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ये मैं हूं:आपने महिला-पुरुष दोनों की सरकार देख ली, अब 'अदर्स' को मौका देना चाहिए, क्या मालूम हम कुछ वखरा कर दें

5 महीने पहलेलेखक: मीना

‘मेरा जन्म न लड़का और न ही लड़की के जेंडर में हुआ। मैं थर्ड जेंडर में पैदा हुई। परिवार ने शुरू से चाहा कि मैं लड़का बनकर रहूं, लेकिन मुझे लड़कों की तरह जिंदगी जीने में ऊब होती, फिर एक दिन सूट-सलवार पहन लिया और घर वालों ने मुझे घसीटकर बाहर निकाल दिया। अब मैं अपनी जिंदगी की मालिकन खुद हूं। ये शब्द हैं पंजाब के पटिलाया की रहने वाली जसलीन के। मुझे लोग सोशल मीडिया पर जसीलन पटियाला के नाम से भी जानते हैं। 25 साल की जसलीन वुमन भास्कर से बातचीत में कहती हैं, ‘मेरा जन्म गलत शरीर में हुआ, लेकिन उसका ये मतलब नहीं कि मैं इंसान नहीं हूं। दुनिया मुझे निर्जीव वस्तु की तरह ट्रीट करती। मुझमें भी भावनाएं हैं। मुझे भी दूसरों की बातों का बुरा लगता है। मुझे भी ये शब्द चुभते हैं, जब कोई ‘छक्का’, ‘किन्नर’ कहता है। मेरा नाम जसलीन है, लेकिन मेरे मोहल्ले ने अपनी सहुलियत के हिसाब से मेरा नामकरण किया।

जसलीन पटियाला से हैं और एक्टिविस्ट होने का साथ-साथ नर्स भी हैं।
जसलीन पटियाला से हैं और एक्टिविस्ट होने का साथ-साथ नर्स भी हैं।

बचपन से सजना-संवरना पसंद था
मेरी हरकतें लड़कियों की तरह थीं। मुझे संजना, संवरना, नाचना, सूट-सलवार पहनना पसंद था, लेकिन पिता जी ने मुझे घर में नाचते हुए देख लिया और इतने थप्पड़ मारे कि मैं जोरों से चीखने लगी। उन थप्पड़ों की सिरहन मुझे आज भी डराती है। उस घटना के बाद मैं स्कूल जाती तो लड़कों की ड्रेस में। मेरे मन कीं कोई नहीं सुनता। जब छोटी थी तब लड़कियों के साथ गुट्टी खेलना, उनके साथ पकड़म-पकड़ाई खेलना खूब जमता था, लेकिन इसी बीच स्कूल के लड़के मुझे छेड़ते।
बच्चों का ऐसा बिहेवियर देखकर मैं परेशान होती। कोई कोना पकड़कर खूब रोती। एक दिन मेरी क्लास का एक सीनियर मेरे बगल में आकर बैठ गया और मुझसे बात करने लगा। मैं उसकी बातों में इतनी मशगूल हो गई कि पल भर के लिए अपने सारे दुख भूल गई और बहुत खुश हुई, लेकिन मैं तब सुन्न पड़ गई जब उसने मेरे कमर के निचले हिस्से पर पीछे से हाथ मारा। मैं सुन्न पड़ गई और वहां से भाग गई।
घर में ही घुटने लगी
घर और स्कूल में कोई मेरी सुनने वाला नहीं था। मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है। मुझे परिवार वाले किसी फंक्शन में नहीं ले जाते। मैं घर में घुटने लगी। फिर अपनी ही दुनिया बना ली। परिवार वालों ने मुझे हार्मोन दिलवाए ताकि मैं लड़का बन जाऊं, लेकिन उससे भी कोई असर नहीं पड़ा।
नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान दूसरों के लिए लड़ना शुरू किया
मेरा दाखिला जब कॉलेज में हुआ और मुझे नर्सिंग पढ़ने का मिला तब जिंदगी में खुशी आई। यहां सभी मुझे बड़ा प्यार करते। सब मुझे मेरे नाम से बुलाते और पूछते कि जसलीन कैसी है। मेडिकल की पढ़ाई करते हुए मैं सबके अधिकारों के लिए लड़ने लगी। किसी की फीस का मामला हो या कॉलेज का कोई और मामला, मैं सबके लिए लड़ती।
एक दिन मेरी एक टीचर आकर बोलीं कि जसलीन तुम कॉलेज छोड़ दो, लेकिन मैंने भी कहा कि नहीं, अपने हक की बात करने पर क्या हमें पढ़ने का अधिकार भी नहीं है! ये बात मेरे परिवार वालों तक पहुंच गई। परिवार ने कहा कि जसलीन कॉलेज छोड़ दो, लेकिन मैं अड़ गई। फिर घर वालों ने मेरी कॉलेज की फीस भरनी बंद कर दी। इसके बाद जिंदगी मुश्किल हो गई। मुझे लगा कि सुसाइड कर लूं, लेकिन दूसरे ही पल आया कि अगर सुसाइड करूंगी तो इससे मेरी ही हार होगी। फिर मैंने अपने हिसाब से जिंदगी जीना शुरू कर दिया।

जसलीन की ख़्वाहिश है कि वो कभी किसी बच्चे की मां बन पाती।
जसलीन की ख़्वाहिश है कि वो कभी किसी बच्चे की मां बन पाती।

कॉलेज, होम केयर और गुरुद्वारा मेरा रूटीन बन गए
सुबह कॉलेज जाती फिर पेशेंट्स के घर होम केयर करने और शाम को गुरुद्वारे में। गुरुद्वारे में ही सेवा करती और वहीं खाना खाती। इसके बाद अस्पताल में नाइट ड्यूटी करती। इस तरह मेरा गुजारा भत्ता चलने लगा। अब मेरे पास एक छोटा सा कमरा है और अपने जैसे सतरंगी लोगों की दुनिया है। घर से निकलने के बाद मैं अपने समुदाय के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों के लिए भी लड़ने लगी। सोशल मीडिया पर मेरे काम को सभी ने देखा और खूब सराहा। इस तरह मैं एक नर्स के साथ-साथ एक्टिविस्ट भी बन गई।
बनाई अपनी राजनीतिक पार्टी
इतना संघर्ष झेलने के बाद मैंने 2020 में ‘इंसानियत लोक विकास पार्टी’ बनाई और अब इस बार पटिलाया 2 विधानसभा से विधायकी का चुनाव लड़ूंगी। लोगों ने महिला और पुरुष दोनों की सरकार देख ली। अब उन्हें ‘अदर्स’ को मौका देना चाहिए। क्या पता हमारे जैसे लोग कुछ वखरा कर दें। यानी कुछ अलग कर दें। अभी तक लोगों ने अपने लिए और अपने परिवार के लिए प्रॉपर्टी जोड़ी, लेकिन मैं समाज के लिए कुछ करना चाहती हूं।

जसलीन ने अब अपनी पार्टी बनाई है।
जसलीन ने अब अपनी पार्टी बनाई है।

बच्चा पालने की ख्वाहिश अभी बाकी है...
हमारी जिंदगी बहुत कठिनाइयों से भरी होती है। कई बार खुद के घर की दीवारें ही काटने को दौड़ती हैं। हम कभी मां नहीं बन सकते। कभी किसी की पत्नी नहीं बन सकते, लेकिन आज मेरे पास मेरे पशु-पक्षी हैं जो मुझे देखकर कमले हो जाते हैं। उन्हें मेरे कपड़ों से या जेंडर से कोई मतलब नहीं है। उन्हें बस मेरा प्यार चाहिए। अभी मैं बस एक बच्चे की चाह में हूं। उसके लिए ख्वाब सजाती हूं कि काश एक बच्चा मेरे पास होता, जिसके साथ मैं खेलती। उसके लिए मैं रात में जागकर उसे सुलाती। बस यही ख्वाहिश है।
खुद को हीरा मानें
मैं सभी लोगों को यही कहना चाहूंगी कि खुद को कमतर न मानें क्योंकि हीरे की पहचान जोहरी को होती है जो उसे नहीं जानता वो पत्थर समझकर फेंक देता है। इसलिए सभी लोग खुद को हीरा मानें और कुछ ऐसा करें जिससे लोग आपको याद रखें।