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झूठ से भरी है वोल्फ की किताब, मैंने उससे कभी इस सिलसिले में बात नहीं की: डोनाल्ड ट्रम्प

अमेरिकी जर्नलिस्ट माइकल वोल्फ ने 'फायर एंड फ्यूरी: इनसाइड द ट्रम्प व्हाइट हाउस' बुक लिखी है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 05, 2018, 07:00 PM IST

    • Video- ट्रम्प ने खुद पर लिखी अमेरिकी जर्नलिस्ट की बुक को झूठा करार दिया...

      वॉशिंगटन. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके एडमिनिस्ट्रेशन पर लिखी गई किताब को खुद US प्रेसिडेंट ने झूठ का पुलिंदा कहा। ट्रम्प ने शुक्रवार को ट्वीट किया, "माइकल वोल्फ की किताब झूठ से भरी हुई है। इस झूठी किताब के लिए मैंने उसे (वोल्फ) व्हाइट हाउस में कभी नहीं आने दिया और ना ही उससे इसके लिए कभी बात की।" बता दें कि अमेरिकी जर्नलिस्ट माइकल वोल्फ की किताब 'फायर एंड फ्यूरी: इनसाइड द ट्रम्प व्हाइट हाउस' में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रम्प प्रेसिडेंट नहीं बनना चाहते थे और उनके चुनाव जीतने पर मिलेनिया खुश नहीं थीं।

      किताब पर और क्या कहा डोनाल्ड ट्रम्प ने?


      - ट्रम्प ने ट्वीट किया, "ये पूरी तरह झूठी किताब है, इसमें गलत नजरिया पेश किया गया है और इसके सोर्सेस का कोई अस्तित्व नहीं है। इस आदमी (वोल्फ) की ओर देखिए, इसके पास्ट को देखिए। और ये भी देखिए कि इसे और आलसी स्टीव का क्या हुआ।"
      - ट्रम्प ने अपने पूर्व चीफ स्ट्रैटजिस्ट स्टीव बैनन का जिक्र किया, जिनका इस किताब में कई बार जिक्र किया गया है।

      बुक की रिलीज रोकने की कोशिश की गई?
      - इस बुक की रिलीज रविवार को की जानी थी। ट्रम्प के वकीलों ने इसकी रिलीज को रोकने की कोशिश की, पर वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

      बुक के राइटर का क्या कहना है?
      - वोल्फ ने गुरुवार को ट्वीट किया, "हम आ रहे हैं और आप इसे (किताब को) कल खरीद सकते हैं। शुक्रिया मिस्टर प्रेसिडेंट।"

      क्या दावे किए गए हैं किताब में?

      1) इलेक्शन में जीत ट्रम्प का मकसद नहीं था
      - माइकल वोल्फ ने 'फायर एंड फ्यूरी: इनसाइड द ट्रम्प व्हाइट हाउस' में लिखा, "ट्रम्प का मकसद चुनाव में जीत हासिल करना नहीं था। उन्होंने अपने सहयोगी सैम नूनबर्ग से कहा था कि वे दुनिया का सबसे मशहूर शख्स बनना चाहते हैं। ट्रम्प के लंबे वक्त तक दोस्त रहे फॉक्स न्यूज के पूर्व प्रमुख रोजर आइल्स ने कहा था कि अगर तुम टेलीविजन में करियर बनाना चाहते हो तो उसके लिए प्रेसिडेंशियल इलेक्शन लड़ना होगा।"

      2) व्हाइट हाउस में ट्रम्प के सुझाव उलझाऊ होते थे
      - किताब में लिखा गया है, "व्हाइट हाउस में जाने के बाद ट्रम्प ने गवर्नमेंट और पॉलिसी के लेवल पर कई रैडिकल आइडियाज दिए। ट्रम्प के सुझाव काफी उलझाऊ होते थे। वो किसी चीज को पढ़ते नहीं थे। इतना ही नहीं, जरूरी बातों पर वे सरसरी निगाह तक नहीं डालते थे। कुछ लोगों को मानना है कि इन सब बातों की वजह उनका मुद्दों को लेकर ज्यादा जानकार न होना है।"

      3) मिलेनिया जीत से खुश नहीं थीं
      - "ट्रम्प खुद के जानने पर ही भरोसा करते थे। उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं होता कि जो वो जानते हैं, वह कितना गैर जरूरी है। जिस दिन नतीजे आने वाले थे, रात 8 बजे के बाद उनकी जीत करीब-करीब तय हो गई। डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर ने अपने दोस्त को फोन करके कहा कि उसने अपने पिता को एक भूत की तरह देखा था। मेलानिया की आंखों में आंसू थे, लेकिन वो खुशी के आंसू नहीं थे।"

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      डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी जर्नलिस्ट माइकल वोल्फ की किताब को लेकर शुक्रवार को ट्वीट किया। - फाइल
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