिजनेस वुमन बन सकती हूं तो आप क्यों नहीं बन सकते।

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