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सेक्स वर्कर्स के बच्चों के लिए छोड़ी नौकरी:कोई कंधे पर रखता था हाथ तो कोई खींचता दुपट्टा, रेड में पुलिस ने भी पकड़ा

6 महीने पहलेलेखक: भाग्य श्री सिंह

'शुरुआत में जब सेक्स वर्कर के बच्चों के लिए काम के सिलसिले में रेड लाइट एरिया जाती तो जिस्म चीरती निगाहों और इशारों का सामना करना पड़ता। वहां आने वाले कस्टमर मुझे भी उनमें से एक समझ कर रेट पूछने के लिए कंधे पर हाथ रखते, कोई दुपट्टा खींचता। एक बार तो किसी ने सामने कंडोम फेंका। वहां की महिलाओं तक पहुंचने के लिए कंडोम से भरी गली में किसी तरह बच बचाकर निकलना होता। '

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में जन्मी संजीवनी हिंगणे 'स्वाधार संस्था' से जुड़ी हैं और सेक्स वर्कर के बच्चों के अलावा ट्रांसजेंडर्स और HIV पीड़ित बच्चों के लिए भी काम करती हैं। उनका लक्ष्य तंग और अंधेरी गलियों में जी रहे बच्चों के जीवन में ज्ञान का उजाला फैलाना और उन्हें एक सुरक्षित जीवन देना है ताकि वे भी देश-दुनिया में नाम कमा सकें। संजीवनी ने वुमन भास्कर से खास बातचीत में अपना सफर साझा करते हुए बताया, 'शुरुआती दिनों में सेक्स वर्कर मुझ पर विश्वास नहीं करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ मुझे सम्मान और विश्वास मिला। मैंने समझाया कि आप लोगों को जिन हालात से गुजरना पड़ रहा है, उसका सामना आपके बच्चों को न करना पड़े इसलिए उन्हें स्कूल भेजें।'

संजीवनी हिंगणे रेड लाइट एरिया के बच्चों को पढ़ाते हुए।
संजीवनी हिंगणे रेड लाइट एरिया के बच्चों को पढ़ाते हुए।

पिता से मिली समाज सेवा की प्रेरणा

मेरी शुरुआती शिक्षा मध्य प्रदेश के छोटे से शहर बुरहानपुर में हुई। हम तीन बहनें थीं। पिता मिल में जॉब करते थे और बाद में बिजनेस शुरू किया। बुरहानपुर के स्कूल तब हिंदी मीडियम थे। पिता चाहते थे कि बेटी और समाज की लड़कियां खूब पढ़े-लिखें और इंग्लिश भी सीखें। लेकिन 40 साल पहले माहौल ऐसा था कि क्रिश्चन मिशनरी स्कूल में लोग बच्चों को भेजने से डरते थे कि कहीं उनका धर्म परिवर्तन न करा दिया जाए। मेरे पिता घर-घर गए और लोगों को समझाया कि मेरी बेटी भी 5 साल की है, मैं ब्राह्मण हूं और मैं अपनी बच्ची का अंग्रेजी स्कूल में दाखिला करा रहा हूं, आप भी कराइए। पापा ने 12 से 15 बच्चों के साथ नेहरू मांटेसरी स्कूल शुरू किया। अब स्कूल में काफी बच्चे हैं। तभी से मेरे मन में यह बीज पड़ा कि समाज और बच्चों के लिए कुछ करना है।

30 साल की उम्र से शुरू किया सफर

मैंने केमिस्ट्री से एमएससी पास की। इसी दौरान शादी हो गई, लेकिन पढ़ाई जारी रही। मेरे पति सॉलिसिटर हैं और 2 बच्चे हैं। जॉब शादी के बाद लगी। सपना था अपने घर का और समाज के लिए काम करने का। प्रॉपर्टी खरीदते ही मैंने नौकरी छोड़ दी और सेक्स वर्कर्स के बच्चों के लिए काम करना शुरू किया।

पति ने कहा जो चाहे करो, लेकिन सेफ रहो

मैंने पति को बताया कि मैं सेक्स वर्कर्स के बच्चों के लिए काम करना चाहती हूं। इसके लिए मुझे रेड लाइट एरिया में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक रहना होगा ताकि यह जान सकूं कि वहां की क्या समस्याएं हैं। पति ने कहा कि ख्याल अच्छा है लेकिन क्या तुम यह कर पाओगी? क्या तुम वहां सुरक्षित रहोगी? जो दिल चाहे वो करो, लेकिन खुद को सेफ रखते हुए।

रेड लाइट एरिया के बच्चों के हालात सुधारने में संजीवनी हिंगणे के पति ने मोरल सपोर्ट दिया।
रेड लाइट एरिया के बच्चों के हालात सुधारने में संजीवनी हिंगणे के पति ने मोरल सपोर्ट दिया।

शुरुआत में दी यह नसीहत

जब मैंने काम की शुरुआत की तो पति ने कुछ नसीहतें दीं। कहा कि वहां पर खाया-पिया न करो और घर आ कर तुरंत नहाया करो। शुरू में मैंने यह किया, लेकिन अब तो यह डेली लाइफ का हिस्सा बन चुका है और मैं सेक्स वर्कर के बच्चों को बहुत प्यार करती हूं। शुरुआत में मैं जब 'स्वाधार संस्था' से जुड़ी तो सर्वे के लिए एक स्टाफ को लेकर रेड लाइट एरिया में जाती थी ताकि वहां की परेशानियां पता चलें। वहां महिलाओं से बात करती और समझाती कि मैं बच्चों के लिए काम कर रही हूं। उन्हें शिक्षा और सही पोषण का महत्व बताती।

कंडोम से भरी गली में कूद कर जाना होता था अंदर

मन में ठान लिया था कि यह करना है, लेकिन असली चुनौती वहां जा कर समझ आई। कई सौ साल पुराने मकान, तंग गलियों में सीलन और गंदगी की मिली जुली बदबू के भभके से नाक भर जाती। रेड लाइट एरिया की कंडोम से भरी गलियों में कूद-कूद कर जाती और हर घर का दरवाजा खटखटाती। महिलाओं से बात करती, उन्हें समझाती। शुरुआत में वो मुझे शक की नजर से देखतीं कि कहीं मैं कोई मुखबिर तो नहीं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता मैंने वहां काफी प्यार और विश्वास कमाया।

रेड लाइट एरिया की महिलाओं का प्यार और विश्वास ही संजीवनी की असली कमाई है।
रेड लाइट एरिया की महिलाओं का प्यार और विश्वास ही संजीवनी की असली कमाई है।

रेड लाइट एरिया की महिलाओं के टेस्ट में हुई पास

पहले जब रेड लाइट एरिया में महिलाओं के पास पहुंचती तो वो कहतीं- 'दीदी बैठो ना।' मैं देख सकती थी कि यह वही बिस्तर होता था जो कस्टमर इस्तेमाल करते थे। कई बार वो चाय या ठंडा ऑफर करतीं। मैं चाह कर भी मना नहीं कर पाती। इससे उनके मन में यह सवाल उठ सकता था कि जब आप हमें गंदा समझती हैं तो हमारे लिए काम क्या करेंगी? उन्होंने इस तरह से मेरा खूब टेस्ट लिया जिसे मैंने बखूबी पास किया।

बच्चों के लिए शुरू किया डे केयर शेल्टर और पौष्टिक आहार

शुरुआत के 3 साल तक मैं केवल डेढ़ घंटे का समय ही दे पाती थी। 2007 से संस्था के माध्यम से मैंने सुबह 10 बजे से ले कर शाम 5 बजे तक के लिए उन बच्चों के लिए डे केयर सेंटर की शुरुआत की। इसमें हम बच्चों के रहन-सहन और खान-पान का ख्याल रखते थे। इससे पहले कस्टमर बच्चों को जो पैसे देते थे उससे वो रेहड़ी या दुकान पर जा कर कुछ खाते थे जोकि पौष्टिक आहार नहीं होता था। संस्था ने उन्हें पौष्टिक खाना देना शुरू किया।

'स्वाधार डे केयर शेल्टर' में बच्चों की पढ़ाई और पोषण युक्त खानपान का ख्याल रखा जाता है।
'स्वाधार डे केयर शेल्टर' में बच्चों की पढ़ाई और पोषण युक्त खानपान का ख्याल रखा जाता है।

ताकि चैन से सो सकें बच्चे

रेड लाइट एरिया में रात के समय जब मांएं कस्टमर के साथ बिजी होतीं तो बच्चे सड़कों पर यहां-वहां भटकते और खाक छानते। इसलिए 2007 में ही हमने नाइट शेल्टर शुरू किया। शिक्षा की बात तो बाद में आती है सबसे पहले पेट भरा होना और सिर पर छत होना जरूरी होना है।

नाई ने किया बाल काटने से इनकार

गंदगी की वजह से कई बीमारियां भी पनपती हैं। बालों में जूं की समस्या आम है। बच्चों के बाल कटाने के लिए जब हम बच्चों को नाई के पास ले जाते तो वो कहता कि बालों में बहुत जूं हैं दुकान से जाओ। मैंने समझाया कि ऐसा है तो तुम खुद एरिया में आकर बच्चों के बाल काट दिया करो।

बच्चों को मिला स्कूल और बराबरी का हक

राइट टू एजुकेशन बिल से पहले स्कूल में एडमिशन के लिए बर्थ सर्टिफिकेट और पिता का नाम मांगा जाता था। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी। इस चैलेंज से निपटने के लिए बच्चों का डेंटल चेकअप कराते थे ताकि उनकी उम्र पता चल सके। शुरुआत में स्कूल में एडमिशन में काफी दिक्कत हुई। लेकिन अब बच्चे स्कूल जा रहे हैं। कक्षा 5 तक बच्चों की पढ़ाई NGO के जिम्मे है। इसके बाद उन्हें स्कूल में भेजते हैं। वो भी बाकी बच्चों के साथ बैठ कर पढ़ते हैं। मेरी पढ़ाई एक लड़की ने डांस स्कूल खोला है और वो काफी अच्छा काम कर रही है।

भगवान जैसा मिलता है सम्मान

एक सुबह मैं काम के सिलसिले में रेड लाइट एरिया पहुंची तो धंधे से लौटती लड़की से पूछा- 'दत्ता भगवान के मंदिर जा रही हूं, तू भी साथ चल ले।' वो बोली- 'ग्राहक के पास से आ रही हूं। मंदिर तो मैं चल लूं, लेकिन आपके साथ ऐसे नहीं जा सकती। नहा-धोकर ही आपके साथ दर्शन के लिए चलूंगी।'

रेड लाइट एरिया की महिलाएं संजीवनी पर बहुत विश्वास करती हैं।
रेड लाइट एरिया की महिलाएं संजीवनी पर बहुत विश्वास करती हैं।

ट्रांसजेंडर और HIV पीड़ितों के लिए किया काम

कोरोना काल में जब आवाजाही पूरी तरह से ठप्प थी तो पुलिस से स्पेशल परमिशन लेकर हमारी संस्था ने रेड लाइट एरिया और इससे सटी ट्रांसजेंडर की गली में मदद पहुंचाई। हम HIV पीड़ित बच्चों के लिए भी काम करते हैं। हमने उन्हें दो महीने तक अनाज और खिचड़ी, बच्चों के लिए अंडा, दूध, बिस्कुट और दवाइयां मुहैया कराईं। हमारे फैमिली काउंसलिंग सेंटर में बच्चों की पढ़ाई और उन्हें सही जीवन देने के लिए काम किया जाता है।

कोरोना काल में रेड लाइट एरिया, ट्रांसजेंडर और HIV पीड़ितों की मदद की।
कोरोना काल में रेड लाइट एरिया, ट्रांसजेंडर और HIV पीड़ितों की मदद की।

सब साथ मिल कर करें काम

हम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर काम करते हैं। मैं चाहती हूं कि अलग-अलग राज्यों की सरकारें भी इसमें पहल करें। केवल NGO के भरोसे यह अभियान बड़े स्तर पर सफल नहीं हो पाएगा। हम सेक्स वर्कर के बच्चों के एजुकेशन, ट्रांसजेंडर के बच्चों और चाइल्ड लेबर के लिए मिलकर काम करें।

समाज के लिए संदेश

जरूरत है थोड़ी संवेदनशीलता और जागरूकता की। आंख बंद कर लेने से समाज और परिस्थितियां नहीं बदलेंगी। जब मन में करुणा होगी तो आप अपने घर और आस-पास से ही इस बदलाव की शुरुआत कर पाएंगे।

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