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ये मैं हूं:पैर जख्मी हुआ, हाथ का अंगूठा टूटा, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ, जख्मी हाथ से उस लड़की को मारा

5 महीने पहलेलेखक: कमला बडोनी

मर्दों का खेल कहे जाने वाले बॉक्सिंग में अपनी अलग पहचान बनाने वाली हरियाणा की छोरी सिवी बूरा से जब वुमन भास्कर ने बात की, तो उनकी बहन यानी वर्ल्ड नंबर 2 बॉक्सर स्वीटी बूरा का जिक्र भी हुआ। किसान परिवार की बेटी सिवी किस तरह अपनी बहन के नक्शेकदम पर चलते हुए बॉक्सिंग में सफलता के परचम लहरा रही हैं, इसकी कहानी खुद सिवी ने हमें बताई।

सिवी बूरा बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करते हुए
सिवी बूरा बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करते हुए

दीदी को देखकर बनी बॉक्सर

मैं अपनी बड़ी बहन स्वीटी बूरा को अपना रोल मॉडल मानती हूं, उन्हें देखकर ही मुझे इस गेम का शौक चढ़ा। मेरे पापा महिंदर सिंह जी को भी गेम्स का बहुत शौक था इसलिए उन्होंने हमें स्पोर्ट्स में आगे बढ़ने का हौसला दिया। गांव के लोग पापा से कहते थे कि बेटियों को ऐसे खेल में क्यों भेज रहे हो, लड़कियां बिगड़ जाएंगी, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। पापा ने कभी बेटा-बेटी में फर्क नहीं किया। उन्होंने हमारे भाई को जितनी आजादी दी, हमें भी उतनी आजादी मिली। कभी किसी चीज के लिए रोका नहीं। पापा सिर्फ हमें खेलते हुए और जीत कर देश के लिए मेडल लाते हुए देखना चाहते थे। हम खुशनसीब हैं कि हमें ऐसे पिता मिले हैं। मेरी दीदी पहले कबड्डी खेलती थीं, लेकिन पापा चाहते थे कि दीदी इंडिविजुअल गेम खेलें। फिर उन्होंने दीदी को बॉक्सिंग की कोचिंग के लिए भेजा। उस समय दीदी हमारे गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूर हिसार में सुबह पांच बजे साइकिल से ट्रेनिंग के लिए जातीं, फिर घर आकर स्कूल जातीं, शाम को फिर ट्रेनिंग के लिए निकल जातीं। उन्हें पता ही नहीं चलता था कि कब दिन शुरू हुआ और कब खत्म।

सिवी बूरा अपनी बड़ी बहन स्वीटी बूरा के साथ बॉक्सिंग रिंग में
सिवी बूरा अपनी बड़ी बहन स्वीटी बूरा के साथ बॉक्सिंग रिंग में

खेलते समय सिर्फ गोल्ड जीतने का जुनून होता है

हम तीनों भाई-बहन को खेलते समय सिर्फ गोल्ड जीतने का जुनून होता है। इसके लिए हम दिनरात मेहनत करते हैं। स्वीटी दीदी जब पहली बार नेशनल गोल्ड जीतकर आईं, तो उन्हें देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। पूरा गांव उनके स्वागत में खड़ा था। तब दीदी ने मुझसे कहा कि अब तुम्हें भी बॉक्सर बनना है। उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया और मैंने भी खुद को बॉक्सिंग के लिए तैयार कर लिया। दीदी के बाद जब मैंने कोचिंग के लिए जाना शुरू किया, तो मेरी भी यही दिनचर्या होती, सुबह पांच बजे से रात तक पढ़ाई और बॉक्सिंग में ही दिन बीत जाता था। हमें सब कुछ आसानी से नहीं मिला, इसके लिए हमने बहुत संघर्ष किया है। जहां तक स्वीटी दीदी की बात है, तो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में अभी वो देश ले लिए सिल्वर लाई हैं, लेकिन अगली बार वो गोल्ड लेकर आएंगी, इसका मुझे पूरा भरोसा है। दीदी ने स्टेट और नेशनल लेवल पर ज्यादातर गोल्ड मेडल ही जीते हैं, अब वो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में गोल्ड लाएं ऐसी मेरी ईश्वर से प्रार्थना है। मैं भी उन्हीं की तरह दिनरात गोल्ड मेडल का पीछा कर रही हूं। मैंने स्टेट और नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल जीते हैं, अब इंटरनेशनल बॉक्सिंग में गोल्ड जीतना है।

बॉक्सिंग में मेडल जीतने के बाद गांव वालों के साथ सिवी बूरा ने अपनी बड़ी बहन स्वीटी बूरा का स्वागत किया
बॉक्सिंग में मेडल जीतने के बाद गांव वालों के साथ सिवी बूरा ने अपनी बड़ी बहन स्वीटी बूरा का स्वागत किया

मेरा अंगूठा टूटा, हौसला नहीं

मेरे साथी प्लेयर्स जब मुझसे पूछते हैं कि रिंग में उतरते समय तुम नर्वस नहीं होती, तो मेरा जवाब होता है, मुझे उस समय सामने वाली लड़की को हराने के अलावा और कुछ नहीं सूझता। वो भी तो हमारी तरह इंसान है, फिर किसी को देखकर नर्वस क्यों होना। 2018 में रोहतक में बॉक्सिंग की ट्राइल के समय मेरे दाहिने हाथ के अंगूठे पर चोट लग गई और अंगूठा टूट गया। लेकिन मेरा ध्यान अंगूठे के दर्द से ज्यादा उस लड़की को हराने पर था। अगले राउंड में मैंने उस लड़की को अपने जख्मी हाथ से ही बहुत मारा। ट्राइल के बाद ग्लव्स निकालते समय मेरा अंगूठा हाथ से अलग हो गया। मेरा अंगूठा ठीक होने में एक साल लग गया। इस दौरान डॉक्टर ने कहा कि तुम चिकन, अंडा खाया करो, इससे तुम्हारा हाथ जल्दी ठीक हो जाएगा। हम वेजीटेरियन हैं, लेकिन अंगूठा ठीक करने के लिए मैंने एक साल तक नॉन-वेजीटेरियन फूड भी खाया। मैं जल्द से जल्द अपना अंगूठा ठीक करना चाहती थी, ताकि फिर से रिंग में बॉक्सिंग के लिए तैयार हो जाऊं।

सिवी बूरा बॉक्सिंग रिंग में प्रैक्टिस करते हुए
सिवी बूरा बॉक्सिंग रिंग में प्रैक्टिस करते हुए

मैंने पैर की सर्जरी नहीं होने दी

पिछले साल खेलते समय मेरा बायां पैर मुड़ गया। डॉक्टर ने कहा, सर्जरी करानी होगी और पैर को ठीक होने में छह महीने लग जाएंगे। मेरे लिए ये नामुमकिन था। इसके बाद मैंने सारे घरेलू नुस्खे आजमा डाले, फिजियो थेरेपी की, पैर की एक्सरसाइज शुरू कर दी। इसका नतीजा ये हुआ कि मेरा पैर बिना सर्जरी के ठीक हो गया और मैंने फिर से प्रैक्टिस शुरू कर दी। मुझे लगता है, यदि हमारी तैयारी सही है, तो हमें जीतने से कोई नहीं रोक सकता। 2021 में मैंने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप में सिल्वर जीता।

सिवी बूरा ने एक्सरसाइज से पैर ठीक किया और सर्जरी नहीं होने दी
सिवी बूरा ने एक्सरसाइज से पैर ठीक किया और सर्जरी नहीं होने दी

वेजीटेरियन फूड स्टेमिना बढ़ाता है

अंगूठा ठीक होने के बाद मैंने नॉन वेजीटेरियन फूड खाना छोड़ दिया। मुझे लगता है वेजीटेरियन फूड भी स्टेमिना बढ़ाता है। हम प्लेयर्स को अपनी डाइट पर बहुत ध्यान देना पड़ता है, अपनी इच्छाएं मारनी पड़ती हैं, मीठा खाना बिल्कुल छुट जाता है। जब हमें वजन घटाना होता है, तो हम रोटी खाना तक छोड़ देते हैं। जूस, सूप, सलाद ही खाते हैं। हम तीनों भाई-बहन स्पोर्ट्स में हैं इसलिए सब डाइट की अहमियत समझते हैं। हमारे घर में खाना इसी तरह बनता है, ताकि हमारे स्पोर्ट्स पर इसका बुरा असर न पड़े। मां हमारी जरूरत के हिसाब से ही खाना बनाती हैं।

सिवी बूरा अपनी बड़ी बहन स्वीटी बूरा और बड़े भाई मनदीप बूरा के साथ
सिवी बूरा अपनी बड़ी बहन स्वीटी बूरा और बड़े भाई मनदीप बूरा के साथ

सब साथ होते हैं तो लगता है त्योहार है

मेरा भाई मनदीप बूरा रणजी प्लेयर है, वो हरियाणा के लिए क्रिकेट खेलता है, दीदी और मैं बॉक्सिंग में हैं, तो सभी लोग अक्सर घर से बाहर ही रहते हैं। जब कभी हम सब घर में एक साथ होते हैं तो लगता है जैसे कोई त्योहार हो। मम्मी-पापा को भी तब बहुत खुशी होती है। घर पर आम भाई-बहनों की तरह हम भी खूब लड़ते-झगड़ते हैं, पर एक दूसरे की चीजें भी शेयर करते हैं।