ये मैं हूं:पुलिस ऑफिसर पापा के साथ जो हुआ, उसे देखकर ठान लिया कि मुझे भी आईपीएस बनना है

5 महीने पहलेलेखक: कमला बडोनी

बेटियों को सही अवसर मिलें तो वो हर नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाती हैं। ईशा सिंह ने जब यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की, तो उनके मन में एक बार भी ये ख्याल नहीं आया कि वो ये नहीं कर सकती हैं। उन्होंने अपना लक्ष्य बनाया और उसे हासिल कर दिखाया। भास्कर वुमन ने ईशा सिंह से यूपीएससी परीक्षा पास करने के सीक्रेट्स जानने की कोशिश की, ताकि परीक्षा देने वाले अन्य छात्रों को इससे प्रेरणा और मदद मिल सके।

जब आप ठान लेते हैं तो कर दिखाते हैं

ईशा सिंह ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि आईपीएस में लड़कियां अभी भी कम हैं, लेकिन ये संख्या आसानी से बढ़ सकती है, यदि बेटियों को सही अवसर दिए जाएं। मशहूर लॉयर और एक्टिविस्ट आभा सिंह और पुलिस ऑफिसर वाई पी सिंह की बेटी ईशा ने अपने परिवार के बारे में बताते हुए कहा, “मेरे नाना जी आर. बी. सिंह भी पुलिस में थे और मां की शादी के बाद वो उन्हें गृहस्थी के साथ ही करियर पर फोकस करने के लिए कहते थे। नाना जी छुट्टियों में हमें अपने साथ ले जाते थे और बहुत सारी बातें सिखाते। हमें परिवार से ही इतना कुछ सीखने को मिला है कि कुछ कर दिखाने का जज्बा बचपन से ही मन में आ चुका था।

आठ साल की उम्र में तय कर लिया था कि मुझे आईपीएस बनना है

मुझ पर मेरे पिता वाई पी सिंह का बहुत प्रभाव रहा है। वो एक इमानदार पुलिस ऑफिसर रहे हैं और उन्होंने अपने एंटी-करप्शन स्टैंड को कभी नहीं छोड़ा। उनकी राह में चाहे कितनी ही रुकावटें आईं, लेकिन उन्होंने कानून का साथ कभी नहीं छोड़ा। जब मेरे पापा ने वीआरएस लिया, तब मैं आठ साल की थी। उस समय तो मैं कुछ कर तो नहीं सकी, लेकिन उस समय मैंने ये जरूर तय कर लिया था कि मुझे आईपीएस बनना है। मैं अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हूं जिसने खाकी को करियर के रूप में चुना और इस बात का मुझे बहुत फख्र है।

कामयाब होने के लिए सपने देखना जरूरी है

आठवीं तक मैं एवरेज स्टूडेंट थी, लेकिन दसवीं में मैंने तय किया कि अब मैं अच्छे नंबर लाकर दिखाउंगी। तब मैं अजमेर में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रही थी। मेरे साथ के बच्चे जब सो रहे होते थे, तब मैं तीन बजे सुबह उठकर पढ़ाई करती थी। उस साल मेरा रिजल्ट 93% था और उसके बाद मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ गया, मैं अपनी पढ़ाई के लिए और मेहनत करने लगी। मुझे लगता है कि हमें बड़े से बड़े सपने देखने चाहिए, ताकि हम उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत भी उतनी ज्यादा करें।

मैं पहली बार परीक्षा पास नहीं कर पाई

जब मैंने पहली बार यूपीएससी की तैयारी की और मैं उसे क्लियर नहीं कर पाई, तो मुझे समझ आ गया कि ये परीक्षा आपका पूरा समय मांगती है। आप एक साथ बहुत सारे काम करते हुए यूपीएससी की तैयारी नहीं कर सकते। दूसरी बार मैंने पूरी तैयारी के साथ परीक्षा दी और उसे क्लियर कर लिया। जो लोग इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, मैं उनसे ये कहूंगी कि इस परीक्षा को अपना पूरा समय दें, खूब मेहनत करें और सही प्लानिंग से परीक्षा दें, आपको सफलता जरूर मिलेगी।

ऐसे करें यूपीएससी की तैयारी

सबसे पहले अपने माइंड को क्लियर रखें, सबसे सुझाव लेने से बचें और खुद को बहुत सारी किताबों में न उलझाएं। इस कोर्स में सिलेबस ज्यादा होता है इसलिए पढ़ाई का टाइम टेबल बनाना बहुत जरूरी है। किसी कोचिंग में जाने से कुछ नहीं होता, मैंने घर में ही परीक्षा की तैयारी की है, इसलिए सबसे ज्यादा खुद पर भरोसा करें। बहुत सारी किताबों में खुद को उलझाने के बजाय सही किताबों का चुनाव करें। जनरल नॉलेज पर फोकस करें। अखबार जरूर पढ़ें। एक टॉपिक के लिए एक सोर्स देंखें, उसे बहुत बार रिवाइज करें। एक रात में पढ़कर पेपर देने का विचार मन से निकाल दें, क्योंकि यूपीएससी परीक्षा के लिए ये तैयारी काफी नहीं होती। इस एग्जाम में 50% में ही आपको कामयाबी मिल जाती है, इसका मतलब ये है कि कोई भी पूरा सिलेबस नहीं जानता। सबके पास परफेक्ट जवाब नहीं होता, आपको बस कॉम्पटेटर से बेहतर करना होता है।

ऐसे करें इंटरव्यू की तैयारी

इंटरव्यू में आपके जवाब से ज्यादा इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि आप सिचुएशन को हैंडल कैसे करते हैं। ये एक बड़ी जिम्मेदारी वाली जॉब है, इसमें आपको लोगों को सेवा करनी होती है इसलिए आप में ये क्वालिटी होनी चाहिए कि आप टफ सिचुएशन में सही निर्णय ले सकें, इसलिए इंटरव्यू के जवाब देते समय इस बात का खास ध्यान रखें। परीक्षा की तैयारी करना काफी नहीं है, आप इस क्षेत्र में कैसा काम करते हैं, इससे साबित होता है कि आप उस प्रोफेशन के लिए सही पात्र हैं या नहीं, इसलिए पहले खुद को मन से इस जॉब के लिए तैयार कर लें, फिर आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

मेरे करियर की बड़ी कामयाबी

यूपीएससी क्लियर करने से पहले मैं वकालत कर रही थी और एक वकील के रूप में मुझे करियर में बड़ी कामयाबी तब मिली, जब मैंने मुंबई के सफाई कर्मचारियों के परिवार को न्याय दिलाया। मैंने उनका केस मुफ्त में लड़ा और तीन विधवाओं को कोर्ट के आदेश पर दस लाख रुपये मुआवजा दिलवाया। इन विधवाओं के पति जब मुंबई के सेप्टिक टैंक में उतरे थे, तो दम घुटने से उनकी मौत हो गई थी। जब इनके परिवार वालों को न्याय नहीं मिला, तो मेरी मां एक्टिविस्ट और वकील आभा सिंह और मैंने इनका केस लड़कर इन्हें मुआवजा दिलवाया।