85 की उम्र में गोरों को खिला रहीं खाना:12 साल में पापा की मौत-शुरू की टिफिन सर्विस, शादी बाद खोला लंदन में रेस्तरां

4 महीने पहलेलेखक: मरजिया जाफर

85 साल की मंजू उम्र के इस पड़ाव पर भी एक्टिव हैं, वे इग्लैंड में अपना रेस्टोरेंट चला रही हैं और गोरों के बीच गुजराती देसी स्वाद को मशहूर बना रही हैं। भेलपुरी, पानीपुरी, पनीर मसाला, कांदा पालक… ऐसा चटपटा है मंजू के हाथ का पकवान। इस देसी फूड का जायका उन हाथों से मिलता है जिनमें सिलवटें पड़ी चुकी हैं, लेकिन खाना पकाने का शौक और जोश अब भी बरकरार है। मंजू ने इस जायके की कहानी कुछ इस तरह हमारे साथ शेयर की:

बचपन से लेकर बुढ़ापे तक सिर्फ 3 बार इंडिया जाने का मौका मिला।
बचपन से लेकर बुढ़ापे तक सिर्फ 3 बार इंडिया जाने का मौका मिला।

सिर्फ 3 बार भारत जाने का मौका मिला

मेरी पैदाइश तो भारत की है, लेकिन बचपन से लेकर बुढ़ापे तक सिर्फ 3 बार इंडिया जाने का मौका मिला। यह कह सकते हैं कि इंडियन बहू की ख्वाहिश मुझे हिंदुस्तान ले आई। एक बार देवरानी लाने और दो बार बेटों के लिए बहुएं लाने। मेरी एक बहू सूरत और दूसरी बड़ोदरा की है।

वैसे तो मेरे पास अफ्रीकन नेशनैलिटी है, लेकिन नानी की जिद से मां को इंडिया जाकर मुझे जन्म देना पड़ा। मेरा ननिहाल गुजरात के आनंद जिले के 'वरसादा गांव' में है, लेकिन 1936 के बाद मैं वहां कभी नहीं गई। दादा-दादी नहीं थे, बुआ ने ही पापा की परवरिश की। बुआ ने अपनी शादी के बाद पापा को करियर बनाने के लिए अफ्रीका भेज दिया।

अफ्रीका से इंग्लैंड का सफर

जब मैं 12 साल की थी तब पापा गुजर गए। छोटे भाई-बहन की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मुश्किल वक्त में गुजारा करने के लिए मैंने कम उम्र में ही खाना बनाकर टिफिन सर्विस का काम शुरू किया। शाम को बच्चों को ट्यूशन देती और वक्त मिलने पर थोड़ी बहुत सिलाई कर के पैसे कमा लेती थी।

शादी के बाद हम अफ्रीका से इंग्लैंड चले आए। उस वक्त बड़े बेटे की उम्र 6 साल और छोटे बेटे की उम्र डेढ़ साल थी।
शादी के बाद हम अफ्रीका से इंग्लैंड चले आए। उस वक्त बड़े बेटे की उम्र 6 साल और छोटे बेटे की उम्र डेढ़ साल थी।

इंग्लैंड में शुरू हुआ एक नया संघर्ष

24 मई 1964 में मेरी शादी गुजराती मूल के अफ्रीका के बिजनेसमैन से हुई। शादी के कुछ साल बाद हम अफ्रीका से कारोबार छोड़कर दो बच्चों और कुछ पाउंड लेकर इंग्लैंड चले आए। उस वक्त बड़े बेटे की उम्र 6 साल और छोटे बेटे की उम्र डेढ़ साल थी।

हालांकि देवर पहले ही अफ्रीका से इंग्लैंड आ गए थे, इसलिए एक हफ्ता हमें उनके घर में रहने के लिए जगह मिल गई। न इंग्लिश आती थी और न ही पास में कोई काम था। हमने लंदन में रेंट पर एक छोटा सा घर लिया, जिसमें 7 साल गुजारे। मुझे एक इलेक्ट्रॉनिक स्विच बोर्ड बनाने वाली कंपनी में लेबर की नौकरी मिल गई और रिटायरमेंट भी वहीं से हुआ। बच्चे छोटे थे और हम दोनों पति-पत्नी काम करते थे। बच्चों की देखभाल के लिए मैं दिन की नौकरी करती और पति नाइट शिफ्ट में करते थे। कभी-कभी मेरी मां बच्चों को संभालती थी। इस तरह बच्चे जैसे-तैसे पल गए।

2017 में लंदन से दूर ब्राइटन में मेरे बच्चों ने मेरे लिए एक छोटा सा रेस्टोरेंट खोला।
2017 में लंदन से दूर ब्राइटन में मेरे बच्चों ने मेरे लिए एक छोटा सा रेस्टोरेंट खोला।

रेस्टोरेंट का सपना

खाना बनाने का शौक तो बचपन से ही था। पहले बच्चे छोटे थे और मेरे पास ज्यादा पैसे भी नहीं थे इसलिए बिजनेस के बारे में ज्यादा सोचा नहीं। रेस्टोरेंट खोलने का मेरा सपना दिल के किसी कोने में गुम हो गया था, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर आकर बच्चों और बहुओं ने इसे पूरा किया।

2017 जिंदगी का ड्रीम ईयर

पांच साल पहले 2017 में लंदन से दूर ब्राइटन में मेरे बच्चों ने मेरे लिए एक छोटा सा रेस्टोरेंट खोला। लेकिन लॉकडाउन ने हकीकत में बदलते सपने पर एक बार फिर ब्रेक लगा दिया। उस दौरान भी मैं खाली नहीं बैठी। मैंने उन दो साल में सील पैक चटनी लॉन्च की है। अब सब कुछ नॉर्मल है। मेरे सपने उड़ान भर रहे हैं और मैं भी।

शुद्ध शाकाहारी गुजराती मेन्यू

वैसे तो यहां इंडियन फ़ूड के बहुत से रेस्टोरेंट है लेकिन ज्यादातर गोरे मंजू रेटोरेंट का ही खाना पसंद करते हैं, क्योंकि यहां घर जैसा ही खाना बनाया और परोसा जाता है, जो गोरों को बहुत पसंद आता है।

हम शेयरिंग थाली का कॉन्सेप्ट लेकर आये हैं, जिसमें 4 आइटम होते हैं। मंजू रेस्टोरेंट में सनफ्लावर ऑयल में ही खाना बनाया जाता है। घी, तेल और चीनी का इस्तेमाल नहीं करते। शायद इसीलिए ब्रिटिश हमारा खाना पसंद करते हैं। ये थाली 14 सौ पाउंड की है (भारतीय मूल्य के अनुसार 14 सौ रुपये )। हमारे खास पकवानों में गुजराती स्टाइल का डोसा, स्पेशल ढोकला का सबसे ज्यादा ऑर्डर होता है।

खास पकवानों में गुजराती स्टाइल का डोसा, स्पेशल ढोकला का सबसे ज्यादा ऑर्डर होता है।
खास पकवानों में गुजराती स्टाइल का डोसा, स्पेशल ढोकला का सबसे ज्यादा ऑर्डर होता है।

सुबह से शाम तक एक्टिव रहती हूं

मैं सुबह 5:30 बजे उठती हूं और रात 12 बजे तक काम करती हूं। मेरा ज्यादातर वक़्त किचन में गुजरता है चाहे वो घर का किचन हो या रेस्टोरेंट का किचन। मुझे बैठना पसंद नहीं है। एक्सपेरिमेंट करती रहती हूं। इसलिए कोरोना जैसी बीमारी को भी मात दे गई। मेरे पूरे घर को कोरोना हुआ लेकिन मैं इस उम्र में भी कोरोना से खुद को बचा लिया।

अध्यात्म से जुड़ी हूं

मैं अध्यात्म के बहुत करीब हूं। दिन की शुरुआत पूजा से करती हूं। फिट रहने के लिए योग करती हूं। जब भी इंडिया जाती हूं अपने गांव की कुल देवी के दर्शन करने जरूर जाती हूं। मेरा सपना एक बार स्वर्ण मंदिर देखने का है, लेकिन भगवान जाने कब पूरा होगा।

बहू-बेटे देते हैं साथ

रेस्टोरेंट में मेरा साथ मेरी दोनों बहू और बेटे देते हैं। मेरी छोटी बहू हेड शेफ है और बड़ी बहू शु-शेफ है। दोनों बेटे मार्केटिंग का काम करते हैं। इसके अलावा यहां 8 स्टाफ है जिसमें इंडियन और ब्रिटिश मूल के लोग शामिल हैं।

हिंदुस्तानी त्योहारों का जश्न

मैं रेस्टोरेंट में दीवाली बहुत अच्छी तरह मानती हूं। डेकोरेशन से लेकर पकवान तक सब लक्ष्मी पूजा के हिसाब से होता है। दिवाली के दिन मैं साड़ी पहनकर अपने एक एक कस्टमर का स्वागत करने जाती हूं और महिला कस्टमर को बिंदी लगाकर दिवाली विश करती हूं।

यहां होली मनाने की इजाजत नहीं है इसलिए रंग नहीं खेल सकते। होली के दिन मैं अपने मेहमानों को होली के बारे में बताती हूं। इस दिन रेस्टोरेंट का मेन्यू होली की तरह रंगों से भरा होता है। होली में बनने वाले पकवान ही सर्व करती हूं। 15 अगस्त यानि इंडिपेंडेंट डे पर भी मैं अपने रेस्टोरेंट को तिरंगे से सजाती हूं और देश भक्ति गाने के बीच मेहमानों का स्वागत करती हूं।

पार्टी के लिए बुकिंग नहीं कर सकते इसलिए ऑर्डर या टेकअवे ही करते हैं।
पार्टी के लिए बुकिंग नहीं कर सकते इसलिए ऑर्डर या टेकअवे ही करते हैं।

रेस्टोरेंट का थीम और म्यूजिक

मंजू रेस्टोरेंट में गुजरात की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। दीवारों पर बड़ी-बड़ी थाली, मेरे पुराने टिफिन जो मैं अफ्रीका में इस्तेमाल करती थी। अचारी मर्तबान, गुजरती मसाला रैक, मैंने अपनी फेवरेट पीली साड़ी का पोस्टर बनाकर लगवाया है।

रेस्टोरेंट में जगह की कमी

मेरा रेस्टोरेंट काफी छोटा है इसलिए मैं यहां ज्यादा कुछ नहीं कर सकती लेकिन फ्यूचर में मैं गांधी जी, मोदी जी और अमिताभ बच्चन की तस्वीर यहां लगाना चाहती हूं। यहां करीब 200 इंडियन रहते हैं लेकिन जगह की कमी की वजह से हम पार्टी के लिए बुकिंग नहीं कर सकते इसलिए ऑर्डर या टेकअवे ही करते हैं।

नींबू के आचार के लिए मुझे ग्रेट टेस्ट का अवार्ड भी मिला है।
नींबू के आचार के लिए मुझे ग्रेट टेस्ट का अवार्ड भी मिला है।

कस्टमर विजिट

मंजू रेस्टोरेंट में अंग्रेज, इंडियन के अलावा वीआईपी कस्टमर भी आते हैं। इंग्लैंड के म्यूजिशियन, फिल्म हैरी पॉटर की टीम, यहां के एमपी आ चुके हैं लेकिन हम उन्हें भी नॉर्मल कस्टमर की तरह ही डील करते हैं। गुजरती लजीज पकवान और नींबू के आचार के लिए मुझे ग्रेट टेस्ट का अवार्ड भी मिला है।