• Hindi News
  • Women
  • This is me
  • Started Jewelery Business In 5 Thousand Rupees, Now Turnover Of Lakhs, Competition From Brands Like Tanishq, Malabar Gold

ये मैं हूं:5 हजार रुपए में शुरू किया था बिजनेस, अब लाखों का टर्नओवर, रवीना टंडन से लेकर सोहा अली खान तक हैं दीवानी

8 महीने पहलेलेखक: मीना

बिजनेस आइडिया कहां से किस दिशा से आ धमके आप कुछ नहीं कह सकते। मुझे नहीं मालूम था कि मेरे बचपन के अनुभव ही मेरे करिअर का बूस्टर डोज बनेंगे। परिवार में कोई बिजनेस नहीं करता, कोई वो काम नहीं करता जो मैंने किया। अब कभी-कभी खुद पर थोड़ा सा गुमान हो उठता है कि मैंने अपने फैमिली ट्री में कुछ नया करके अपना एक नया बीज बोया। उम्मीद, कुछ नया कर गुजरने का जज्बा लिए ये शब्द हैं दिशी सोमानी के। ग्वालियर में पली-बढ़ी 36 साल की दिशी सोमानी वुमन भास्कर से खास बातचीत में कहती हैं, ‘स्कूली शिक्षा खत्म करके सपनों की दुनिया में जीने वाली यह लड़की ग्वालियर से दिल्ली आ गई। दिल्ली में आकर 11वीं, 12वीं की पढ़ाई पूरी करके दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया।

दिशी ने कभी नहीं सोचा था कि वे ज्वेलरी के बिजनेस में जाएंगी, लेकिन जैसे-जैसे वे आगे बढ़ती रहीं, वैसे-वैसे उन्हें मौके मिलते रहे।
दिशी ने कभी नहीं सोचा था कि वे ज्वेलरी के बिजनेस में जाएंगी, लेकिन जैसे-जैसे वे आगे बढ़ती रहीं, वैसे-वैसे उन्हें मौके मिलते रहे।

दिल्ली ने बदल दी जिंदगी
इस शहर ने मुझे इतना सबकुछ सिखाया कि लगा जिंदगी तो अब शुरू हुई। जितना मेरे दोस्तों का सर्कल बड़ा होता गया उतने मेरे अनुभव और सपने बड़े होते गए। मैं कई बार जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि अगर मैंने शहर नहीं बदला होता, रेगुलर कॉलेज नहीं गई होती तो शायद आज मैं ये सबकुछ नहीं कर पाती, जो आज कर रही हूं।
मां-पिता के गुणों से बना बिजनेस मॉडल
मेरे पिता इंजीनियरिंग की फील्ड से और मां आर्ट एंड क्राफ्ट की क्रिएटिव पर्सनैलिटी। मुझमें मैनेजमेंट और रचनात्मक दोनों तरह के गुण पेरेंट्स की वजह से आए। बीकॉम ऑनर्स खत्म करने के बाद मैं दुबई गई और वहां के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी से एमबीए किया। वहां से आने के बाद दिल्ली आई और आईसीआईसीआई बैंक में मोटी रकम वाली नौकरी मिली, लेकिन फिर भी वो क्रिएटिव फैक्टर नहीं मिल रहा था, इसलिए बैंक की नौकरी छोड़ दी।

दिशी के मुताबिक, 'छोटे शहरों से निकली लड़कियों के लिए दिल्ली जैसे शहर कल्चरल शॉक तो होते ही हैं, लेकिन समय के साथ-साथ दिल्ली उस इंसान को अपना बना लेती है।
दिशी के मुताबिक, 'छोटे शहरों से निकली लड़कियों के लिए दिल्ली जैसे शहर कल्चरल शॉक तो होते ही हैं, लेकिन समय के साथ-साथ दिल्ली उस इंसान को अपना बना लेती है।

चपन का वो कारीगर और मेरा स्टार्टअप
जिस वक्त मैं मैनेजमेंट और क्रिएटिविटी दो पैमानों को जोड़कर करिअर के बारे में सोच रही थी, तब मुझे वापस अपना बचपन याद आया और साथ ही याद आया वो कारीगर जो कभी मां या दादी के गहने बनाने घर आता था। फिर मुझे समझ आया कि मैं क्यों न वही ज्वेलरी का बिजनेस शुरू करूं जो मैंने बचपन में देखा।
मैंने फिर ज्वेलरी डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग का कोर्स किया। खुद को ज्वेलरी के पूरे ज्ञान से भरकर और हर तरह से खुद को तैयार करके ज्वेलरी बिजनेस शुरू किया। 2015 में दिशीज डिजाइनर ज्वेलरी नाम से ऑनलाइन काम शुरू किया।
ऑनलाइन काम की शुरुआत
जिस वक्त मैंने ऑनलाइन काम शुरू किया उस समय इंडिया में ऑनलाइन ज्वेलरी खरीदने का कल्चर नहीं था। लोगों को हर गहने को हाथ में देख-परखकर खरीदने की आदत थी, लेकिन मैंने वो कल्चर बदला। मैं खुद भी हिचकिचा रही थी, ऑनलाइन काम शुरू करने पर, लेकिन फिर मन बनाया कि ये मेरा नया आइडिया है और मुझे लोगों को इसकी लत लगानी है।

दिशी का कहना है कि मेरे लिए शहर धीरे-धीरे बड़े हुए और यही वजह है कि दुबई जाने पर उन्हें ज्यादा बड़ा झटका नहीं लगा। अब वे देश-विदेश काम के सिलसिले में जाती रहती हैं।
दिशी का कहना है कि मेरे लिए शहर धीरे-धीरे बड़े हुए और यही वजह है कि दुबई जाने पर उन्हें ज्यादा बड़ा झटका नहीं लगा। अब वे देश-विदेश काम के सिलसिले में जाती रहती हैं।

5 हजार का बिजनेस अब 50 लाख के टर्नओवर में
मुझे अपने देश की महिलाएं फ्रांस की तरह फैशनेबल लड़कियां बनानी थीं। इन्हें ज्वेलरी से सजाना-संवारना था। बहुत महंगा नहीं, सस्ते दामों में सामान देना था। वर्किंग वुमन पर किस तरह की ज्वेलरी अच्छी लगेगी, ये सारी बातें सोचकर काम किया। इस काम की शुरुआत मैंने पांच हजार रुपए में की थी और अब 50 लाख का टर्नओवर है।

बड़े ब्रांड्स से किया कॉम्पीटिशन
मेरा कोई बिजनेस का बैकग्राउंड नहीं था। इसलिए मेरे लिए ज्वेलरी को समझना, खरीदना और ऑनलाइन मार्केट को समझना सब कुछ टास्क रहा। तनिष्क, मालाबार गोल्ड जैसी कंपनियों के सामने ज्वेलरी का ये बिजनेस शुरू करना और उनके साथ कॉम्पिटिशन करना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण रहा। आज काम इस लेवल पर पहुंच गया है कि अभिनेत्री सोहा अली खान, रवीना टंडन, श्वेता तिवारी, एरिका जे फर्नांडीस जैसी अभिनेत्रियों ने भी मेरी ज्वेलरी पहनी है। 2017 में ब्रांड ऑफ द यीअर अवॉर्ड जूही चावला द्वारा मुझे दिया गया। 2018 में वुमन अचीवर का अवॉर्ड अभिनेत्री वाणी कपूर की तरफ से दिया गया।
जो दिल ने कहा, वही किया
यह सबकुछ मैं इसलिए कर पाई क्योंकि जो दिल ने कहा वो मैंने किया, जो सपने देखे उन्हें पूरा करने के लिए जी जान लगा दी। फैमिली का सपोर्ट हमेशा रहा, लेकिन ज्वेलरी का किसी को कोई आइडिया नहीं था। इस वजह से इस बिजनेस की उथल-पुथल से लेकर सभी चुनौतियां मैंने खुद झेलीं और उनसे सीखा। काम करती रही और गलतियों से सीखती रही।

खबरें और भी हैं...