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मौका मिला और लपक लिया:शादी के 12 साल बाद शुरू किया अपना बिजनेस, अब हाउसवाइफ ही नहीं बिजनेसवुमन है मेरी पहचान

एक महीने पहलेलेखक: मीना

‘सिर पर चुन्नी, बालों में कसा हुआ जूड़ा और चेहरे पर जल्दी काम निपटाने की हपड़-धपड़ के साथ मेरी सुबह किचन में खट खट काम करने के साथ होती, तो कभी-कभी ‘हाउस हेल्प’ को निर्देश देते हुए। मुझे लगता है हर हाउसवाइफ की सुबह ऐसे ही होती है। अरे अब हाउसवाइफ नहीं! होम मेकर, क्वीन ऑफ दि हाऊस कहा जाता है। शादी के बाद ये सारे बड़े-बड़े तमगे एक लड़की के नाम हो जाते हैं। शादी से पहले कमाई मेरी ट्रॉफियां किचन में रखे मसालों के डिब्बों में बंद हो गईं और मेरे सपने चूल्हे की आग की तरह रोज दहकते। ऐसा नहीं था कि मेरे सपनों की उड़ान कोई कतर रहा था, बल्कि शादी और बच्चों के बीच मैं फंस गई थी। रोज अपनी पहचान बनाने का कीड़ा मेरे भीतर कुलबुलाता और एक दिन मुझे अपने नाम का जहां बनाने का मौका मिला। अब मैं मिस्टर चौधरी की वाइफ ही नहीं ‘ई क्लैट सुपिरियर’ की को-फाउंडर से पहचानी जाती हूं। ये शब्द और खुशी है दिल्ली की रहने वाली शगुफ्ता चौधरी की।

शगुफ्ता चौधरी
शगुफ्ता चौधरी

37 साल की शगुफ्ता भास्कर वुमन से बातचीत में कहती हैं, ‘मेरी शादी जिस घर में हुई वहां सभी पॉलिटिक्स में हैं और मायके में बिजनेसमैन। तो ऐसे में मुझे मेरी जरूरत की सारी चीजें एक बार में बोलने पर मिलतीं। पर एक लड़की के लिए महंगे कपड़े, गहने, बड़ा घर, अच्छा खाना और मखमली बिस्तर ही सबकुछ नहीं होता। मेरे अपने सपने थे। मैं कुछ करना चाहती थी। इसी उमड़न-घुमड़न में दिल्ली में बीए तक की पढ़ाई पूरी की और फिर निकाह हो गया। शादी के बाद मेरी पहचान मेरे पति और ससुर के नाम से होने लगी। घर के काम और बच्चों को संभालते हुए 12 साल निकल गए। तीन बच्चे हो गए। जिनमें बड़ा बेटा 13 साल का बीच वाला 11 साल और छोटा 3 साल का है।
ऐसे शुरू हुई ‘खूबसूरत’ बनाने की कहानी
मुझे संजने-संवरने का बहुत शौक रहा।पर पीसीओडी की वजह से चेहरे पर बाल आते और मेलानिन ज्यादा बनने से चेहरा सांवला नजर आता। इस वजह से लिपस्टिक और आईलाइनर ही मेरा मेकअप रह गया। मैं डॉक्टर के पास ट्रीटमेंट के लिए जाती। एम्स के डॉक्टर ने एक प्रोडक्ट से मुझे इंटरड्युस कराया और वो प्रोडक्ट था ई क्लैट सुपिरियर का। इन्हें मैंने इस्तेमाल किया और मुझे फायदा हुआ। मेरी स्किन की छोटी-छोटी प्रॉब्लम्स धीरे-धीरे ठीक होने लगीं। इन्हें मैंने अपनी दोस्तों को भी शेयर किया और उन्हें भी फायदा हुआ। इस कंपनी के सीईओ ने मुझे इससे जोड़ा। ये सिर्फ मौका नहीं था बल्कि मेरी आंखों में खूबसूरती की चमक को जन्म देने वाला जहां था, क्योंकि शादी के बाद हम महिलाएं सोचती रह जाती हैं कि आज कुछ नया शुरू करेंगे या कल करेंगे, लेकिन उस पर जल्दी अमल नहीं कर पातीं। सपने कब पूरे होते हैं, उसकी कोई उम्र नहीं होती। जब मेरे पास ये अपॉरच्युनिटी आई तो मैं मना नहीं कर पाई। करने को मैं अपना फैमिली बिजनेस संभाल सकती थी, लेकिन वो फैमिली बिजनेस था उसमें मैंने खुद से कुछ शुरू नहीं किया था। हालांकि, ससुराल में मुझे सभी लोग बहुत सपोर्ट करते थे, मियां जी हमेशा कहते थे कि तुम्हें जो शुरू करना है वो करो। लेकिन मुझे मौका नहीं मिल रहा था। ये मौका अब मुझे मिल गया। ईक्लैट एक फ्रेंच वर्ड है जिसका मतलब चमकदार है। तो यहां से शुरू हुई महिलाओं को खूबसूरत बनाने की कहानी।

शादी के बाद मुश्किल होता है करिअर बनाना
शादी के बाद मुश्किल होता है करिअर बनाना

स्किन और हेयर केयर की समझी नई वॉक्युबलरी
शादी के बाद लगा था कि अब कुछ नहीं कर पाऊंगी। अपना बिजनेस शुरू करने का सपना धुंधलाता जा रहा था, लेकिन इस ब्रांड के साथ जुड़कर सपनों को राह मिली। यहां आते ही मेरी जो पढ़ाई-लिखाई छूट गई थी वो वापस शुरू हुई। पर इस बार किसी एग्जाम को पास करने के लिए नहीं बल्कि ‘फ्रेंच वुमन’ की तरह हिंदुस्तान की महिलाओं को सुंदर बनाने के लिए। यहां आकर मैंने पिग्मेंटेशन, फाइन लाइन्स, रिंकल्स, डार्क सर्कल के बारे में पढ़ा। स्किन प्रॉब्लम और हेयर केयर के बारे में किताबें पढ़ीं। इस कंपनी के साथ जुड़कर विटामिन सी, पिग्मेंट करेक्टिंग सीरम, आई सीरम, नियासिनामाइट सीरम जैसे प्रोडक्ट्स के बारे में जाना।
फीडबैक से मिलती है संतुष्टि
हिंदुस्तान में महिलाएं विदेशी ब्रांड्स पर ज्यादा भरोसा करती हैं जबकि विदेशी ब्रांड्स में स्टेरॉयड ज्यादा होता है जो स्किन को डैमेज करता है, इन सबके बारे में महिलाओं को समझाया। महिलाओं के लिए खूबसूरती क्यों जरूरी है, ये उन्हें बताया। हमने सभी तरह के स्किन प्रॉब्लम्स के लिए फेसवॉश, मॉश्चराइजर, सीरम जैसे प्रोडक्ट्स के बारे में लोगों को बताया। अब जब यंग एज लड़कियों से लेकर 40 की उम्र की महिलाओं के मेसेज आते हैं और वे बताती हैं कि हमारे प्रोडक्ट्स यूज करके उन्हें कितना फायदा हुआ। कुछ महिलाएं जो पिग्मेंटेशन की वजह से घर से नहीं निकल पाती थीं, वे घर से बाहर निकलीं। कुछ लड़कियां जिनकी शादी डार्क स्किन कॉम्पेक्शन की वजह से नहीं हो पा रही थी उनकी शादी हुई। जब ऐसे खुशी भरे फीडबैक मिलते हैं तो अपने काम को लेकर खुशी होती। 2019 से मैंने ईक्लैट के प्रोडक्ट्स का अपना स्टार्टअप शुरू कर लिया है।

पहचान को मिला नया आसमान
पहचान को मिला नया आसमान

अब मेरे नाम से मेरी पहचान
अब मेरे बच्चे मुझे महिलाओं को स्किन केयर और हेयर केयर के बारे में जानकारी देते हुए मुझे सुनते हैं, तो उन्हें गर्व होता है। वे खुशी से बाहर कह पाते हैं कि मेरी मदर वर्किंग वूमन है। हमारे मुस्लिम समुदाय में महिलाओं को बाहर काम करने के लिए बहुत कम मोटिवेट किया जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि हर महिला को अपना कुछ न कुछ काम करना चाहिए। उसके हाथ में उसकी कमाई हुई कमाई आनी चाहिए, इससे उसका आत्मविश्वास अलग ही होता है। कोई भी महिला जिसे लगता है कि अब वो हाउसवाइफ है और उसकी जिंदगी सिर्फ घर और बच्चों के बीच में रह गई है तो उसे उससे बाहर निकलना पड़ेगा। अपने लिए मौके तलाशने होंगे। खुद के लिए रास्ते बनाने होंगे और अगर आपके सास-ससुर, पति सपोर्टिव हैं, तो कोई भी महिला कुछ भी काम कर सकती है। अब मैं गर्व से कह सकती हूं कि मेरी अपनी पहचान, अपना काम। लोग अब मिसिस शगुफ्ता चौधरी को जानते हैं।

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