कॉलेज के बैंड से शुरू हुआ म्यूजिक का सफर:हरिवंश राय बच्चन-महादेवी वर्मा की कविताओं को गाया; वेब सीरीज के लिए भी गाती हूं

नई दिल्ली19 दिन पहलेलेखक: दीक्षा प्रियादर्शी

हमारे समाज में फेमिनिज्म, जेंडर इक्वलिटी और सेव ट्रीज जैसे मुद्दों पर जब भी बात होती है उसके लिए बहुत भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। मैंने उसे अपने शब्दों के जरिए थोड़े हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा और लोगों के सामने गाने के तौर पर पेश किया। ये शब्द हैं चिन्मयी त्रिपाठी के, जो एक कवयित्री और सॉन्ग राइटर होने के साथ-साथ म्यूजिक एंड पोएट्री स्टूडियो की को फाउंडर भी हैं।

चिन्मयी का एक गाना, जो कि स्वरा भास्कर पर फिलमाया गया है 'अबला नारी, जनहित में जारी, तुम पड़ सकती हो इन सब पर भारी' इन दिनों लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। जानिए चिन्मयी की कहानी उन्हीं की जुबानी।

पिताजी ने किया म्यूजिक सीखने के लिए प्रेरित

मैं मध्य प्रदेश के सागर की रहने वाली हूं। शुरू से ही मेरे घर का माहौल बहुत साहित्यिक रहा है। मेरे पिता राधा वल्लभ त्रिपाठी संस्कृत के स्कॉलर और लेक्चरर रहे हैं और मां सत्यवती त्रिपाठी भी हिंदी लेक्चरर रही हैं। चूंकि मम्मी-पाप पढ़ाने से जुड़े थे, इसलिए हम तीनों बहने भी पढ़ाई में अच्छी रहे हैं। मुझ से बड़ी दोनों बहनें विदेशों में सेटल हैं। हमारा बचपन बहुत ही अच्छा था, जो कि 'सागर यूनिवर्सिटी' कैंपस में बीता था।

मेरी शुरुआती पढ़ाई 'सेंट जोसेफ' स्कूल से हुई है, लेकिन मेरे पेरेंट्स चाहते थे कि पढ़ाई के साथ-साथ हम कुछ क्लासिकल भी सीखें। इसलिए मेरी दोनों बड़ी बहनों ने ‘कथक’ सीखा और क्योंकि मेरी आवाज अच्छी थी तो मेरे पिता जी ने मुझे क्लासिकल म्यूजिक सीखने के लिए प्रेरित किया और जब मैं सेकेंड क्लास में थी, तब से मैंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। हालांकि, मेरी फिल्मी गानों में कुछ खास रूचि नहीं थी, इसलिए मैंने कभी ये नहीं सोचा था कि इस फील्ड में मेरा फ्यूचर है और मुझे सिंगर बनना है।

शिक्षा के क्षेत्र में जुड़े होने के कारण चिन्मयी के पिता ये जानते थे कभी कोई सीखी हुई बेकार नहीं जाती।
शिक्षा के क्षेत्र में जुड़े होने के कारण चिन्मयी के पिता ये जानते थे कभी कोई सीखी हुई बेकार नहीं जाती।

एमबीए के एक्सपीरियंस पर भी लिखा गाना

मैंने इंदौर के ‘आईपीएस कॉलेज’ से ग्रेजुएशन किया और एमबीए की पढ़ाई के लिए नोएडा आ गई। 2012 में जब मैं 'एमिटी यूनिवर्सिटी' नोएडा पहुंची तो कॉलेज में एक 'स्पाइस रूट' नाम के बैंड से जुड़ी। वहां मैं कॉलेज लेवल पर होने वाले कार्यक्रमों में अपनी लिखी कविताओं को गाना शुरू किया।

मैं ये मानती हूं कि अपने करियर को लेकर मैं थोड़ी कंफ्यूज थी कि मुझे क्या करना है और मेरा फ्यूचर कैसा होगा। हालांकि धीरे-धीरे जैसे ही मैं अपने जिंदगी की सफर में आगे बढ़ते गई, मेरी उलझने सुलझती गईं। अपने एमबीए के दौरान के एक्सपीरियंस को भी मैंने लिखा है, जिसे बाद में कम्पोज किया और उसे एक गाने के फॉर्म में रिलीज किया, जिसके बोल हैं 'ये उन दिनों की बात है' । इस गाने को जब भी सुनती हूं मुझे लगता है कि इसके शब्दों में मेरी उलझने साफ झलकती हैं।

पहली जॉब करने पर समझ आया कि मैं 9 टू 5 फॉर्मेट के लिए नहीं बनी हूं

एमबीए के बाद मैं एक फेमस कॉरपोरेट कंपनी के साथ मार्केटिंग एंड बिजनेस डेवलपर के तौर जुड़ी। कुछ दिनों तक काम करने के बाद मुझे ये एहसास हुआ कि शायद मैं 9 टू 5 फॉर्मेट वाले जॉब प्रोफाइल के लिए नहीं बनी हूं। जॉब में रहने के दौरान मैं अपने गाने लिखती रही और उस दौरान 'वर्ल्ड वाइड रिकॉर्ड्स' के साथ 'सुन जरा' नाम से मेरा एक एल्बम भी रिलीज हुआ।

आखिरकार, मैंने अपनी जॉब छोड़ी और गुड़गांव बेस्ड कंपनी 'सॉन्ग ड्यू' के साथ को फाउंडर के तौर पर जुड़ी। इस कंपनी का काम इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट के म्यूजिक को प्रमोट करना है। जॉब छोड़ने पर मेरे मम्मी-पापा ने बिल्कुल वैसे ही चिंता जताई्र, जैसा कि अमूमन होता है। शायद बहुत ही सिंपल बैकग्राउंड से आने के कारण उनके लिए कॉरपोरेट वर्ल्ड के काम करने के तौर-तरीकों को समझना थोड़ा मुश्किल था। मगर, बाद में उन्होंने सब मुझ पर छोड़ दिया और कहा, तुम्हें जो बेस्ट लगता है वो करो। इस कंपनी के साथ मैंने करीब 4 साल काम किया और इसी बैनर तले मेरे दूसरे और गाने भी रिलीज हुए।

संगीत के कारण मिला लाइफ कम क्रिएटिव पार्टनर

मैं अपने लाइफ पार्टनर से भी संगीत के माध्यम से ही मिली। साल 2014 में ब्रिटिश काउंसिल की तरफ से ‘यंग आंत्रप्रेन्योर अवॉर्ड’ के लिए मुझे नॉमिनेट किया गया था। इस अवॉर्ड फंक्शन के लिए मैं कोलकाता गई थी, वहां मेरी मुलाकात जोएल से हुई। वो ब्रिटिश काउंसिल में म्यूजिक पढ़ाते थे। हमारी दोस्ती म्यूजिक के कारण ही हुई। हम संगीत को लेकर एक तरह की सोच रखते थे।

जोएल से मिलने के बाद मैंने गुड़गांव वाली कंपनी छोड़ी और हम दोनों ने मिलकर म्यूजिक एंड पोएट्री नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसके अंदर हमने फेमस हिंदी कविताओं को सिलेक्ट कर के उसके लिए धुन बनाई और उसे प्रोड्यूस किया। फेमस कविताओं की लिस्ट में महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्चन, रामधारी सिंह दिनकर, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, विनोद कुमार शुक्ल जैसे महान कवियों की रचनाएं हैं। धीरे-धीरे इस लिस्ट में नए कवि भी जुड़ते जा रहे हैं। इसी में से एक कबीर की कविता 'युगन-युगन हम योगी अवधु', हरिवंश राय बच्चन की ‘पगला मल्लाह’ , विनोद कुमार शुक्ल की ‘जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे’ है, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। ये सारे गाने हमारे यूट्यूब चैनल पर भी हैं।

सेम इंटरेस्ट होने के कारण चिन्मयी और जोएल की सोच मैच करती थी, शायद यही कारण था कि दोनों ने एक दूसरे को अपना लाइफ पार्टनर चुना।
सेम इंटरेस्ट होने के कारण चिन्मयी और जोएल की सोच मैच करती थी, शायद यही कारण था कि दोनों ने एक दूसरे को अपना लाइफ पार्टनर चुना।

शादी के बाद बनाया म्यूजिक में करियर

मैं और जोएल साथ काम करते-करते एक-दूसरे को पसंद करने लगे। हमने अपने घर पर ये बात बताई और फरवरी 2017 में हमने भोपाल में शादी कर ली। इसके बाद ही मैं 2018 में जोएल के साथ मुंबई शिफ्ट हो गई।

मुंबई शिफ्ट होने के बाद मैंने अपना पूरा फोकस गाने पर रखा। हालांकि, शुरुआत में मुझे रिजेक्शन भी फेस करने पड़े, लेकिन मैं मानती हूं कि रिजेक्शन लर्निंग का एक प्रोसेस है। परेशानी हुई, लेकिन मन में कभी ये नहीं आया कि मैंने जॉब छोड़ कर गलती की। जोएल काम कर रहे थे और मेरे पास भी सेविंग थी कि एक-डेढ़ साल आराम से सरवाइव कर सकती थी। इसलिए हम स्ट्रगल पर कम और अपने काम को और बेहतर बनाने पर ध्यान देते थे।

लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया, चाहती हूं लोग मुझे मेरे लिखे गाने के लिए जाने

मैप स्टूडियो के अंदर ही हमने एक बैंड तैयार किया, जिसमें हमारे साथ कई और लोग भी जुड़े हैं। हम साथ में ऐड जिंगल्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने वाले वेब सीरीज के लिए भी काम कर रहे हैं। हाल ही में ओटीटी पर 'सिया' नाम की एक फिल्म आई थी उसके लिए मैंने 'तितली' सॉन्ग गाया था।

दो-तीन और गाने हैं, जो आने वाले दिनों में रिलीज होने वाले हैं। मैं ये जानती हूं कि मैं जिस तरह के गाने गाती हूं, वो फिल्मी गानों से अलग हैं, लेकिन मैं ये भी जानती हूं कि अब भी एक तबका है, जो ऐसे ही गाने सुनना पसंद करता है। मैं उनके लिए गाती हूं, मैं चाहती हूं कि मैं फ्यूचर में अपनी 'ओरिजनलिटी' और अपने लिखे हुए गाने के लिए पहचानी जाऊं।

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