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चुनावों में फेसबुक का दुरुपयोग नहीं होगा- जकरबर्ग; सीनेटर बोले- कंपनी पर भरोसा मुश्किल

अमेरिकी कांग्रेस के 44 सीनेटर्स के सामने फेसबुक सीईओ जकरबर्ग की दो दिन में 10 घंटे पेशी हुई।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 12, 2018, 09:48 AM IST

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    • न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि पूछताछ में जकरबर्ग की ओर से फेसबुक को लेकर किए गए कई दावे गलत हैं।
    • जकरबर्ग ने कहा- फेसबुक कॉल डेटा स्टोर नहीं रखता, जबकि वह एंड्रॉयड फोन के कॉल-एसएमएस के रिकॉर्ड रखता है।
    • सीएनएन का कहना है कि जकरबर्ग की पेशी सिर्फ दिखावा है। वे पूछताछ के वक्त कंपनी फिलॉसफी बताते रहे।

    वाशिंगटन. डेटा लीक मामले में फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग मंगलवार-बुधवार को अमेरिकी सीनेट के सामने पेश हुए। कुल 44 सीनेटर्स को सवाल पूछने के लिए 5-5 मिनट मिले थे। सुनवाई करीब 10 घंटे चली। इस दौरान जकरबर्ग ने कहा कि फेसबुक का अब गलत इस्तेमाल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि फेसबुक तय करेगा कि इस साल भारत, पाक, हंगरी, ब्राजील और अमेरिका में होने वाले चुनावों में फेसबुक का दुरुपयोग न हो। हालांकि, सीनेटर्स ने कहा कि बार-बार वादा तोड़ने वाली कंपनी पर भरोसा करना मुश्किल है।

    फेसबुक पर क्या है आरोप?

    - फेसबुक पर आरोप है कि उसने बिना इजाजत फेसबुक के 8.7 करोड़ यूजर्स का निजी डेटा ब्रिटिश फर्म कैंब्रिज एनालिटिका के साथ शेयर किए थे।

    - यह भी आरोप है कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अमेरिका के फेसबुक यूजर्स के निजी डेटा का इस्तेमाल रूस ने ट्रम्प के पक्ष में किया गया था।

    जकरबर्ग ने माफीनामे में क्या लिखा?

    - जकरबर्ग ने लिखा, "हमने अपनी जवाबदेही मानने में चूक की। मुझसे यह बड़ी गलती हुई है, माफ कर दें।"

    - पेशी से पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की समिति ने जकरबर्ग के लिखित माफीनामा की मूल प्रति जारी की। इसमें जकरबर्ग ने लिखा, "मैंने फेसबुक की शुरुआत की। मैं इसे चलाता हूं और यहां जो होता है, उसके लिए जिम्मेदार हूं। यह बिलकुल साफ है कि हमने ऐसे टूल्स को रोकने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया, जिससे नुकसान हुआ। इसका दुरुपयोग फेक न्यूज, चुनाव में विदेशी दखल और हेट स्पीच में हुआ।"

    - जकरबर्ग ने कहा, "मैंने फेसबुक के 8.70 करोड़ यूजर्स के निजी डेटा का दुरुपयोग रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जबकि यह मेरी जिम्मेदारी थी।"

    अब कौन से 2 बड़े बदलाव करेगा फेसबुक?

    - यूजर की लोकेशन वेरिफाई की जाएगी। ताकि, रूस में बैठा व्यक्ति अपने को अमेरिका में नहीं बता सके।
    - एआई टूल्स विकसित किए गए हैं, जो फेक अकाउंट और उसे जेनरेट करने वाले को पहचान लेंगे। साल के आखिर तक कंटेंट रिव्यू के लिए 20 हजार कर्मचारी होंगे।

    अहम सवालों के जवाब

    - फेसबुक यूजर की खरीदारी का और उनका मेडिकल डेटा भी रखती है। यूजर का डेटा कलेक्ट करना और बेचना बंद कर दे तो क्या कंपनी का वजूद रहेगा?

    -लोगों द्वारा शेयर किया गया डेटा स्टोर नहीं किया तो कंपनी का वजूद नहीं रहेगा। कंपनी डेटा नहीं बेचती।


    - क्या यूजर के लॉग ऑफ करने के बाद भी आप उसे ट्रैक करते हैं?

    -हां, हम सुरक्षा कारणों और विज्ञापनों के लिए यूजर को ट्रैक करते हैं।

    - क्या कैंब्रिज एनालिटिका केस में आपका डेटा भी लीक हुआ?

    -हां, उसमें मेरा भी डेटा था।

    - आप यूजर्स को यह जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपते कि उन्हें अनुचित सामग्री का पता चले और वे उसे हटा सकें?

    -इस पर काम हो रहा है। आने वाले वक्त में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए ऐसे कंटेंट को फ्लैग करने का इंतजाम होगा।

    - क्या आप हमें यह बता सकते हैं, आपने पिछले हफ्ते किन लोगों को मैसेज किया? आप हमें उनके नाम बता सकते हैं?

    -नहीं। मैं इसे यहां सार्वजनिक तौर पर नहीं बताना चाहूंगा। इस पर डर्बिन ने कहा, "आपकी निजता का अधिकार, आपकी निजता के अधिकार की सीमाएं और पूरी दुनिया को एक-दूसरे से जोड़ने के नाम पर आप मॉडर्न अमेरिका को क्या दे रहे हैं। मेरे ख्याल से यही सब कुछ है।"

    इन सवालों के दिए गोलमोल जवाब

    - सीनेटर इलियट एंजेल ने पूछा, हिंसा में रुचि रखने वाला कोई शख्स ऐसे ही दूसरे शख्स से संपर्क करता है तो उसे रोकने के लिए आप एल्गोरिद्म में बदलाव करते हैं?

    -हां, हमें ऐसा करने की जरूरत है। यानी, अभी कंपनी ऐसा नहीं कर रही है।

    - फेसबुक पर मौलिक टीवी कंटेंट बढ़ रहा है। क्या आप मीडिया कंपनी हैं?

    -नहीं, हम टेक्नोलॉजी कंपनी हैं।

    - फेसबुक से पैसे भी भेज सकते हैं। क्या आप फाइनेंशियल कंपनी हैं?

    -नहीं, ऐसा नहीं है।

    हर कठिन सवाल का एक ही जवाब- यूजर का पूरा कंट्रोल है

    - यूजर को निजी डेटा डिलीट करने का अधिकार देने के सवाल को जकरबर्ग टाल गए। कहा, इस पर बड़ी रोचक बहस होगी। हर कठिन सवाल के जवाब में जकरबर्ग का एक ही जवाब था- डेटा पर यूजर का पूरा कंट्रोल है। जकरबर्ग ने सांसदों के सवालों पर 15 बार कहा कि हमारी टीम आपके साथ काम करेगी।

    सीनेटर्स: बार-बार वादे तोड़ रही कंपनी पर भरोसा करना मुश्किल
    - पेशी में मार्क ने कहा है कि उनकी कंपनी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट अलेक्सांद्र कोगन और कैंब्रिज एनालिटिका पर मुकदमा करने की सोच रही है। हालांकि, कुछ सीनेटर्स ने कहा, वे इस बात को लेकर सशंकित हैं कि फेसबुक सेल्फ-रेगुलेशन लागू करेगी। उन्होंने कहा कि जो कंपनी निजता के मुद्दे पर बार-बार वादे तोड़ रही हो, उस पर भरोसा करना मुश्किल है।

    - इलिनॉयस के डेमोक्रेट सीनेटर जैन शैकोवस्की ने जकरबर्ग की तब की माफी का भी जिक्र किया जब फेसबुक की स्थापना से पहले वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में थे। शैकोवस्की ने कहा, "बार-बार माफी मांगना इस बात का सबूत है कि सेल्फ-रेगुलेशन काम नहीं करता।"

    पहले कब 5 माफी मांग चुके हैं जकरबर्ग?

    सितंबर 2006 :न्यूज फीड से यूजर नाराज हुए। जकरबर्ग ने कहा, इसका मकसद सोशल वर्ल्ड के बारे में सूचनाएं देना है। गोपनीयता का ध्यान रखेंगे।

    नवंबर 2007 :बीकन फीचर से यूजर नाराज हुए तो कहा, हमने बनाने में गलती की। स्थिति को नहीं संभाला। कुछ ही समय में सुधार लेंगे।

    फरवरी 2009 : सर्विस की शर्तें बदल दीं। यूजर्स को शंका हुई तो कहा, हम ऑनलाइन वर्ल्ड के रोचक मोड़ पर हैं। मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

    अप्रैल 2010 :यूजर्स की आईडी एडवर्टाइजर को देखने की परमिशन। तब जकरबर्ग ने कहा कि कुछ ही हफ्तों में हम प्राइवेसी कंट्रोल मजबूत करेंगे।

    नवंबर 2011 : गोपनीयता पर फेडरल ट्रेड कमीशन के साथ कंसेंट पर साइन किए। तब कहा, मैं पहला शख्स हूं, जिसे स्वीकारने में कतई हर्ज नहीं है कि मुझसे ढेर सारी गलतियां हुईं।

    5 अहम मुद्दों पर क्या कहा फेसबुक सीईओ ने?

    1) निजता का अधिकार: लोगों के लिए यह जानना अहम है कि फेसबुक पर उनकी सूचनाओं का इस्तेमाल कैसे हो रहा है। इसलिए फेसबुक हर बार आपसे पूछता है कि आप सूचना किसके साथ शेयर करेंगे।
    2) पर्सनल डेटा: हम पर्सनल डेटा स्टोर करते हैं। आम भ्रांति है कि हम डेटा एडवर्टाइजर को बेचते हैं। पर ऐसा नहीं है। हम एडवर्टाइजर को जरूरत के मुताबिक प्लेसमेंट देते हैं। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट अलेक्सांद्र कोगन ने फेसबुक का डेटा कैंब्रिज एनालिटिका के अलावा दूसरों को भी बेचा है।
    3) रेगुलेशन: मैं यह नहीं कहता कि कोई रेगुलेशन नहीं होना चाहिए। इंटरनेट के महत्व को देखते हुए मेरे विचार से सही सवाल यह होना चाहिए कि सही रेगुलेशन क्या हो।
    4) रूस का हस्तक्षेप: 2016 में रूस के हस्तक्षेप को देर से पहचाना। इसका खेद है। रूस में कुछ लोगों का काम ही हमारे और दूसरे इंटरनेट सिस्टम का गलत इस्तेमाल करना है। यह ‘आर्म्स रेस’ की तरह है। जब तक ये लोग चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश करते रहेंगे, तब तक विवाद चलता रहेगा।
    5) जिम्मेदारी: यह मेरी गलती है, मैं माफी मांगता हूं। मैंने फेसबुक शुरू किया, मैं इसे चलाता हूं। यहां जो कुछ होता है उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं। हमने टूल्स का दुरुपयोग रोकने की पर्याप्त कोशिश नहीं की।

    विशेषज्ञों की राय: दिखावा है यह पेशी, जकरबर्ग तो सिर्फ वक्त जाया करते रहे

    - जकरबर्ग की पेशी को विशेषज्ञ दिखावा मान रहे हैं। सीनेटरों को 5-5 मिनट दिए गए थे। इसलिए जकरबर्ग कंपनी के मिशन जैसी बातें कर वक्त जाया कर रहे थे। क्रॉस-क्वेश्चन की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए बड़ा खुलासा नहीं हुआ।

    - एक्टिविस्ट और प्रो. जेफिर टीशोट का कहना है कि हमें जकरबर्ग के सामने गिड़गिड़ाना नहीं चाहिए। सीएनएन के मुताबिक, सीनेटरों को यही नहीं मालूम था कि फेसबुक कैसे काम करता है और जकरबर्ग से पूछताछ में हासिल क्या होगा।

    सवालों का जकरबर्ग ने जो जवाब दिया, उनमें से कई जवाब हकीकत से मेल नहीं खाते। न्यूयॉर्क टाइम्स ने जकरबर्ग के जवाबों का विश्लेषण किया है :-

    दावाहकीकत
    फेसबुक के पास कौन सा डेटा है, यह जानने के लिए ‘डाउनलोड योर इन्फॉर्मेशन’ टूल है।यह टूल हाल ही में दिया गया और अधूरा है। कुछ यूजर्स को इसमें अधूरा डेटा मिला है।
    फेसबुक कॉल डेटा स्टोर नहीं करता है।यह एंड्रॉयड फोन के कॉल और एसएमएस के रिकॉर्ड रखता है। ‘डाउनलोड योर इन्फॉर्मेशन’ में यूजर्स को पूरी कॉल हिस्ट्री मिली।
    हमने 2014 में बदलाव किए थे। इनसे कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण रुकना चाहिए था।कैंब्रिज एनालिटिका के पास जो डेटा था, वह कई साल पहले लिया गया था। फेसबुक ने 2014 में बदलाव किए, अमल 2015 में हुआ।
    अमेरिकी चुनाव में रूसी दखल की जानकारी 2016 में चुनाव के समय ही मिली।फेसबुक अभी तक कह रही थी कि 2017 में इसका पता चला। 2016 में जानकारी होने की बात जकरबर्ग ने पहली बार मानी।
    फेसबुक पर हम फेक अकाउंट नहीं रख सकते। आपका कंटेंट भरोसेमंद होना चाहिए।इस प्लेटफॉर्म पर फेक अकाउंट और पेज की भरमार है। रूसी एजेंटों ने गलत पहचान के आधार पर अकाउंट खोले।
    कैंब्रिज एनालिटिका 2015 तक हमारी सेवाएं नहीं ले रही थी।कैंब्रिज एनालिटिका के कर्मचारी ने कहा कि 2014 से फेसबुक का इस्तेमाल कर रहे थे। जकरबर्ग ने भी अपने बयान में संशोधन किया।
    फेसबुक पर सूचनाओं पर आपका कंट्रोल होता है। क्या साझा करना है, आप ही तय करते हैं।कैंब्रिज एनालिटिका को डेटा देने वाले अलेक्सांद्र कोगान के क्विज एेप की शर्त थी कि सूचना का कमर्शियल इस्तेमाल किया जा सकता है। यह शर्त भी थी कि आपके और आपके दोस्तों का डेटा लिया जा सकता है। यानी आपकी सहमति से आपके दोस्तों का भी डेटा लिया जा रहा था।
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    फेसबुक ने हाल ही में माना था कि 8.7 करोड़ यूजर्स का डेटा कैम्ब्रिज एनालिटिका से शेयर हुआ था। -सिम्बॉलिक इमेज
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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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