कश्मीरी कारीगरी को बढ़ावा:ओला की नौकरी छोड़ी तो रिश्तेदारों ने कहा- अब वॉट्सऐप ही चलाएगी, स्टार्ट अप चलाकर दिखाया, आज हैं ‘उर्जुव’ की फाउंडर

एक महीने पहलेलेखक: मीना

शादी की शॉपिंग के लिए दिल्ली के बाजारों के चक्कर काट रही थी। करोल बाग, सरोजिनी मार्केट, कमला मार्केट, सदर बाजार, तमाम मॉल्स समेत सभी बड़े बाजार घूम लिए थे, लेकिन सिवाए कश्मीरी शॉल के बाजारों में कुछ भी कश्मीरी नहीं मिला। कश्मीरी शादियों में कश्मीरी टिल्ला साड़ी (कश्मीरी जरी), आरी इंब्रोइडरी के सूट्स, कश्मीरी कपड़े और ज्वेलरी बहुत मायने रखते हैं। बाजार में जाने पर कांजीवरम सिल्क, राजस्थानी गोटा वर्क की ड्रेसिज, बनारसी साड़ियां व सभी तरह के कपड़े थे, लेकिन कश्मीरी कढ़ाई व काम के कपड़े कहीं नहीं दिखे थे। शॉपिंग के दौरान समझ आया कि कश्मीरी आर्ट का न कोई ब्रांड है, न कोई डिजाइनर, न कोई डिजाइन हाउस और न ही कोई भी बड़ा स्टोर वहां की ड्रेसिस रखता है। तब मार्केट कश्मीरी आर्ट की बहुत बड़ी कमी नजर आई और समझ भी आई। बस उसी समय मुझे बिजनेस का आइडिया आया और मैंने कश्मीरी आर्ट को बढ़ावा देने के लिए ‘उर्जुव-दि स्पीरिट ऑफ कश्मीर’ की शुरुआत की। हम बात कर रहे हैं कश्मीर निवासी की वत्सला हाली की जो विस्थापन के बाद अब बैंग्लोर में रहती हैं।

वत्सला हाली
वत्सला हाली

भास्कर वुमन से बातचीत में वत्सला बताती हैं, ‘कश्मीर में पैदाइश हुई और विस्थापन के बाद पूरा परिवार हरिद्वार आ गया क्योंकि पापा पहले से ही हरिद्वार में जॉब कर रहे थे। यहां आकर मैंने पढ़ाई की, क्योंकि विस्थापन के बाद लड़का हो या लड़की सभी को एजुकेशन की वैल्यु समझ आने लगी थी। हालांकि, कश्मीरी परिवारों में लड़कियों को पैरों पर खड़ा करना अच्छा माना जाता है और एजुकेशन ही करिअर की करेंसी है। इसलिए मेरे पेरेंट्स ने भी मुझे खूब पढ़ाया। इंजीनियरिंग की स्टूडेंट रही। बाद में कम्युनिकेशन मैनेजमेंट में एमबीए किया। 2016 में बैंग्लोर जाकर ओला कंपनी को जॉइन किया। उससे पहले मैं एडवरटाइजिंग कंपनी में काम कर रही थी। ओला में भी पीआर टीम का हिस्सा रही, तो मार्केटिंग की समझ और बेहतर हुई, लेकिन ओला में काम करने के दौरान मैंने देखा, वहां लोग स्टार्टअप बहुत शुरू करते हैं। मैंने वहीं से सीखा और उन्हें देखकर ही मन बनाया कि मैं भी किसी दिन अपना कुछ काम शुरू करूंगी। ओला में मैंने चार साल नौकरी की और उसके बाद अपना बिजनेस करने का फैसला किया।

‘रिश्तेदारों को लगा अब केवल वॉट्सऐप ही चलाएगी’

2018 में शादी की शॉपिंग की। 2019 में शादी और 2020 में नौकरी छोड़ दी। रिश्तेदारों को लगा कि नौकरी छोड़ दी है...शादी हो गई है... तो अब घर बैठकर सिर्फ वॉट्सऐप ही चलाएगी, लेकिन मैंने बहुत सोच समझकर नौकरी छोड़ी थी। नौकरी छोड़ने का प्लान तभी बनाया था, जब बिजनेस को लेकर मन पूरी तरह से बना लिया था। रिश्तेदारों ने मजाक समझा और मैं कश्मीरी कारीगरी का कुछ-कुछ काम अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाती रही, तब रिश्तेदारों को रहा था कि मैं कोई ‘आंटी टाइप’ बिजनेस शुरू करूंगी जो केवल वॉट्सऐप पर ही चलेगा, लेकिन ‘ऊर्जुव’ का काम वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम के जरिए लोगों के बीच पहुंचा और कमाल कर गया। आज ‘उर्जुव’ एक लाइफस्टाइल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। फैशन बिजनेस में अपनी समझ और बढ़ाने के लिए लंदन स्कूल ऑफ आर्ट्स से फैशन बिजनेस का दो महीने का कोर्स भी कर चुकी हूं।

‘घर को ही ऑफिस बनाया है’

अभी तक नहीं है कोई ऑफिस। सोशल मीडिया से ही मेरा काम लोगों के घर तक पहुंच रहा है। कारीगरों से मिलने कश्मीर गई तो काम की सीरियनेस और बढ़ी। शुरू में स्टोल ही बेचे, लेकिन आज कुर्ते, फिरन, सूट, समर स्टोल, वुलन स्टोल सब कुछ हमारे पास मिल जाऐंगे। केवल कश्मीरी नहीं नॉन कश्मीरी भी मेरे काम को पसंद कर रहे हैं। वत्सला एक वाक्या शेयर करते हुए बताया, ‘कश्मीरी कारीगरी कश्मीरी तो कश्मीर जाकर भी लेकर आ सकते हैं, लेकिन जो नॉन कश्मीरी हैं, उनके पास इस तक पहुंचने का कोई तरीका नहीं है। नॉन कश्मीरी लोग जब मेरे यहां गिफ्ट के तौर पर कश्मीरी आर्ट को खरीदते हैं और अपने प्रियजनों का हंसता-मुस्कुराता फोटो शेयर करते हैं, तब मुझे भी बहुत खुशी होती है। जब बिजनेस शुरू किया था तब ये सोचा था कि अगर ये चला तो ठीक, नहीं चला तो वापस ओला में आ जाउंगी, लेकिन 2020 में ही शुरू हुआ ये स्टार्टअप लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। इंस्टाग्राम पर मैंने अपने काम का प्रमोशन करना शुरू किया तो वहां भी फॉलोअर्स बढ़ गए हैं।

‘राइट टाइम आज ही है’

मेरा फैब्रिक बनारस से आता है और उसे डिजाइन कश्मीर में करवाया जाता है। बैंग्लोर में टेलरिंग करवाई जाती है। चूंकि पति मारवाड़ी हैं तो बिजनेस को आगे कैसे बढ़ाना है, इसकी समझ उनसे मिली। अब काम को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अपनी ये सफलता देखकर मुझे लगता है कि हर लड़की को अपने नाम से कुछ न कुछ शुरू करना चाहिए। मैंने कोरोना के दौरान बिजनेस शुरू किया था। सब मुझे कह रहे थे कि लोग सैनिटाइजर की कंपनियां खोल रहे हैं, तुम कपड़ा बेचोगी, लेकिन चूंकि मैं अपने गोल को लेकर बहुत क्लिअर थी, इसलिए सक्सेस को पकड़ पाई और आगे कोशिशें जारी हैं। हर लड़की को जिसे कुछ करना है, उसे राइट टाइम का वेट नहीं करना चाहिए। राइट टाइम चल कर नहीं आता, राइट टाइम आज और अभी है। Eckhart Tolle की मशहूर किताब ‘द पावर ऑफ नाओ’ पढ़ने के बाद ये बात आसानी से समझ आ सकती है।

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