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ये मैं हूं:लव, सेक्स और धोखे की कहानियां सबके सामने लाने वाली लड़की, लोग कहते हैं बागी

एक महीने पहलेलेखक: मीना

‘सोशल मीडिया पर आप मुझे इंदुविज्युएलिटी के नाम से जानते होंगे। ऐसी लड़की जो ऐसे मुद्दों पर काम करती है जिन पर समाज बात नहीं करता और न ही उनके बारे में देखना, सुनना और पढ़ना चाहता है। मैं शरीर, शरीर की प्यास, प्यार पाने की लालसा और इमोशनल अत्याचारों को अपने चित्रों में उकेरती हूं। मैं जब लव, सेक्स और धोखे की बात को अपनी कहानियों के जरिए बाहर लाती हूं तो लोग मुझे बागी कहते हैं, लेकिन दुनिया की सुनूंगी तो सुनती ही रह जाऊंगी। मैं अपने अंदर छुपे मनमौजी, मस्तमौला और हरफनमौला राम को ढूंढ़ती हूं। अपने काम से प्यार करती हूं और अपने नाम से भी प्यार करती हूं।’ हम यहां बात कर रहे हैं आर्टिस्ट, लेखक और आर्ट टीचर इंदु ललिथा हरिकुमार की।

इंदु ललिथा हरिकुमार।
इंदु ललिथा हरिकुमार।

मुंबई की रहने वाली इंदु भास्कर वुमन से बातचीत में कहती हैं, 'मुझे बचपन से कोरे कागजों पर रंग भरना पसंद था। करिअर की शुरुआत बतौर आर्ट टीचर हुई। बच्चों को माचिस और पत्तों से आर्ट करना सिखाया। 8 साल तक बच्चों को पढ़ाया। उन्हें पढ़ाते हुए महसूस किया कि बच्चे भाषा बाद में सीखते हैं, चित्रों की भाषा पहले समझते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में पढ़ाते हुए बच्चों की सोच इतना समझने में कामयाब हुई कि वह मन के अंदर उतर गई। वे किस तरह सोचते हैं, कितना अच्छा सोचते हैं, उन्हें क्या अच्छा लगता है…ये सब मुझे समझ आ गया।
‘इंटरनेट को बनाया अभिव्यक्ति का जरिया’
इंटरनेट पर आए मुझे 25 साल हो चुके हैं। यहां मैंने बच्चों की फीलिंग्स को अपने ब्लॉग पर लिखना शुरू किया। आर्ट और लेखन दोनों मेरे प्रिय विषय रहे हैं। मेरा काम लोगों को पसंद आया और साल 2010 में प्रथम बुक ने मेरा ब्लॉग ढूंढ़ा और उसके बारे में ट्वीट किया। उसके बाद सारे पब्लिशर्स मुझे फॉलो करने लगे। बच्चों के लिटरेचर फेस्टिवल में मुझे बुलाया जाने लगा। 2014 तक मैंने केवल बच्चों के साथ काम किया और इस काम में मुझे यह भी पता चला कि पाप बच्चों के मन में नहीं होता। समाज की पापी सोच उनके अंदर गलत ढंग से सोचने के बीज बोती है।
‘समय पर शादी नहीं करोगी तो लड़कों को तुममें इंटरेस्ट नहीं रहेगा’
2015 में मुझे आर्ट रेसिडेंसी के लिए वियना जाने का मौका मिला। तब मेरी उम्र 35 साल थी। हिंदुस्तान में इस उम्र तक शादी के नहीं होने का मतलब है कि आपने समाज के एक तयशुदा मोटे नियम को तोड़ा है। लोग मुझे कहते, 'उम्र गुजर जाने के बाद मर्दों को तुम में इंटरेस्ट नहीं रहेगा। तुम्हें प्रेग्नेंट होने में कठिनाई होगी और लड़के तुम्हें नकार देंगे।' मेरे अंदर हमेशा से था कि मुझे हर वो काम करना है जिससे मैं कम्युनिटी का हिस्सा बनी रहूं, लेकिन बात तो बिगड़ रही थी। वियना में मैं अपने दादा जी पर किताब भी लिख रही थी, पर वो आइडिया फ्लॉप रहा। वियना में मेरी जो फ्लैटमेड थी वो रशियन लड़की थी। जो इंडिया के बारे में बहुत समझ रखती थी। उसको मालूम था कि भारत में शादी को बहुत इंपोर्टेंस दी जाती है। तब उसने मुझे टिंडर यूज करने की सलाह दी और मैंने टिंडर पर अपना प्रोफाइल बना लिया।

बॉडी शेमिंग से लेकर डिजिटल वायलेंस पर भी लोगों को जागरूक किया।
बॉडी शेमिंग से लेकर डिजिटल वायलेंस पर भी लोगों को जागरूक किया।

‘टिंडर टेल्स बना टर्निंग प्वॉइंट’
2016 में मैंने 100 इंडियन टिंडर टेल्स शुरू किया। मैंने टिंडर यूजर्स से उनके अनुभव मांगे। टिंडर टेल्स पर मेरी जो 9वीं कहानी थी वो मेरी अपनी कहानी थी। दरअसल वियना में मैं एक लड़के के साथ डेट पर गई। उसके साथ मैं काफी सेफ फील कर रही थी। हमने 6 घंटे साथ बिताए। कहीं खाने बैठे तो मैंने उससे कहा कि मुझे नहीं खाना, क्योंकि मैं यहां आकर मोटी हो गई हूं, लेकिन उस लड़के ने कहा कि ब्यूटी निड्स स्पेस। मैं उसके इस जवाब के बाद ‘फ्लैट’ हो गई या ये कहूं कि उस पर मर मिटी। हा हा ह...मैंने अपनी इस स्टोरी के बारे में टिंडर टेल्स पर लिखा और लोगों को ये पसंद आई। इसके बाद मेरे पास कई लोगों की कहानियां आने लगीं और सौ कहानियों का की एक लड़ी बन गई।
‘इंटिमेट रिलेशनशिप की गुत्थियों को चित्रों पर उकेरा’
इन कहानियों में कपल्स के सेक्सुअल एक्सपीरियंस हैं। ये सभी कहानियां मैंने चित्रों के जरिये बयान कीं। इस प्रोजेक्ट में इतनी कहानियां मिलीं कि इन कहानियों के जरिए मिलने वाली शोहरत और अटेंशन से घबराहट होने लगी। खैर...इन्हीं ऑनलाइन चित्रों की दुनिया से मेरे विचार, सोच लोगों तक पहुंचाए।
इन्हीं टिंडर टेल्स के दौरान एक चित्र मैंने बनाया जिसमें दिखाया कि एक लड़की और लड़का रजामंदी से सेक्सुअल रिलेशन बनाने के लिए तैयार होते हैं, लेकिन जब लड़की को दर्द होता है तो वो लड़के को धक्का मार देती है। इसके बाद वो डर जाती है कि अब मेरा पार्टनर मुझसे नाराज हो जाएगा, मुझसे बात नहीं करेगा, लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया। उसने लड़की को प्यार से गले लगाया और उसे समझाने की कोशिश की। इस चित्रात्मक कहानी को लोगों ने खूब सराहा। 100 टिंडर टेल्स मेरी लाइफ का टर्निंग प्वॉइंट बन गया। इसके बाद मैंने कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए।

समाज में सेक्सुअल इशुज को दबी-छुपी बात समझते हैं।
समाज में सेक्सुअल इशुज को दबी-छुपी बात समझते हैं।

‘बॉडी शेमिंग और डिजिटल वायलेंस पर किया अवेयर’
2017 में ‘बॉडी ऑफ स्टोरीज’ की सीरीज शुरू की। इन स्टोरीज में समाज का वो सच दिखाया जिसमें समाज ये कहता तो है कि हमारे परिवार में सब ठीक चल रहा है। पर वास्तव में सब ठीक नहीं होता। हम महिलाओं को एक तरह की बॉडी शेप में रहना सिखाया जाता है। जिनका बदन समाज के तय पैमानों में फिट नहीं होता, उन्हें हिकारत की नजर से देखा जाता है। लड़कियों पर हिदायतों की झड़ी लग जाती है। इस प्रोजेक्ट को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद 2018 में मैंने ब्रेस्ट पर चित्र बनाए, जहां पर लोगों ने ब्रेस्ट के बारे में अपने अनुभव बताए। इन अनुभवों से मालूम हुआ कि पुरुष कितने डिमांडिंग हैं। मैंने स्मॉल, बिग और ब्रेस्ट सैगिंग जैसे मुद्दों पर चित्र बनाए और महिलाओं ने अपने दुखदायी, नफरतों से भरे और अच्छे सभी तरह के अनुभव मेरे से शेयर किए। इस प्रोजेक्ट का नाम ‘आईडेंटिटी’ था यानि की पहचान था। 2019 में एक प्रोजेक्ट किया जिसमें अबॉर्शन के बारे में लोगों ने कहानियां शेयर कीं। 2020 में कपल्स के बीच वायलेंस के बारे में भी लिखा।
‘कंसेंट पर चल रहा है काम’
इस वायलेंस की परिभाषा अलग थी। ये वायलेंस डिजिटल स्पेस में होने वाली हिंसा है। लड़कियों ने जबसे सोशल मीडिया पर अपनी आइडेंटिटी बनाई है तबसे उनके मेल पार्टनर्स उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं। एक पार्टनर दूसरे पार्टनर को डिजिटल स्पेस पर कंट्रोल करता है। एक लड़का अपनी लड़की दोस्त या पत्नी से पूछता है कि तुमने अपना गहरी क्लिवेज वाला फोटो या इतना हंसता हुआ फोटो क्यों शेयर किया? या किसी लड़के ने उनका फोटो क्यों लाइक या कमेंट किया। यहां इन सभी विषयों पर बात हुई जिन पर कपल्स लड़ते हैं। इस वायलेंस की वजह से औरतों को डिजिटल स्पेस को यूज करने का तरीका भी सीमित होता है। डिजिटल दुनिया के इन अनुभवों को भी ग्राफिक के जरिए दर्शाया। इसी साल टिंडर के साथ इंटिमेट रिलेशनशिप में कंसेंट पर काम कर रही हूं।

इंदु अपने चित्रों से लीक से हटकर चलने की भी सलाह देती हैं।
इंदु अपने चित्रों से लीक से हटकर चलने की भी सलाह देती हैं।

‘कहानियों ने मुझे जुबां दी’
महिलाओं की इच्छाएं, उनकी मंजूरी, उनका प्यार और किसी से जुड़ाव और लगाव को मैं समझ पाती हूं क्योंकि मैं खुद एक स्त्री हूं और वैसे अनुभवों को देखा है, जाना है और महसूस किया है। अभी तक जो भी लिखा या चित्रों पर दिखाया वो सब लोगों के अनुभव हैं लेकिन उन्हें देखने के बाद लगा कि मैं अकेली नहीं हूं। इन कहानियों ने मुझे जुबान दी।
‘चित्र खराब चीज और भावनाओं को भी रंगीन दिखाते हैं
भारत में रिश्तों की घुटन पर बात नहीं होती। सेक्स को लेकर कुंठाएं हैं। सेक्स के नाम पर लोगों को डराया जाता है। सेफ सेक्स के तरीके नहीं बताए जाते, लेकिन हर इंसान इन सभी तरह के अनुभवों से गुजरता है। लेकिन शेयर नहीं कर पाता। मेरे चित्रों ने उन भावनाओं को और अनुभवों को जुबान दी।
चित्र एक ऐसी दुनिया है जहां दुनिया की सबसे खराब दिखने वाली चीज भी रंगीन और खूबसूरत दिखाई देती है। मैं अब तक बच्चों की 10 किताबों को लिख चुकी हूं और उनके इलस्ट्रेशन भी बना चुकी हूं। एडल्ट्स के लिए कलरिंग बुक लेकर आई हूं। फिलहाल ग्राफिक नॉवेल पर काम कर रही हूं और अभी 2021 में जेंडर सेंसटाइजेशन के लिए लाडली मीडिया अवॉर्ड से भी नवाजा गया है। चाहती हूं इसी जोश-ओ- खरोश से हमेशा काम करती रहूं।

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