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हफ्तेभर पहले 760 करोड़ मुआवजा देने वाली जॉनसन एंड जॉनसन ने पेपर्स में मानी गलती, बाकी पीड़ित भी घेरेंगे कंपनी को

ग्राहकों के वकील का कहना है कि कंपनी को ऐसे हजारों और मामले झेलने के लिए तैयार रहना होगा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 17, 2018, 07:15 AM IST

हफ्तेभर पहले 760 करोड़ मुआवजा देने वाली जॉनसन एंड जॉनसन ने पेपर्स में मानी गलती, बाकी पीड़ित भी घेरेंगे कंपनी को, international news in hindi, world hindi news

न्यूयॉर्क.बेबी केयर प्रोडक्ट्स बनाने वाली दुनिया की मशहूर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। हफ्तेभर पहले ही न्यू जर्सी के इन्वेस्टमैंट बैंकर स्टीफन लैंजो और उनकी पत्नी ने कंपनी के बेबी पाउडर से मेसाथेलियोमा (कैंसर) होने का दावा करते हुए मुआवजे की मांग की थी। शिकायत में कहा गया था कि कंपनी के पाउडर में एस्बेस्टस का इस्तेमाल किया जाता है, इसी वजह से उन्हें यह बीमारी हुई। जिसके बाद अमेरिकी कोर्ट ने कंपनी को 760 करोड़ रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। फरियादी के वकील और लीगल एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस मामले में फैसला आने के बाद अब वे सभी लोग कंपनी को घेरने की तैयारी कर रहे हैं, जिन्हें पाउडर से सेहत संबंधी समस्याएं हुईं।

कंपनी पर 6 हजार से ज्यादा ऐसे मामले दर्ज हैं

- फरियादी लैंजो के वकील का दावा है कि कोर्ट में पेश किए गए कंपनी के दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि कंपनी पाउडर बनाने में एस्बेस्टस का इस्तेमाल करती रही है। कंपनी के अन्य ग्राहकों व महिलाओं को ओवेरियन कैंसर के मामलों में भी इन्हीं दस्तावेजों को आधार बनाया जाएगा।

- ग्राहकों की तरफ से वकील मार्क लेनिअर का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, कंपनी को ऐसे हजारों और मामले झेलने के लिए तैयार रहना होगा। बता दें कि कंपनी पर 6 हजार से ज्यादा ऐसे मामले दर्ज हैं।

कंपनी का दावा- प्रोडक्ट में एस्बेस्टस का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया

- जॉनसन और इमेरीज़ टेल्क अमेरिका का कहना है कि हम कोर्ट के फैसले से ताज्जुब में हैं। हमारे प्रोडक्ट में एस्बेस्टस का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया। न ही कंपनी के किसी पेपर में ऐसी बात का जिक्र है।

- कंपनी के वकील पीटर बिक्स का कहना है कि 1970 की शुरुआत में कंपनी माइनिंग प्रोसेस में मिलने वाले एस्बेस्टस को रोकने के लिए कोशिशें की थी। दशकों तक लैब और साइंटिस्टों द्वारा टेस्ट के बाद यह साफ हो गया था कि पाउडर में कोई भी नुकसान पहुंचाने वाला तत्व नहीं है।

- हालांकि, एस्बेस्टस और मेसाथेलियोमा में संबंध सिद्ध हो चुके है, लेकिन साइंटिस्टों में मतभेद है कि इससे ओवेरियन कैंसर भी हो सकता है।

- न्यूजर्सी स्थित जॉनसन ने बयान में कहा है कि वादी पहले तो पाउडर से कैंसर होने की बात कह रहे थे, लेकिन जब कई मामलों में हार मिली तो लैंजो केस से वकीलों ने अपना फोकस एस्बेस्टस पर कर लिया था।

सालभर में महिलाओं में कैंसर के 22 हजार मामले

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के मुताबिक, हर साल मेसाथेलियोमा के 3 हजार मामले सामने आ रहे हैं।

विशेषज्ञ ने कहा- बढ़ सकती है कंवनी की मुश्किलें

फोर्डहैम यूनिवर्सिटी में लॉ के प्रोफेसर हॉवर्ड एरिक्सन का कहना है कि कानून के लिहाज से यह आंकड़ा मजबूत है। पिछले साल 22 हजार महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के मामले सामने आए। वादियों का दावा मजबूत करने के लिए यह संख्या काफी है। एरिक्सन का मानना है कि इस फैसले से कंपनी विरोधी लहर को मजबूती मिली है। बाकी केसों पर इसका असर जरूर पड़ेगा।

पाउडर में एस्बेस्टस होने को लेकर अब भी सवाल

जॉर्जिया यूनिवर्सिटी में लॉ विभाग की प्रमुख एलिजाबेथ बर्च का कहना है कि यह सवाल अब भी बना हुआ कि पाउडर में एस्बेस्टस था या नहीं, हर केस तथ्यों के आधार पर सुलझाया जाएगा।

सालभर में महिलाओं में कैंसर के 22 हजार मामले

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के मुताबिक, हर साल मेसाथेलियोमा के 3 हजार मामले सामने आ रहे हैं।

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Web Title: hftebhar pehle 760 karoड़ muaavjaa dene vaali jonsn end jonsn ne pepars mein maani galati, baaki piड़it bhi gherengae kampany ko
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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